अच्युतम केशव वंदन | Achyutam Keshav Vandan

अच्युतम केशव वंदन

( Achyutam Keshav Vandan ) 

 

अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार

श्री मंगल इति श्री शुभ,
रग रग अलौकिक उजास ।
छवि अनूप मनमोहनी,
रज रज मृदुल सुहास ।
अनुभूति संग अभिव्यक्ति,
शब्द अर्थ आनंद अपार ।
अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार ।।

पावनता अंतर्संबंध रमन,
अपनत्व सरित प्रवाह ।
आचार विचार पर सेवार्थ,
धर्म आस्था पुनीत निर्वाह ।
साधना स्तुति परम स्पर्श,
दिव्य दर्शन जीवन सार ।
अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार ।।

हर पल दिव्य गंधा सम,
निशि दिन भव्य निखार ।
सृजन नवल ओज प्रभा,
कदम नित दिग्दर्शन विहार ।
प्रति सांस शुभता बंधन,
आहट संग जय जयकार ।
अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार ।।

अनुपम अद्भुत अठखेलियां,
गोप गोपियां गौ धन संग।
प्रेम प्रतिष्ठा माधुर्य स्पंदन,
राधा रानी सौंदर्य कंग ।
निष्काम कर्मयोग स्थितप्रज्ञ,
द्वापर अवतरण सृष्टि उद्धार ।
अच्युतम केशव वंदन से,अंतर्मन नेह सलिल धार।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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