• कुंदन बना दिया | Kuundan Bana Diya

    कुंदन बना दिया ( Kuundan Bana Diya ) रक्तरंगी हादसों ने काम ये किया शारदा की साधना में रंग भर दिया आसमाँ की चाह थी ना आसमाँ मिला भूमि पर भी चैन मुझे लेने ना दिया सात फेरे भूख से है प्यास से लीव ईन वक्त ने दो पाट को बीवी बना दिया स्वप्नमाला से…

  • हालाते जिंदगी | Halat-E-Zindagi

    हालाते जिंदगी ( Halat-E-Zindagi ) अचानक एक ख़्याल ने, हमें अपने में बांध लिया। ताने-बाने बुनती जिजिविकाओं, ज़िंदगी के हालातो से रूबरू कराने के प्रयास ने हमें, उस मोड़ पर न जाने कितने बरसों पीछे ले जाकर छोड़ दिया। और फिर हां फिर एक-एक चेहरा शतरंज के मोहरे सा मानस पटल पर अपनी, मौजूदगी स्थापित…

  • बहुत बेचैन हूँ | Ghazal Bahut Bechain Hoon

    बहुत बेचैन हूँ ( Bahut Bechain Hoon ) सुकूँ दिल में यहाँ रहता नहीं है? ख़ुशी का जब यहाँ साया नहीं है बहुत बेचैन हूँ उसके लिये मैं अभी तक शहर से लौटा नहीं है उसे मैं कह सकूं कुछ बात दिल की मुझे वो राह में मिलता नहीं है उसे गुल देखकर पचता रहा…

  • शौक़ है | Ghazal Shauk Hai

    शौक़ है ( Shauk Hai ) बज़्म-ए-सुख़न की शान बढ़ाने का शौक़ है। हमको भी शेअ़र सुनने-सुनाने का शौक़ है। तूफ़ान के ह़दफ़ पे तो रहना ही है उन्हें। जिनको वफ़ा के दीप जलाने का शौक़ है। कांटे किसी की राह में वो क्या बिछाएंगे। पत्थर पे जिनको फूल चढ़ाने का शौक़ है। हरगिज़ किसी…

  • एकता का सूत्र | Kavita Ekta ka Sutra

    एकता का सूत्र ( Ekta ka Sutra ) समय की पुकार को समझो और अपने आप को बदलो। हम इंसान है और इंसानो की इंसानियत को भी समझो। अनेकता में एकता को देखों आबाम की बातों को सुनों। शांति की राह को चुनो और शांति स्थापित करो।। देश दुनिया की बातें करते है अपने आप…

  • मेरे साथ साथ | Mere Sath Sath

    मेरे साथ साथ ( Mere Sath Sath ) पहाड़ बन के मेरे साथ साथ चलता रहा वो एक टुकड़ा था बादल को जो बदलता रहा लिपट गई तो कलेजे को पड़ गई ठंडक और इतनी ठंड की फिर रोम रोम जलता रहा जो लोग पहले ग़लत कर चुके दुआ उनको उन्हीं को देख के हर…

  • जागरण करता रहा | Geet Jagran Karta Raha

    जागरण करता रहा ( Jagran Karta Raha ) तेरे मन को भाये जो , वह आचरण करता रहा। नींद के पंछी उड़ा कर , मैं जागरण करता रहा।। दीप स्नेहिल बार कर ही ,आयु भर कंटक सहेजे। द्वार पर तेरे हमेशा, अर्चना के फूल भेजे । मैं तो शंकर सा ही बस ,विष का वरण…

  • ज़िंदगी के वास्ते | Ghazal Zindagi ke Vaaste

    ज़िंदगी के वास्ते ( Zindagi ke Vaaste ) जब इजाज़त उसने मांगी रुख़सती के वास्ते। कह दिया हमने भी जा,उसकी ख़ुशी के वास्ते। तीरगी फिर भी न मिट पाई हमारे क़ल्ब की। फूंक डाला घर भी हमने रोशनी के वास्ते। आग को पानी करे है और पानी को धुआं। आदमी क्या-क्या करे है ज़िंदगी के…

  • डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम | Kavita Dr. A.P.J. Abdul Kalam

    डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ( Dr. A.P.J. Abdul Kalam ) तुझे महकता फूल कहूँ या, तुझे  अनंत  आकाश कहूँ। पूर्व राष्ट्रपति  मिसाइल मैन, या तुझे मैं  हिंदुस्तान  कहूँ। कलम में इतनी  शक्ति नहीं, मैं कैसे तेरा गुणगान करूँ? हे!   कर्मयोगी,   शिक्षाविद, किन शब्दों में  बयान करूँ। युवा पीढ़ी की शक्ति थे तुम, जाति – पाँत से  परे थे तुम।…

  • कोई प्रहरी | Geet Koi Prahari

    कोई प्रहरी ( Koi Prahari ) कोई प्रहरी काश लगा दे,ऐसा भी प्रतिबंध । किसी ओर से बिखर न पाये,धरती पर दुर्गंध ।। दिया हमीं ने नागफनी अरु,बबूल को अवसर क्यों बैठे हम शाँत रहे, सोचा कभी न इस पर कभी तो कारण खोजो आये,कैसे यहाँ सुगंध ।। गुलमोहर -कचनार-पकड़िया , आम -नीम-पीपल आज चलो…