• सँभलना जो सिखातें हैं

    सँभलना जो सिखातें हैं सँभलना जो सिखातें हैं यहाँ बापू मिले मुझको ।बिठाकर काँध पर घूमें वही चाचू मिले मुझको ।।१ जहाँ में ज्ञान सच्चा जो सिखाये सीख लेता हूँ ।मुझे जो राह पे लाये वही अब गुरु मिले मुझको ।।२ तमन्ना आखिरी अब यह कहीं मैं तीर्थ पे जाऊँ ।वहाँ भगवान के ही रूप…

  • काम कोई दुआ नहीं आई

    काम कोई दुआ नहीं आई वक़्त पर जब दवा नहीं आईकाम कोई दुआ नहीं आई मुझको गूंगी लगी ये दुनिया फिरएक आवाज़ क्या नहीं आई कितना फूटा हौआ है भाग मेरावो गया और क़ज़ा नहीं आई झूट बोलो तो झूट सच ही लगेएक बस ये अदा नहीं आई फ़ायदा कुछ नहीं मिला मुझकोबेवफ़ा को वफ़ा…

  • खान मनजीत भावड़िया की कविताएं साहित्य व संस्कृति धरोहर

    खान मनजीत भावड़िया मजीद का संस्कृति में महत्वपूर्ण सहयोग है: यदि आप कविताओं के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो वैदिक प्रकाशन से सम्पर्क साधा जा सकता है।आपके द्वारा दी गई जानकारी खान मनजीत भावड़िया मजीद के संस्कृति में महत्वपूर्ण सहयोग को दर्शाती है। उनकी कविताएँ और लेख न केवल हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा…

  • खेल के सूत्र बनाएँ जीवन

    खेल के सूत्र बनाएँ जीवन खेल की क्रीड़ा निराली बैर ,कभी धैर्य, परीश्रम, लगन है lतो कभी खिन्न – उदास दर है ,सहयोग , एकता भी न भूलो lतो खेल से क्या मिला ,हार – जीत या आत्मनिर्भर l स्वस्त है , मस्त है ,जिससे तन – मन चुस्त है lसिद्धांत नव दो ग्यारह नहीं…

  • भेड़ और भेड़िए Bhed Aur Bhediye

    भेड़ और भेड़िए ( Bhed Aur Bhediye ) भेड़ और भेड़िए का रिश्ताबहुत पुराना हैं आदिम काल सेभेड़ अमूमन भेड़ ही रहीभेड़िए हमेशा भेड़िएबहुत कोशिश के बाद भीउनका कत्ल-ए-आम रुका नहीं हैकुछ भेड़े मिल गई हैं भेड़ियों सेइस उम्मीद मेंकि शायद उनकी जानबख्श दी जाएगीपर वो जानती नहीं थीकि पिछली भेड़ों ने भीयही गलती दोहराई…

  • शरद चाँदनी | Sharad Chandni 

    शरद चाँदनी ( Sharad Chandni ) चली है ..पवन शीतल मंद सुगन्ध नूपुरखिले खिले हुए हैशरद की चाँदनी मेंकुन्द के फूलचंद्र पूर्ण आकार सोलह कलाओं को संग लियें उदित हुआ बदली तेजपुंज से भरी-भरीहो रही है अमृत वर्षाआकाश से आज बरस रही है शरद चाँदनीहै ओस की बूँद में भीअमृत बूटी चूर्णसब रोगों का होगा नाशमाँ…

  • शबाब आया नया – नया है

    शबाब आया नया – नया है शबाब आया नया -नया हैसुरूर गहरा नया- नया है करें गिले किस तरह बताओबना ये रिश्ता नया -नया है कहें तुझे कैसे अलविदा हमअभी नजारा नया- नया है पिला दे उल्फ़त के जाम साकीहुआ दिवाना नया -नया है भडक रहे हैं जिगर में शोलेउठा ये पर्दा नया- नया है…

  • बिता दशहरा | Bita Dussehra

    बिता दशहरा ( Bita Dussehra ) नव दिन नवमी बीती दशहरा बीत गयादस दिन में एक शब्द न लिख पाया। असुरों का वध कर देवों को भय मुक्त कियामहिषासुरमर्दिनी रक्तबीज का खून पिया। हे माता रानी चरण वंदन अभिनन्दनदुनिया दारी में बहुत कुछ छूट गया। वर दे वरदायिनी जगत कल्याणीछुट जाएं काम क्रोध मद लोभ।…

  • रंग ए हयात बाक़ी है | Rang e Hayat Baki Hai

    रंग ए हयात बाक़ी है ( Rang e Hayat Baki Hai ) अब भी रंग-ए-हयात बाक़ी हैहुस्न की इल्तिफ़ात बाक़ी है आ गये वो ग़रीबख़ाने तकउनमें पहले सी बात बाक़ी है चंद लम्हे अभी ठहर जाओऔर थोड़ी सी रात बाक़ी है तोड़ सकता नहीं वो दिल मेराउसमें इतनी सिफ़ात बाक़ी है हाँ यक़ी है मिलेंगे…

  • मुह़ब्बत के वादे निभाने की रुत है

    मुह़ब्बत के वादे निभाने की रुत है मुह़ब्बत के वादे निभाने की रुत है।यही तो नशेमन सजाने की रुत है। ख़िज़ाएं बहारों में ढलने लगी हैं।फ़िज़ाएं भी करवट बदलने लगी हैं।न यूं दूर जाओ निगाहें चुरा कर।यही तो निगाहें मिलाने रुत है।मुह़ब्बत के वादे निभाने की रुत है। गुलाबों का शाख़ों पे हिलना तो देखो।ये…