ये नफ़रत की दुनिया

ये नफ़रत की दुनिया

ये नफ़रत की दुनिया

संभालो तुम अपनी ये नफ़रत की दुनिया।
बसानी है हम को मुह़ब्बत की दुनिया।

लड़ाती है भाई से भाई को अकसर।
अ़जब है तुम्हारी सियासत की दुनिया।

नहीं चाहिए अब , नहीं चाहिए अब।
ये दहशत की दुनिया ये वहशत की दुनिया।

फंसी जब से नर्ग़े में यह बातिलों के।
तमाशा बनी है सदाक़त की दुनिया।

जहां मिल के रहते थे शेख़-ओ-बरहमन।
कहां खो गई वो अख़ुव्वत की दुनिया।

फ़क़त चंद फ़िरक़ा परस्तों के सदक़े।
लुटी जा रही है मुरव्वत की दुनिया।

जहां दिल्लगी,दिल्लगी ही थी हर सू।
कहां गुम हुई वो ज़राफ़त की दुनिया।

फ़राज़ उसकी क़िस्मत पे नाज़ां है यह दिल।
मयस्सर है जिसको मुसर्रत की दुनिया।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • हमने देखी है | Hamne Dekhi Hai

    हमने देखी है ( Hamne Dekhi Hai ) वह्म जैसी कोई बला ही नहीं।इस मरज़़ की कहीं दवा ही नहीं। हमने देखी है हम बताएंगे।हिज्र जैसी कोई सज़ा ही नहीं। लाख कोशां रहे अ़दू लेकिन।क़द हमारा कभी घटा ही नहीं। ज़ुल्म ढाता है रात दिन फिर भी।उसकी नज़रों में ये ख़ता ही नहीं। अ़हदे ह़ाज़िर…

  • वो घूंघट पट खोल रहा है

    वो घूंघट पट खोल रहा है वो घूंघट पट खोल रहा हैतन-मन मेरा डोल रहा है आजा,आजा,आजा,आजामन का पंछी बोल रहा है अपने नग़मों से वो मेरेकानों में रस घोल रहा है पाप समझता था जो इसकोवो भी अब कम तोल रहा है मेरे घर की बर्बादी मेंअपनों का भी रोल रहा है लगते हैं…

  • उठाने के बाद | Uthaane ke Baad

    उठाने के बाद ( Uthaane ke Baad ) दिल की महफ़िल से मुझको उठाने के बादकोई रोता रहा मुस्कुराने के बाद उनके तीर – ए – नज़र का बड़ा शुक्रियाज़िन्दगी खिल उठी चोट खाने के बाद हौसलों को नई ज़िंदगी दे गयाएक जुगनू कहीं झिलमिलाने के बाद उसने दीवाना दिल को बना ही दियाइक निगाह…

  • छलावा | Chalawa

    छलावा ( Chalawa )    रंगीन दुनिया में सबका अपना -अपना पहनावा है, कहीं सच में झूठ,कहीं झूठ में सच का दिखावा है। बेमतलब ख़्वाबों से रिश्ते गढ़ता रहता है कोई मन को तह रख तर्कों से कोई करता छलावा है। आवारा बादलों की ज़द कहाँ समझ पाया दिल ठिकाना और भी इनका बरखा के…

  • पानी पानी हर तरफ़

    पानी पानी हर तरफ़ दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़ बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिएबज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़ तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गयाकर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने…

  • निगाहें मिलाकर | Ghazal Nigahen Mila Kar

    निगाहें मिलाकर ( Nigahen Mila Kar )   देखों ना सनम तुम यूँ नज़रे घुमाकर करों ना सितम यूँ निगाहें मिलाकर ! करोगी कत्ल तुम कई आशिको का, ये जलवें हसीं यार उनको दिखाकर ! घटाओं सी जुल्फ़े बनाती है कैदी, करोगी हमें क्या कैदी तुम बनाकर ! ज़रा सा ये दिल है इसे बख़्श…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *