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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • sahitya akademi
    विवेचना

    जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा पा रही साहित्य अकादमियां?

    ByAdmin June 10, 2024June 10, 2024

    पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों को भी सम्मान दिलवा रही है। इन पुरस्कारों में पारदर्शिता का…

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  • एक लड़की, रजनीगंधा सी
    कविताएँ

    एक लड़की, रजनीगंधा सी

    ByAdmin June 10, 2024

    एक लड़की,रजनीगंधा सी मस्त मलंग हाव भाव, तन मन अति सुडौल । अल्हड़ता व्यवहार अंतर, मधुर मृदुल प्रियल बोल। अधुना शैली परिधान संग, चारुता चंचल चंदा सी । एक लड़की, रजनीगंधा सी ।। अंग प्रत्यंग चहक महक , नव यौवन उत्तम उभार । आचार विचार मर्यादामय , अंतःकरण शोभित संस्कार । ज्ञान ध्यान निज सामर्थ्य…

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  • Kavita Aao Shikhe
    कविताएँ

    आओ सीखें | Kavita Aao Shikhe

    ByAdmin June 10, 2024

    आओ सीखें ( Aao Shikhe ) आओ सीखे फूलो से काटों के संग भी रहना तोड़ अगर उसको ले कोई तो उसे कुछ न कहना आओ सीखे पेड़ो से दूसरो के लिए जीना दूसरों को जीवन दे कर के खुद जहर हवा का पीना आओ सीखे सूरज से सदा चमकते रहना चाहे जो हो परिस्थित…

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  • सियासत में आ गये
    ग़ज़ल

    सियासत में आ गये | Ghazal Siyasat Mein Aa Gaye

    ByAdmin June 10, 2024

    सियासत में आ गये ( Siyasat Mein Aa Gaye )   सारे अज़ीज़ उनकी हिमायत में आ गये मजबूर होके हम भी सियासत में आ गये हाँलाकि ख़ौफ़ सबको सितमगर का था बहुत कुछ लोग फिर भी मेरी वकालत में आ गये इतने हसीन जाल बिछाये थे आपने हम ख़ुद शिकार होके हिरासत में आ…

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  • कभी सोचता हूँ मैं | Kabhi Sochta Hoon Main
    कविताएँ

    कभी सोचता हूँ मैं | Kabhi Sochta Hoon Main

    ByAdmin June 10, 2024

    कभी सोचता हूँ मैं ( Kabhi sochta hoon main )   कभी सोचता हूँ मैं, नहीं है जरूरत तेरी। मगर क्यों मुझे फिर भी, आती है याद तेरी।। कभी सोचता हूँ मैं———————।। मुझको मिलते हैं हर दिन, यहाँ चेहरें हसीन। जो नहीं तुमसे कम, लगते हैं मेहजबीन।। मगर इन आँखों में तो, बसी है तस्वीर…

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  • Kavita Saal ke Barah Maah
    कविताएँ

    साल के बारह माह | Kavita Saal ke Barah Maah

    ByAdmin June 9, 2024

    साल के बारह माह ( Saal ke Barah Maah ) चमके सूरज चैत मे, ताप बढ़े वैशाख जेठ तपन धरती जरे, बरे पेड़ सब राख। गरमी से राहत मिले, बरसे जब आषाढ़ सावन रिमझिम मेघ से,भादो लागे बाढ़ । क्वार द्वार सूखन लगे,मौसम की नव आस गर्मी में नरमी आए, शीतल कार्तिक मास । अगहन…

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  • शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था ने दी पूर्व विधायक सांवरमल बासोतिया को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
    साहित्यिक गतिविधि

    शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था ने दी पूर्व विधायक सांवरमल बासोतिया को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

    ByAdmin June 9, 2024

    गत सायं जांगिड अस्पताल परिसर में शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था व अलायंस क्लब लार्ड कृष्णा के तत्वावधान मे नवलगढ के पूर्व विधायक पूर्व चेयरमेन पत्रकार व एडवोकेट सांवरमल बासोतिया की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष व शब्दाक्षर के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष डाॅ दयाषंकर जांगिड ने की। मुख्य…

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  • उस दर पे कदम मत रखना
    कविताएँ

    उस दर पे कदम मत रखना

    ByAdmin June 9, 2024

    उस दर पे कदम मत रखना जहाँ नहीं मिलता है प्यार तुम्हें। जहाँ नहीं मिलता सम्मान तुम्हें।। उस दर पे कदम मत रखना। उस घर में कदम मत रखना।। जो नहीं दे सकते तुमको खुशी। जज्बात तेरे जो समझे नहीं।। उस दर पे कदम———————।। तुझमें नहीं है कुछ भी कमी। क्यों उनकी गुलामी करता है।।…

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  • पुरस्कारों की बंदर बांट | Puraskaron ka Bandar Baant
    विवेचना

    पुरस्कारों की बंदर बांट | Puraskaron ka Bandar Baant

    ByAdmin June 9, 2024

    आखिर क्यों सही से काम नहीं कर पा रही साहित्य अकादमियां? पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों…

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  • Laghu Katha Pramanikta
    कहानियां

    प्रामाणिकता | Laghu Katha Pramanikta

    ByAdmin June 9, 2024

    रेल छोटे से रेलवे स्टेशन पर ठहरी. रामू ने चायवाले से चाय ली. चायवाले को २०० ₹ की नोट दी। चायवाला बाकी रकम गिनकर वापस करे। उस से पहले ट्रेन रवाना हो गयी। ट्रेन के रवाना होते ही पास बैठी मेरी पत्नी मेरे पर झल्लाने लगी की आप से एक काम ढंग से नहीं होता।…

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