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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Deepika Rukmangad ke Dohe
    दोहे

    दीपिका रुखमांगद के दोहे | Deepika Rukmangad ke Dohe

    ByAdmin August 1, 2024

    दीपिका रुखमांगद के दोहे ( Deepika Rukmangad ke Dohe ) रटती शिव का नाम हैं,रसना दिन अरु रात। सावन में मन डूबता,डूब गई है गात।। रिमझिम बरसी है घटा, बुझती धरती प्यास। सावन झूला झूलते,गौरी शंकर पास।। प्यारा लगता मास है,शिव मिलने की आस। सावन का मेला लगा, सभी भक्तों को खास।। शिव की पूजा…

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  • बुलाया था उसने
    ग़ज़ल

    बुलाया था उसने | Ghazal Bulaya tha Usne

    ByAdmin August 1, 2024

    बुलाया था उसने ( Bulaya tha Usne ) इशारे से हमको बुलाया था उसने हमे दर्द अपना सुनाया था उसने ! झुकाकर निगाहें ज़रा सी शरम से, मुहब्बत को अपनी जताया था उसने ! गँवाया था दिल यह उसी वक्त हमने गिराकर जब पल्लू उठाया था उसने ! बगल से थे गुजरे मिरे, अज़नबी बन,…

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  • कोचिंग सेंटरों के कारनामों का काला चिट्ठा
    विवेचना

    कोचिंग सेंटरों के कारनामों का काला चिट्ठा

    ByAdmin July 31, 2024

    आखिर हत्यारी कोचिंग की जरूरत क्या है? कोचिंग तो किसी व्यक्ति का निजी होगा।यह गर्वनमेंट का तो लगता नहीं। तो इसके लिए कोई घटना इतने बड़े देश में कहीं किसी का भी लापरवाही से हो, सिस्टम कैसे दोषी हो गया? सिस्टम इस घटना का जांच करवायेगा। और जो भी दोषी होंगे उसके खिलाफ सख्त से…

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  • काश ऐसा कमाल हो जाए
    ग़ज़ल

    काश ऐसा कमाल हो जाए | Kaash Aisa Kamaal ho Jaye

    ByAdmin July 31, 2024

    काश ऐसा कमाल हो जाए ( Kaash Aisa Kamaal ho Jaye ) काश ऐसा कमाल हो जाए। उससे फिर बोलचाल हो जाए। वो अगर हम ख़याल हो जाए। ज़िंदगी बेमिसाल हो जाए। देखले गर उसे नज़र भर कर। पानी-पानी हिलाल हो जाए। उसके होंठों पे लफ़्ज़े हां हो तो। ह़ल मिरा हर सवाल हो जाए।…

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  • हाल-ए-मोहब्बत | Haal-e-Mohabbat
    ग़ज़ल

    हाल-ए-मोहब्बत | Haal-e-Mohabbat

    ByAdmin July 31, 2024August 22, 2024

    हाल-ए–मोहब्बत ( Haal-e-Mohabbat ) हाल-ए मोहब्बत का तुम्हें हम क्या बताये। दिलकी पीड़ा का हाल हम किसको सुनाए। जब दिल दे चुके है हम किसी को तो। ये पैगम उन तक हम कैसे पहुँचाएँ।। दिलकी बातें जुबान से हर पल निकलती है। कभी-कभी हमारी आँखे भी दिलकी बातों को कहती है। प्यार करने वाले तो…

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  • Udham Singh
    कविताएँ

    उधम सिंह सरदार | Kavita Udham Singh Sardar

    ByAdmin July 31, 2024

    उधम सिंह सरदार ( Udham Singh Sardar ) आन-बान थे देश की, उधम सिंह सरदार। सौरभ’ श्रद्धा सुमन रख, उन्हें नमन शत बार।। वैशाखी की क्रूरता, लिए रहे बेचैन। ओ डायर को मारकर, मिला हृदय को चैन।। बर्बरता को नोचकर, कर ओ डायर ढेर। लन्दन में दहाड़ उठा, भारत का ये शेर।। बच्चा-बच्चा अब बने,…

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  • रिमझिम बूंदों की बहार | Rimjhim Boondon ki Bahar
    कविताएँ

    रिमझिम बूंदों की बहार | Rimjhim Boondon ki Bahar

    ByAdmin July 31, 2024

    रिमझिम बूंदों की बहार ( Rimjhim boondon ki bahar ) रिमझिम बूँदों की बहार आई, हरियाली चहुॅओर देखो छाई। श्रृंगार करने को आतुर धरित्री, रीति नवल अभ्यास देखो लाई। मिट्टी से सोंधी महक उठ रही, मलय सौरभ से मस्त हो रही। न भास्कर न रजनी आते गगन में, बस सावन की रिमझिम बरस रही। तन…

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  • बुढ़ के फरियाद
    भोजपुरी कविता

    बुढ़ के फरियाद | Budh ke Fariyad

    ByAdmin July 31, 2024

    बुढ़ के फरियाद ( Budh ke Fariyad ) मंदिर गईनी , मसजिद गईनी , कईनि सगरो इयारी उहा केहू ना सुनलक त, अईनी रउआ दूआरी उम्र हमर ढल गइल बा, पाच गो भईली नारी बाकी एगो बच गईल बिया, बिया उ कुआरी बेटा हमर दुगो बा लोग, निकलल लोग फिरारी भइल बीयाह जब से तब…

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  • सूझबूझ
    कविताएँ

    सूझबूझ | Soojh – Boojh

    ByAdmin July 30, 2024

    “माँ, तुम मंदिर जाती हो न?” सुधीर ने अपनी मांँ से सवाल किया। ” हांँ, जाती तो हूँ।” मांँ ने अपने बेटे के पूछे सवाल का जबाब दिया। “तब, धर्म और अधर्म ये दोनों कौन हैं? जिनके नारे जय और नाश के लिए लगाए जाते हैं।” सुधीर की बातें मां को अच्छी नहीं लगी फिर…

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  • Show off for what
    विवेचना

    दिखावा किस के लिए ?

    ByAdmin July 30, 2024

    एक बार फिर में आपके सामने एक ऐसा विषय लेकर आया हूँ जिस पर आज की युवा पीड़ी बहुत ही तेजी से इस ज़माने में भाग रही है । क्या ये सब उनके लिए उचित है ? इस चमकती दमकती दुनिया को वो लोग भी उसी चश्मे से देख रहे है जिस हिसाब से उन्हें…

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