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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • शुभम साहित्यिक संस्था की मासिक काव्यगोष्ठी: शायर विनय साग़र की अध्यक्षता में काव्य रस की बूँदें
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम साहित्यिक संस्था की मासिक काव्यगोष्ठी: शायर विनय साग़र की अध्यक्षता में काव्य रस की बूँदें

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा मासिक काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन संस्था की अध्यक्ष सत्यवती सिंह सत्या के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम कवि इंद्रदेव त्रिवेदी के आवास पर आयोजित किया गया, जिसमें अध्यक्षता सुप्रसिद्ध शायर विनय साग़र जायसवाल ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार…

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  • एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna
    ग़ज़ल

    एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna

    ByAdmin September 24, 2024September 24, 2024

    एक दिलदार अपना ( Ek Dildar Apna ) रखा है सहेजे हुए प्यार अपनाक़िताबों में गुल एक दिलदार अपना मुहब्बत कसौटी पे बिल्कुल ख़री हैतभी तो जताया है अधिकार अपना सनम देवता मैंने माना तुम्हीं कोकरो तुम भी इक रोज़ इज़हार अपना फ़लाने की बेटी सगी से भी बढ़करजो अस्मत लुटी दिल है बेज़ार अपना…

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  • मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो | Mere Yaar Se
    ग़ज़ल

    मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो | Mere Yaar Se

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    मेरे यार से तुम मुखातिब करा दो मेरी कैफ़ियत को मुनासिब करा दो,मुहब्बत का मसला है वाज़िब करा दो। रहेगा ये अहसान मुझ पर हमेशामेरे यार से तुम मुखातिब करा दो। दुआ ना दया को किसी से कहेंगेसनम बस हमारे मुसाहिब करा दो ! रहेगी शिकायत न जग से कभी फिर,ज़रा इक मुलाक़ात वाज़िब करा…

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  • अपनापन
    कहानियां

    समझौता : लघुकथा

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    शकुन आज बड़े वर्षों में बाद दोस्तों से मिल रही थी। दोस्तों की बहुत ज़िद करने पर ही घर से निकली थी। बच्चों ने भी जबरदस्ती दोस्तों से मिलने भेजा था। आज वर्षों बाद मुस्कुरा रही थी, गुनगुना रही थी, खुश होकर तस्वीरें खिंचवा रही थी। दिन भर मस्ती में गुज़र गया। शकुन ने तो…

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  • निर्मल जैन ‘नीर’ के हाइकु | Nirmal Jain ke Haiku
    हाइकु

    निर्मल जैन ‘नीर’ के हाइकु | Nirmal Jain ke Haiku

    ByAdmin September 23, 2024July 12, 2025

    विश्व जनसंख्या दिवस बदलो सोच~बढ़ती जनसंख्याधरा पे बोझ●रोज सताती~कल की चिंता हमेंखूब रूलाती●गम ही गम~घटते संसाधनआँखे है नम●बुरा प्रभाव~शिक्षा,स्वास्थ्य,खानाहुआ अभाव●भूल न जाओ~जनसंख्या अंकुशखुशियाँ पाओ● नशा सदैवध्यान रखनाधूम्रपान है निषेधकभी मतकरना●बातरखना यादतम्बाकू गुटखे सेजीवन होताबर्बाद●नशाबहुत बुराखाँसी, दमा, कैंसररहे जीवनअधूरा●नशामुक्त समाजहम सबने मिलकरलिया संकल्पआज योग दिवस योग की माया~पहला सुख होतानिरोगी काया•स्वच्छ हो मन~नियमित योगा सेस्वस्थ हो…

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  • बेटी मेरी परछाई | Beti Meri Parchai
    कविताएँ

    बेटी मेरी परछाई | Beti Meri Parchai

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    बेटी मेरी परछाई ( Beti Meri Parchai ) नन्ही बिटिया जब घर आई,खुशियों की गूंजी शहनाई,सब ने बोला देखो मुखड़ा,ये तो है माँ की परछाई, भोली सूरत, चंचल आँखें,जैसे बादल से चंदा झाँके,नीद मे उसने ली अँगड़ाई,सचमुच, बेटी मेरी परछाई, किलकारी जब वो लेती है,जैसे मुझसे वो कहती है,मै बस तेरे लिए ही आई,सचमुच, बेटी…

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  • Qayamat Kam Nahi Hoti
    ग़ज़ल

    क़यामत कम नहीं होती | Qayamat Kam Nahi Hoti

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    क़यामत कम नहीं होती ( Qayamat Kam Nahi Hoti ) निकलते जब वो सज-धज के तो आफ़त कम नहीं होतीजिगर पर तीर चलते हैं क़यामत कम नहीं होती मुहब्बत बाँटिए जग में ये बरकत कम नहीं होतीमिले ख़ुशियाँ ज़माने को मसर्रत कम नहीं होती कहाँ आता किसी को अब सलीक़े से यहाँ चलनाचले हम ग़र…

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  • He nath bacha lo
    कविताएँ

    आपसे सर्वस्व मेरा | Aapse Sarvasya Mera

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    आपसे सर्वस्व मेरा ( Aapse Sarvasya Mera ) आप सर्वस्व मेरे,आपके श्री चरणों में मेरा सर्वस्व अर्पण है।आप मेरे प्राण के प्राण,आप मेरे प्राण धन हैं।आपके श्री चरणों में मेरा सर्वस्व अर्पण है। हे प्राणनाथ, मेरे प्राणेश्वर!बलिहारी नित मैं आप पर।आपका श्री चरण मेरा घर।चरण कमल का भौंरा यह मन है।आप मेरे प्राण के प्राण,आप…

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  • बेटियां : हाइकु
    हाइकु

    बेटियां : हाइकु

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    बेटियां बेटी का धन,लक्ष्मी, विद्या, पार्वती,जैसा है मन।।१।। धान सी फलें,परिवार की जड़,फूल सी खिले ।।२।। बेटी चहके,घर आँगन ज्योंपुष्प महके ।।३।। ईश सजीव,बेटियां होती है,जग की नींव ।।४।। बिछा के मन,बेटियों बना देती,मकाँ को घर।।5।। बेटी की छाँव,जहां पड़ते पाँव,स्वर्ग सी ठाँव ।।6।। कैसा भी दौर,बिटियाँ के हाथों में,जग की डोर ।।7।। डी के…

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  • Jeevan ki Raftaar Hai Beti
    कविताएँ

    जीवन की रफ्तार है बेटी | Jeevan ki Raftaar Hai Beti

    ByAdmin September 23, 2024September 23, 2024

    जीवन की रफ्तार है बेटी ( Jeevan ki Raftaar Hai Beti ) बाबा के बीमार मन काउपचार ..माँ के दिल की धड़कनजीवन की रफ्तार है बेटीजीवन की रफ्तार है बेटीशांत समंदर हैसमय पड़ने परम्यान से निकलती हुई तलवार है बेटीरानी दुर्गावती ,पद्मावती , लक्ष्मीबाई का स्वप्न साकार हैं बेटी..कलम की आवाज हैसाहित्यकार, कलमकार, अभिनेता राजनेता…

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