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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • दूर होकर भी पास
    कविताएँ

    दूर होकर भी पास

    ByAdmin October 22, 2024October 22, 2024

    दूर होकर भी पास तू दूर है, मगर दिल के पास है,तेरी यादों में हर पल का एहसास है।आँखों में ये आंसू तुझ तक पहुँचने को बेकरार हैं,काश तू सुन सके, मेरी दिल की ये पुकार है। रातों की तन्हाई में तेरा नाम पुकारता हूँ,हर धड़कन में तुझे ही तो महसूस करता हूँ।दूरी चाहे जितनी…

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  • Arth
    कविताएँ

    अर्थ | Arth

    ByAdmin October 22, 2024October 22, 2024

    अर्थ ( Arth ) अर्थ में ही अर्थ हैअर्थ के बिना सब व्यर्थ है। सत्य साधना या सत्कारसभी के लिए है यह जरूरी,जीवन का आवश्यक यह शर्त हैअर्थ के बिना सब अनर्थ है। सीधे मुॅंह कोई बात नहीं करतानजर रहती सभी की वक्र है,साज सम्मान के लिए यह जरूरीअर्थ नहीं तो यह दुनिया लगती व्यर्थ…

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  • नंदवन के घर आनंद लाल
    कविताएँ

    नंदवन के घर आनंद लाल

    ByAdmin October 22, 2024October 22, 2024

    नंदवन के घर आनंद लाल दयावान ही चक्रधारी है ,मुरलीवाला ही चमत्कारी है lराधा – कृष्ण – रुक्मणि है ,तरल लीला , कृष्ण लीला lसखी राधा तो सखा सुदामा l मुरली अगर सुरों की लीला ,तो मेघ सजे वर्षा की लीला lउँगली बनी गोवर्धन लीला ,कद्रू पुत्र यमुना कुंड लीला lआलम, मीरा, सुर में भी…

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  • कैसे बनता तूँ शायर
    साहित्यिक गतिविधि

    डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक द्वारा अनुवादित पुस्तक “कैसे बनता तूँ शायर” मोहन सिंह मेले पर लोकार्पित

    ByAdmin October 22, 2024October 22, 2024

    आज जगदेव सिंह जस्सोवाल (लुधियाना) की स्मृति में 46वें प्रो. मोहन सिंह मेले पर प्रो. मोहन सिंह की चुनिंदा रचनाओं का हिंदी में अनुवाद की गई पुस्तक “कैसे बनता तूँ शायर” लोकार्पित की गई। इसका अनुवाद पंजाबी और हिंदी की प्रसिद्ध शायरा डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक द्वारा किया गया, जो लगभग पाँच साल की कठिन…

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  • बापू से गुहार | Bapu se Guhar
    कविताएँ

    बापू से गुहार | Bapu se Guhar

    ByAdmin October 21, 2024October 21, 2024

    बापू से गुहार ( Bapu se guhar ) प्यारे बापू आज अगर तुम इस युग में जिंदा होते।हम जैसे निष्क्रिय लोगों के बीच में तुम जिंदा होते ।देख के सारी चाल कुचालें तुम बापू,निश्चय ही हम सब से तुम शर्मिंदा होते । 1 आओ बापू अब फिर से तुम भारत में आओ।आज के नेताओं को…

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  • धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की
    ग़ज़ल

    धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की

    ByAdmin October 21, 2024October 21, 2024

    धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की धूप ऐसी पड़ी मुह़ब्बत की।खिल उठी हर कली मुह़ब्बत की। शम्अ़ नफ़रत की बुझ गई फ़ौरन।बाद जब भी चली मुह़ब्बत की। उड़ गए होश सब रक़ीबों के।बात ऐसी उड़ी मुह़ब्बत की। बाद मुद्दत के आज देखी है।उनके रुख़ पर हंसी मुह़ब्बत की। लाख शोअ़ले उठे बग़ावत के।पर न सूखी नदी…

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  • फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहीं
    ग़ज़ल

    फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहीं

    ByAdmin October 21, 2024October 21, 2024

    फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहीं फूल तो ज़िन्दगी में खिला ही नहींकोई अपना तो जग में हुआ ही नहीं आज वो भी सज़ा दे रहें हैं मुझेजिनसे अपना कोई वास्ता ही नहीं मैं करूँ भी गिला तो करूँ किसलिएकोई अपना मुझे तो मिला ही नहीं जिनसे करनी थी कल हमको बातें बहुतउसने लम्हा…

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  • हम रोते हैं
    ग़ज़ल

    हम रोते हैं | Hum Rote Hain

    ByAdmin October 21, 2024October 21, 2024

    हम रोते हैं ( Hum Rote Hain ) दुख में तन्हा हम रोते हैंसुख में शामिल सब होते हैं खार ही खार दिखे हैं हर सूहम हर सू जब गुल बोते हैं फ़सलों पर हक़ ग़ैर जतायेंखेत तो जब हमने जोते हैं लालच के रथ पर जो बैठेंअपना भी वो धन खोते हैं उनके आँसू…

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  • बज़्म को अब न आज़माओ तुम
    ग़ज़ल

    बज़्म को अब न आज़माओ तुम

    ByAdmin October 21, 2024October 21, 2024

    बज़्म को अब न आज़माओ तुम बज़्म को अब न आज़माओ तुमशेरों में कुछ नया सुनाओ तुम बिन तेरे हम न जी सकेंगे अबदूर नज़रों से यूँ न जाओ तुम वो भी बेटी किसी के है घर कीअब न दुल्हन कोई जलाओ तुम अम्न का दीप है जलाया जबये अदावत भी अब मिटाओ तुम हो…

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  • एड्रिएन रिच
    कविताएँ

    एड्रिएन रिच की अनुवादित कविता | अनुवादक- दीपक वोहरा

    ByAdmin October 21, 2024October 21, 2024

    एड्रिएन रिच का जन्म 1929 में बाल्टीमोर, मैरीलैंड, यू.एस.ए. में हुआ था। वह लगभग बीस काव्य संग्रहों की लेखिका हैं और उन्हें एक नारीवादी और क्रांतिकारी कवयित्री कहा जाता है। पेड़ एक बिम्बों से सजी बहुत गहरी सिंबॉलिक कविता है। कवयित्री ने घर, पेड़ और जंगल तीन प्रतीक लिए हैं। घर समाज है, जहां स्त्री…

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