Krishna Janmashtami Par Kavita

नटखट नन्दकिशोर | Natkhat Nandkishor

नटखट नन्दकिशोर

( Natkhat Nandkishor )

नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं,

कान का कुंडल मुझको भाऐ,
बांसुरिया मेरा चैन चुराऐ,
मोह मे उसके फंसती जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं,

किया जाने कौन सा जादू टोना,
बनी मै तो उसके हाॅथ खिलौना,
कहे मुझे जैसा मै करती जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं,

धेनु चराने जब वो जाए,
चाहे गोपियन संग रास रचाऐ,
जाए जहाॅ पीछे पीछे दौड़ी जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की दोउ अंखियन पे वारी जाऊं,
नटखट नन्दकिशोर की मीठी बतियन से हारी जाऊं,

Abha Gupta

आभा गुप्ता
इंदौर (म. प्र.)

यह भी पढ़ें :-

हल छठ पर हाइकू

Similar Posts

  • खुद भी हिंदी बोलिये | 14 September Hindi diwas par kavita

    खुद भी हिंदी बोलिये ( Khud bhi hindi boliye )   खुद भी हिंदी बोलिये, औरों को दो ज्ञान। हिंदी में ही है छिपा, अपना हिंदुस्थान।।   चमत्कार हर शब्द में, शब्द शब्द आनंद। विस्तृत है साहित्य भी, दोहा रोला छंद।।   सब भाषा का सार है, सबका ही आधार। माँ हिंदी की वंदना, सुधि…

  • मैली चादर | Maili Chadar

    मैली चादर ( Maili Chadar ) यौवन का वो पड़ाव था, हर बात से अनजान थी, गांव की वो भोली लड़की, अपने शारीरिक अंगों से भी अनजान थी, एक रोज ना जाने क्या हुआ, दर्द से उसका हाल बेहाल हुआ, उठकर देखा जब खुद को, रक्त से सना पाया खुद को, हैरान थी देखकर अपनी…

  • जुदाई | Judaai

    जुदाई ( Judaai )    धड़कने कभी ह्रदय से जुदा नहीं हो सकती है। परदेसी पिया जुदाई सहन नहीं हो सकती है। पलक बिछाए नयना बैठे नजरे राहें तकती है। अधर गुलाबी प्रीत बरसे पांव पायल बजती है। परदेसी पिया जुदाई काले केश घटाएं घिरती बूंदे बरसात सताती है। मन का मीत पिया परदेसी याद…

  • नेता बना तो दंगा कराने निकल पड़ा | Neta bana to

    नेता बना तो दंगा कराने निकल पड़ा ( Neta bana to dnaga karane nikal pada )    वो ज़िंदगी को स्वर्ग बनाने निकल पड़ा, अंधियारे मे चिराग़ जलाने निकल पड़ा।   जब मुफलिसी ने हमको मुफलिस किया यहां.. बेची क़िताब  कर्ज चुकाने निकल  पड़ा।   जब जिम्मेवारियों का बोझ सिर पे आ गया,  कम उम्र में वो…

  • होकर उल्लू पर सवार

    होकर उल्लू पर सवार होकर उल्लू पर सवार ,चली लक्ष्मी हर घर-द्वार। यश, धन की करने बरसात,अनिल मंद स्वर गाए मल्हार । सोने का रथ,रजत पालकी,रथ पर हुए कुबेर सवार । ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि प्रदाता ,संग गणेश हैं , दीप आधार। मन भावन प्रिय लगे सुरुचिकर,दीपावली, धनतेरस त्यौहार। जीवन में शुभ-लाभ है छाया ,दीप जले…

  • हिंदी हिंदुस्तान | Hindi Hindustan

    हिंदी हिंदुस्तान ( Hindi Hindustan ) हिंदी हृदय गान है, मृदु गुणों की खान। आखर-आखर प्रेम है, शब्द- शब्द है ज्ञान।। बिंदिया भारत भाल की, हिंदी एक पहचान। सैर कराती विश्व की, बने किताबी यान।। प्रीत प्रेम की भूमि है, हिंदी निज अभिमान। मिला कहाँ किसको कहीं, बिन भाषा सम्मान।। वन्दन, अभिनन्दन करे, ऐसा हो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *