• करवाचौथ का | Karwa Chauth Ka

    करवाचौथ का दिख रहा दीवाना जन-जन तुमको करवा चौथ काभरना होगा आज दामन तुमको. करवा चौथ का हाथ खाली आ गये लाये नहीं उपहार कुछध्यान तो रखना था साजन तुमको करवा चौथ का कर दिया क्या क्या निछावर मैंने तुम पर प्यार सेयाद दिलवायेगा दर्पन तुमको करवा चौथ का प्यार से पानी पिलाना खोलूँगी उपवास…

  • करवा चौथ : आस्था और विश्वास का प्रतीक

    बदलते समय में खासकर नवविवाहितों के बीच पतियों ने भी अपनी पत्नियों के लिए व्रत रखना शुरू कर दिया है। इस प्रकार अब, एक पुराना त्यौहार ग्रामीण और शहरी सामाजिक परिवेश दोनों में अपने पुनर्निमाण के माध्यम से लोकप्रिय बना हुआ है। हमारे यहाँ करवा चौथ से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं। मगर सबसे लोकप्रिय…

  • शिक्षक ही सच्ची प्रेरणा

    शिक्षक ही सच्ची प्रेरणा प्रणाम शब्द शेष हैं l क्यूंकि ?वे देश के विशेष हैं llशिक्षक रूप सक्षिप्त नहीं lशिक्षक रूप विस्तृत सही llतत्व से प्रकृति सजी lगुण से उपदेष्टा सजे llसमय बना पथिक रे lतो गुरु बना अद्री रे ll की विस्मरण शिष्टाचार lलगाए शासन चार llमहिमा उनकी अपरम्पार lलगा सभका जीवन पार llहकीम…

  • बोलना बेमानी हो जाए

    बोलना बेमानी हो जाए बोलो!कुछ तो बोलोबोलना बेमानी हो जाएइससे पहले लब खोलो पूछोअरे भई पूछोपूछने मे जाता ही क्या हैपूछना जवाब हो जाएइससे पहले पूछ लो चलोचाहे कितनी पीड़ा होचलना बस कदमताल न हो जाएवैसे भीचलना जीवन की निशानी हैरुकना मौत की लिखोचाहे कुछ भीकिसी के वास्तेचाहे कितना खराब हो मौसमलिखना बस नारा न…

  • दलित | Dalit

    दलित ( Dalit ) वो हिंदू थे न मुसलमानवो थे मेहनतकश इंसानवो कहीं बाहर से नहीं आए थेवो मूलनिवासी थेवो आदिवासी थे वो जुलाहा थे बंजारा थेवो भंगी थे तेली थेवो धोबी थे कुर्मी थेवो कोरी थे खटीक थेवो लुहार थे सुनार थेवो चर्मकार थे महार थेवो मल्लाह थे कुम्हार थे ब्राह्मण कहते थे:वे शुद्र…

  • दो अज़नबी एक रात

    दो अज़नबी एक रात पूँछ ले ऐ मुसाफ़िर रात की तन्हाई का सहारा lकलम कह उठेगी देख आसमान में चमकता सितारा llचाँद भी ऐंठकर चिल्ला उठता है lजब मेरे संघ एकऔर चाँद दिखता है ll चाँद ने पूँछा किसओर है चित lबीते पलकी ओर है पूँछ मत llकह दो ,ढलती रात में बढ़ता अंधेरा है…

  • बात जब भी चली मुहब्बत की

    बात जब भी चली मुहब्बत की बात जब भी चली मुहब्बत कीदास्ताँ फिर लिखी मुहब्बत की नफ़रतों का अँधेरा छाया हैकर दो तुम रौशनी मुहब्बत की रूह से रूह को ही निसबत हैये है पाकीज़गी मुहब्बत की तंज़ कसता है तो ज़माना कसेहम करें शायरी मुहब्बत की रोज़े अव्वल से आज तक हमनेदेखी दीवानगी मुहब्बत…

  • घर की इज़्ज़त | Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat ) यह हुनर दिल में ढाल कर रखनाघर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँकोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँअपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जायेदर्द दिल का निकाल कर रखना मैं हूँ…

  • तलवार दी गई | Talwar di Gayi

    तलवार दी गई ( Talwar di Gayi ) ख़ुद पर ही वार करने को तलवार दी गईथाली में यूँ सजा के हमें हार दी गई गर्दन हमारी यूँ तो सर-ए-दार दी गईफिर भोंकने को जिस्म में तलवार दी गई कहने को हम खड़े थे अज़ीज़ों के दर्मियांमंज़िल हमीं को और भी दुश्वार दी गई हमने…

  • ये नफ़रत की दुनिया

    ये नफ़रत की दुनिया संभालो तुम अपनी ये नफ़रत की दुनिया।बसानी है हम को मुह़ब्बत की दुनिया। लड़ाती है भाई से भाई को अकसर।अ़जब है तुम्हारी सियासत की दुनिया। नहीं चाहिए अब , नहीं चाहिए अब।ये दहशत की दुनिया ये वहशत की दुनिया। फंसी जब से नर्ग़े में यह बातिलों के।तमाशा बनी है सदाक़त की…