• दलबदल | व्यंग्य रचना

    दलबदल ( Dalbadal ) शर्म कहां की, कैसी शराफत, सिध्दांत सभी, अपने बदल ! मिलेगी सत्ता, समय के साथ चल! दे तलाक़, इस पक्ष को, उसमें चल ! हो रही है, सत्ता के गलियारे, उथल-पुथल! तू भी अपना, मन बना, वर्ना पछताएगा कल! सब करते हैं, तू भी कर! चिंता कैसी, किसका डर? पंजा नहीं,ना…

  • कंचन काया | Geet Kanchan Kaya

    कंचन काया ( Kanchan Kaya ) संयम के आधारों से अब ,फूटे मदरिम फव्वारे हैं कंचन काया पर राम क़सम, यह नैना भी कजरारे हैं तेरे नयनों में मचल रही, मेरे जीवन की अभिलाषा कुछ और निकट आ जाओ तो,बदले सपनों की परिभाषा है तप्त बदन हैं तृषित अधर,कबसे है यह तन मन प्यासा ।।…

  • भारतीय संस्कृति और सभ्यता

    भारतीय संस्कृति और सभ्यता   हमारी संस्कृति है महान देवताओं का वरदान l सरलता सादगी में आता है जीना l छोटी-छोटी बातों छोटी-छोटी खुशियों की हमें कोई कमी ना। वृक्ष ,पर्वत, नदियों से है गहरा नाता l कण-कण में हमें ईश्वर है नजर आता l जहां पराया दुख अपना लगता हैl भाईचारे का रखे सबसे…

  • धीरे-धीरे | Poem Dhire Dhire

    धीरे-धीरे ( Dhire Dhire ) धीरे-धीरे शम्मा जलती रही, रफ्ता-रफ्ता पिंघलती रही ! दिल तड़पता रहा पल पल, रूह रह-रह मचलती रही ! शोला-जिस्म सुलगता रहा, शैनेः शैनेः रात ढलती रही ! ख़्वाब परवान चढ़ते रहे, ख़्यालो में उम्र टलती रही ! धड़कने रफ्तार में थी ‘धर्म’ सांसे रुक-रुक चलती रही !! डी के निवातिया…

  • औरों से कैसी बातें…?

    औरों से कैसी बातें…? अब आकर तुम्हीं बतादो, हम गीत कहां तक गायें। पाकर एकान्त बहे जो, वे आंसू व्यर्थ न जायें। इस भांति प्रतीक्षा में ही, बीतेगीं कब तक घड़ियां। बिखरेंगी बुझ जायेंगी, आशाओं की फुलझड़ियां। मरुथल में आ पहुंची है, बहती जीवन की धारा। तुम दयासिंधु हो स्वामी, किसका है अन्य सहारा। भौतिक…

  • जय मां शारदे | Kavita Jai Maa Sharda

    जय मां शारदे ( Jai Maa Sharda ) हाथ जोड़ विनती करूं सुनिए चित लगाय l सर्वप्रथम पूजन करूं माँ आप होएं सहाय l सुनिए माँ विनती मेरी करो मन में प्रकाश l आन विराजो जिव्हा में मीठी बोली हो ख़ास ह्रदय में ज्ञान की ज्योति जला दो l नित गढ़ूं में नये आयाम l…

  • कुंअरा बाप | Laghu Katha Kunwara Baap

    बैड पर पड़ा लगभग दो महीना का बच्चा लेटा जोर जोर से रो रहा था और रसोई में विपुल उसके लिए दूध की बोतल तैयार कर रहा था साथ ही अपनी कमीज की बाह से बींच बीच में आँखे पौछ रहा था। बोतल तैयार करके वह बैड पर आया और गोद में उठा उसके मुँह…

  • खाद्य सुरक्षा जागरुकता

    खाद्य सुरक्षा जागरुकता सुरक्षित भोजन बेहतर स्वास्थ्य के लिए, लिया गया है ये संज्ञान, ना हो दूषित खान पान, खाद्य सुरक्षा का रखे ध्यान, खाद्य का हो ऐसा भंडारन, जहाॅ पोषकता मे कमी न आए, पौष्टिकता और संतुलित आहार का, जहाॅ से जन जन लाभ उठाए, जागरुकता है बहुत जरूरी, मिलावटखोरों पर नजर हो पूरी,…

  • निवातिया के दोहे | Nivatiya ke Dohe

    राखी का त्यौहार चरणों अपने राखिये, मूरख हमको जान । प्रथम राखी आपको, परम पिता भगवान ।। रेशम की डोरी लिए, कुमकुम रोली साथ । रक्षा वचन में बांधती, बहना राखी हाथ ।। राखी सबको बांधिये, गैर सखा हो कोय । जनक, तनय या तात सम, रिश्ता जोई होय ।। राखी के त्यौहार में, रखना…

  • कितनी दूर तक जाना होगा

    कितनी दूर तक जाना होगा   कितनी दूर तक जाना होगा फासला आज मिटाना होगा। झूठ से बुनियाद हिल जाएगी अपना सच सबसे बताना होगा। काम आए वही है अपना दामन गैरों से बचाना होगा। हम तो चाहत के तलबगार रहें हैं फिर वही धुन बजाना होगा। कुछ भी आसान नहीं है इसमें आग सीने…