• रोशनी के दिये | Kavita Roshni ke Diye

    रोशनी के दिये ( Roshni ke Diye ) देखा है मैंने ऐसे गुरुओं को भी जो अपने घरों में अंधेरा करके दूसरे घरों में रोशनी फैला देते है और बदले में उन्हें मिलता है – तिरस्कार। सिर्फ साल के एक दिन उन्हें सम्मान में शाल श्रीफल से नवाज दिया जाता है बाकी के तीन सौ…

  • बेशर्मी का रोग | Besharmi ka Rog

    बेशर्मी का रोग ( Besharmi ka rog ) कैकयी संग भरत के, बदल गए अहसास। भाई ही अब चाहता, भाई का वनवास।। सदा समय है खेलता, स्वयं समय का खेल। सौरभ सब बेकार हैं, कोशिशें और मेल।। फोन करें बस काम से, यूं ना पूछे हाल। बोलो कब तक हम रखें, सौरभ उनका ख्याल।। जिन…

  • सावन | Sawan

    सावन ( Sawan ) सावन आया सावन आया साजन मेरे सावन आया सावन आया साजन मेरे पर क्यूँ तू ना अब तक आया.. .सावन आया . झरमर झरमर बरस रहे हैं चढ़ी है मस्ती बादलों को कली कली का रूप का है निखरा झूम रहा है देखो भंवरा फूल बाग़ में मचल रहे है रंग…

  • मायके में | Kavita Mayke Mein

    मायके में ( Mayke Mein ) मौसमों का आना जाना है मायके में सावन से रिश्ता पुराना है मायके से हरियाली तीज पर मायके आती हैं बेटियां सावन के झूलों में झुलाई जाती हैं बेटियां लाड़ जो पीछे छोड़ गई थी आती है वापिस पाने को मां पापा भी जतन करते, बेटी के नाज़ उठाने…

  • सावन में | Geet Sawan Mein

    सावन में ( Sawan Mein ) मधुर मिलन का ये महीना। कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का ये महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई नबेली दुल्हन को भी, प्रीत बढ़ाता ये महीना।। ख्वाबों में डूबी रहती है, दिन-रात सताती याद उन्हें। रिमझिम वारिश जब भी होती, दिलमें उठती अनेक तरंगे। पिया मिलन…

  • संभालते क्यों हो | Ghazal Sambhalte Kyon Ho

    संभालते क्यों हो ( Sambhalte Kyon Ho ) हजारों ऐब वो मुझ में निकालते क्यों हैं मैं गिर रहा हूँ तो मुझको संभालते क्यों हैं दिखा है जब भी अंधेरा उन्हें मेरे घर में चिराग़ आके हमेशा वो बालते क्यों हैं किसी की बात चले या किसी से हो शिकवा हरेक तंज़ वो मुझ पर…

  • लोग क्या कहेंगे | Kavita Log Kya Kahenge

    लोग क्या कहेंगे ( Log Kya Kahenge ) हमें लोग क्या कहेंगे, अब लोगों को भी कहने दो। मतलब की है सारी दुनिया, स्वार्थ में ही रहने दो। तुमको अब बढ़ते जाना, कुछ काम ऐसा कर लो। जीवन में कुछ है पाना, खुशियों से झोली भर लो। साध लो अब निशाना, मंजिल पर तुमको जाना।…

  • सूरज निकाल देता है | Ghazal Suraj Nikal Deta Hai

    सूरज निकाल देता है ( Suraj Nikal Deta Hai )   बड़ी अजीब सी उलझन में डाल देता है मेरे सवाल को हँस हँस के टाल देता है हुनर को अपने वो ऐसा कमाल देता है नदी का दर्द समुंदर में डाल देता है करो न फ़िक्र कि हम भी उसी के बंदे हैं बड़ा…

  • परिवर्तन | Laghu Katha Parivartan

    “हँस हरिया हंँस कि तेरे घर में तेरी बहू आई है, अब तेरा भाग्य बदल जाएगा। जितना दुख झेला है, दुबारा नहीं झेलेगा।” गांँव के ठाकुर ने हरिया को सांत्वना देते हुए कहा और उन्हें तो अंतस् में इस बात की खुशी थी कि गाँव में एक कामगारिन तो बढ़ी। “तो आपको खुशी किस बात…

  • रोटी कपड़ा और मकान | Roti Kapada Aur Makaan

    रोटी कपड़ा और मकान ( Roti Kapada Aur Makaan ) उस अमीर आदमी की अकूत दौलत का पहाड़ दो कौड़ी है उस भूख से बिलखते अधनंगे बच्चे की नजर में जिसकी मां ने उससे पहले दम तोड़ दिया उसको जिंदा रखने की चाह में अपना खून चुसवाते चुसवाते अपने भूखे बदन और सूखे स्तन से…