• मातृभूमि भ्रमण 2024 | Matrubhoomi Bhraman 2024

    भाग 1 दिनांक 4 जून को कालका एक्सप्रेस से बाड़मेर से रवाना होकर रात बटिंडा रात 12 ,30 पर पहुंचे वहां एक एक शानदार होटल में विश्राम किया तथा दूसरे दिन प्रात:टेक्सी से सीधा अटारी भारत सीमा पर पहुंचे । वहां पोलिस एमिग्रेशन एंव कस्टम के बाद पाक सीमा में बागा चौकी पहुंचे वहां सारी…

  • बरखा रानी बरखा रानी | Barkha Rani Barkha Rani

    बरखा रानी बरखा रानी ( Barkha Rani Barkha Rani ) बरखा रानी बरखा रानी, जमके बरसो बरखा रानी। रिमझिम रिमझिम छड़ी लगा, खूब बरसाओं पानी। बरखा रानी बरखा रानी घुमड़ घुमड़ नभ में छा जाओ, काली घटाएं लहराओ। मोर पपीहे मधुबन झूमें, आसमान में तुम घिर आओ। खेतों खलिहानों में बरसो, कूप तालाब भर जाए…

  • हादसे | Kavita Hadse

    हादसे ( Hadse ) आस्था या अंधविश्वास भक्ति या भीड़ बदहवास भगदड़ में छूटते अपनों के हाथ कदमों से कुचलता हर सांस माथा टेकने का तृष्ण कौन भगवान कौन भक्त मेहरानगढ़ यां हाथरस भयभीत बच्चों के शव असीमित चीखें अस्त व्यस्त ह्रदय विदारक दृश्य अनेकों दीपक हुए अस्त कैसी विडम्बना है ये वत्स रुकता नहीं…

  • मैं हिन्दी भाषा हूं | Main Hindi Bhasha Hoon

    मैं हिन्दी भाषा हूं ( Main Hindi Bhasha Hoon ) मैं हिन्दी भाषा हूं,राष्ट्र कीआशा हूं। मैं हिन्दुस्तान की पिपासा हूं। मुझसे ही है हिन्दुस्तान की आन-बान -शान । मुझसे ही है किताबों की जान में जान। मैं कवियों की कविता का श्रृंगार हूं। मैं लेखकों की लेख की नैया पार हूं। मैं गायकों के…

  • आचरण | Acharan

    आचरण ( Acharan ) राम कृष्ण हनुमान की करते सब बातें। करे नहीं अमल पर उनके आचरणों को।। आये जब संकट तो याद आये हनुमान। हे संकट मोरचन तुम हरो हमारे कष्ट। मैं अर्पित करूँगा तुम्हें घी और सिंदूर। सुख शांति मुझे दो मेरे पालन हार।। बात करें जब भी हम मर्यादाओं की। याद आ…

  • जुदाई के ज़ख्म | Judai ke Zakhm

    सन् 1971 की हिंद पाक लड़ाई के दौरान बेघर होकर आये पाक विस्थापित लोगों में एक मात्र मैं एक शख़्स़ हूं जो छठ्ठी बार परिवार के लोग सातवीं बार जन्म भूमि की यात्रा कर चुके है प्रथम बार क्रमश: 1980 1999 2ं005 2006 2015 2018 एंव 2024 में वैधानिक रुप से पासपोर्ट वीज़ा से होकर…

  • मानव तन पाकर भजा न प्रभु को

    मानव तन पाकर भजा न प्रभु को मानव तन पा करके, भजा न प्रभु को जो। यह अनमोल जीवन अपना, वृथा ही दिया उसने खो। मानव तन पा करके, भजा न प्रभु को जो। गया ठगा द्वारा ठगिनी माया के। झूठा रंग चढ़ाया अपनी काया पे। छोड़ फूल बीज कांटे का, लिया बो जो। यह…

  • हबीब | Nazm Habib

    हबीब ( Habib ) मुझे लगा था मेरे लिए तुम तो कुछ कहोगे मुझे लगा था तुम तो मुझे जानते ही होगे मुझे लगा था तुम तो समझ पाओगे मेरी व्यथा मुझे लगा था मेरा अस्तित्व तुम्हें तो होगा पता मुझे लगा था मुझे नहीं मिली कभी जो मुझे लगा था कि तुम तो दोगे…

  • ज़माने की हुक्मरानी | Ghazal Zamane ki Hukmarani

    ज़माने की हुक्मरानी ( Zamane ki Hukmarani ) भरी दिमागों में जिन जिन के बेइमानी है उन्हीं के बस में ज़माने की हुक्मरानी है बना रहे हैं ये नेता सियासी मोहरा हमें नशे में मस्त मगर अपनी नौजवानी है सितम शिआर मेरा हौसला तो देख ज़रा कटी ज़बान है छोड़ी न हक़ बयानी है खड़े…

  • जुदाई एक नासूर | Judai ek Nasoor

    बर स़ग़ीर मुल्क भारत के लिये सन् 1946 का विभाजन भारत पाकिस्तान एक अभिशाप के रूप में स़ाबित हुआ भारत से मुस्लिम समुदाय ओर पाकिस्तान से हींदू वर्ग परस्पर पलायन किया जिसका भेंयकर आज तक कोढ़ में खाज बना हुआ है । उसके बाद सनऋ 1965 1971 की भारत पाक की जंग सीमिवर्ती क्षेत्रों में…