nata

नाता | Nata

नाता

( Nata ) 

 

पीना नहीं है, जीना है जिंदगी
अनमोल है, खिलौना नहीं है जिंदगी
उम्र तो वश में नहीं है आपकी
अनुभवों से ही सीना है जिंदगी

आए और आकर चले गए तो
आने का मकसद ही क्या रहा
हम मिले और मिलकर ही रह गए तो
इस मुलाकात का वजूद ही क्या रहा

हर पल, एक नए इतिहास का सोपान है
आपके भीतर ही बसाआसमान है
ऊंचाई को इसी छू लेना है तुम्हें
तुम्हारे भीतर ही छुपा जहान है

शरीर के अपंगता तो व्यक्तिगत है
सोच के अपंगता नहीं हो तुम्हें
साक्षात ईश्वर है आपके भीतर
न समझने की भूल नहीं हो तुम्हें

कहता है कौन क्या, कहना उनका है
करना है उद्देश्य पूरा , हक आपका है
जाने के बाद का ही जीवन अमर हो पता है
भले आज कुछ नहीं हो ,कल से ही नाता है

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

शह और मात | Sheh aur Maat

Similar Posts

  • योग शक्ती | Yoga kavita

     योग शक्ती  ( Yoga shakti )   –>योग रोग की,बिना नोट की, स्वस्थ शरीर की दबा अचूक || ==>>हिन्दुस्तान की देन दबा ये,राम-वाण सी चले अचूक ||   1. योग करो दुख दूर करो,बीमारियों को चूर करो | पेट रोग और मोटापे को,योगा से ही दूर करो | रक्त चाप,दिल का दौरा भी,योगा से कंट्रोल…

  • रेशम के धागे | Resham ke Dhaage

    रेशम के धागे ( Resham ke dhaage )   रेशम के इस धागे की ये बात ही बड़ी-निराली है, सजाकर लाती बहनें इसदिन प्यारी सी थाली है। लम्बी उम्र की कर कामना तिलक वह लगाती है, बिठाकर बाजोट भैय्या के हाथ राखी बाॅंधती है।। रोली-मोली और मिठाई नारियल लेकर आती है‌‌, ख़ुश रहना सदैव प्यारे…

  • बसंत ऋतु के आगमन पर | Basant Ritu par Kavita

    बसंत ऋतु के आगमन पर ( Basant ritu ke aagman par )   मदिर से है बसंत, आये हैं जी पाहुने से सखि पिया बिन मोहे, कछु न सुहावत है।। खखरा के पात उड़, उड़ आये द्वारे आज पवन के झौकन भी, जिया को जगावत है।। अमुआ के बौर वाली, वास है सुवास आली महुआ…

  • कुछ शब्द शेर के | Sher ke kuch shabd

    कुछ शब्द शेर के ( Kuchh shabd sher ke ) ……. मुसाफिर तंन्हा हूँ मै, साथ चलोगे क्या, तुम मेेरे। है मंजिल दूर, सफर मुश्किल , क्या साथ चलोगे मेरे। यही है डगर, एक मंजिल है तो फिर, साथ चलो ना, सफर कट जायेगा दोनो का, हमसफर बनोगे मेरे। …… करेगे दुख सुख की बातें,…

  • हे नाथ बचा लो | Kavita

    हे नाथ बचा लो ( He nath bacha lo )   जग के सारे नर नारी रट रहे माधव मुरलीधारी यशोदा नंदन आ जाओ मोहन प्यारे बनवारी   चक्र सुदर्शन लेकर प्रभु नियति चक्र संभालो कहर कोरोना बरस रहा आकर नाथ बचा लो   उठा अंगुली पर गोवर्धन बचा लिया गोकुल को हर लो पीर…

  • ढलने लगी धीरे-धीरे जवानी

    ढलने लगी धीरे-धीरे जवानी ढलने लगी धीरे-धीरे जवानीबदलने लगी धीरे-धीरे कहानीभरोसा दिलों का अब घटने लगापिघलने लगी धीरे-धीरे रवानी।। बुढ़ापा बदन पर छाने लगाचांद सा चेहरा मुरझाने लगाचेहरे पर दिखती नही कोई रौनकसचमुच बुढ़ापा अब आने लगा।। वो मौसम दिखे ना फिजाएं दिखेहरी भरी दिलकश हवाएं दिखेदिखता नहीं है जुनून दिल में कोईनजरों में अब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *