• छलावा

    छलावा उस धरा सेइस धरा तकउस गगन सेइस गगन तकउस जहां सेइस जहां तकउस परिवेश सेइस परिवेश तकउस गांव सेइस शहर तकका सफर…रहा नहीं आसानजिसने बदल दिएसारे अरमान…अपनों के साथजीने का सपनाबन कर…रह जाएगा सपनाजो हो नहीं सकताअब कभी अपनाअब अपनों को…नहीं दे पाते वो सम्मानजो थे कभी जीवन की जान श्याम सुंदर यह भी…

  • “डॉक्टर का पर्चा”

    जब से राघव ने अपने बेटे का इलाज़… बच्चों के प्रसिद्ध डॉक्टर, डॉ० अग्रवाल से शुरू किया, तबसे राघव के बेटे की तबीयत में काफी सुधार हुआ। पिछले एक महीने से वे हर सप्ताह अपने बच्चे को डॉक्टर साहब को दिखाने आ रहे हैं। डॉक्टर साहब का पर्चा सिर्फ़ 5 दिनों के लिए ही वैलिड…

  • छेड़खानी

    एक दिन रमेश सर (कंप्यूटर शिक्षक) जैसे ही कंप्यूटर सेंटर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सेंटर प्रबंधक श्री शमीम अहमद जी व कुछ पुलिस वाले रमेश सर के इंतजार में ही बैठे हैं। रमेश सर को देखते ही प्रबंधक महोदय ने कहा,“यहीं है रमेश सर, जिनका आप इंतजार कर रहे थे।” रमेश सर के अंदर…

  • ये हम कहां जा रहे हैं?

    कहा जाता है कि भारतीयों की बुद्धि चूल्हे से शुरू होकर चूल्हे पर ही खत्म हो जाती है। इस चूल्हे के चक्कर में हम हजारों वर्षों तक गुलाम रहे। फिर भी चूल्हे का चक्कर है कि आज भी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। कहने का तात्पर्य यही है कि इस व्यक्ति के यहां…

  • हिंदी पत्रकारिता दिवस: एक ऐतिहासिक यात्रा और वर्तमान चुनौतियाँ

    आज 30 मई, हिंदी पत्रकारिता दिवस है। यह दिन उस ऐतिहासिक क्षण का स्मरण कराता है जब 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ नामक पहला हिंदी समाचार पत्र प्रकाशित किया था। यह मात्र एक समाचार पत्र का प्रकाशन नहीं था, बल्कि यह हिंदी भाषा के माध्यम से जन-जागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय चेतना के सूत्रपात का प्रतीक था। ‘उदन्त…

  • ढाट इतिहास

    ढाट इतिहास ढाट का ढंग निराला मन भावन पावन,ढाट का रंग निराला चित्त चित्र पावन। खावड़ में खोदते ख़ूब पार खेतों में ,मीठा मन भावन धोरा धरती रेतों में। झाड़ जंगल पहाड़ नहीं आकड़े उगते अपार,बूहड़ा फोग सिणिया खीप खड़े कर क़त़ार। मनख महमानों की करते मान मनोहार मोकली,जीमण को रोटी राबड़ी झण मखण ढोकली।…

  • कायर

    फोन की घंटी बजी। राजीव ने फोन उठाया। फोन पर अनुराग था। “भैया आप कहाँ है? क्या आपसे इस समय मुलाकात हो सकती है?” यह पूछते वक्त अनुराग की आवाज में वह बात नहीं थी जो अक्सर बात करते समय राजीव महसूस करता था। ऐसा लग रहा था जैसे कि वह किसी दिक्कत में है।…

  • प्यार की खातिर

    असलम की बेवफाई से निराश नुजहत का सारा समय अब मोबाइल पर यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम चलाने व नेट सर्फिंग में ही बीत रहा था। दिन तो किसी तरह कट जाता था, लेकिन रात काटनी उसे भारी गुजरती थी। फ़ेसबुक पर वीडियोज क्लिप्स देखते समय अचानक उसकी नज़र एक आकर्षक एडवर्टाइजमेंट पर पड़ी। जिसमें लिखा था:-…

  • नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर की कविताएं | Nandlal Mani Tripathi Poetry

    तिरंगे कि अभिलाषा आन मान सम्मानगर्व अभिमान भारतकि पहचान।। सीमाओं पर देश कि रक्षाकरते एक हाथ मुझे लिएदूजे में संगीन।। अभिमान से लहराता युगविश्व को बतलाता देखो मैंहूँ भारत का गौरव मान ।। भारत वासी शपथ हमारी लेतावंदे मातरम जन गण मन भारतमाता कि जय गाता ।। मेरी भी अभिलाषा हैभारतवासी से कुछ आशा हैसिर्फ…

  • न्याय के देवता शनिदेव की जयंती: कर्म, काल और कैवल्य का दार्शनिक दृष्टिकोण

    भारतीय मनीषियों ने शनिदेव को केवल एक खगोलीय ग्रह या पौराणिक देवता के रूप में नहीं, बल्कि एक विराट दार्शनिक अवधारणा के प्रतीक रूप में देखा है। ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाने वाली उनकी जयंती मात्र धार्मिक पूजन का अवसर नहीं, अपितु कर्म, काल और कैवल्य जैसे गहन तत्वों पर आत्ममंथन का पावन क्षण है।…