Abhinandan Nav Varsh Tumhara

अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा | Kavita Abhinandan Nav Varsh Tumhara

अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा 

( Abhinandan Nav Varsh Tumhara ) 

 

आओ नये वर्ष में यह संकल्प करें,
बीती बातों को नजर अन्दाज करें।
दिये जो जख़्म हमें पुराने साल ने,
मिलकर खुशियों से उन्हें नष्ट करें।।

आपसी मतभेद सबसे हम मिटाऍं,
घर परिवार में फिर से प्यार बढा़ऍं।
समाज देश में अपनी प्रतिष्ठा लाऍं
मिलकर नूतन वर्ष के जश्न मनाऍं।।

खुली बाहों से वेलकम करें इसका,
आभार करें अपने- २ परमेश्वर का।
जिसने नया सवेरा हमको दिखाया,
मौत के मुँह से हम सबको बचाया।।

घर – घर मे आज खुशियाँ मनाओ,
निर्धन, मजदूर का साथ निभाओ।
इनको भी लगे आया है नया साल,
सब लोगों में दे प्यार और उपहार।।

अभिनंदन करो इस नूतन वर्ष का,
आस लगाओ अपनों की राह का।
एक नयी उदय का सवेरा हो जाऍं,
समय भी सब का साथ देता जाऍं।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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