• ऐ मेरे गाँव | Aye Mere Gaon

    ऐ मेरे गाँव ( Aye Mere Gaon )   ऐ मेरे गाँव की रौशन गलियाँ तुम यूँही मेरी राहें तकना, हाँ हम लौटके आएंगे ज़रूर, तुम आँखें बिछाए रहना, चाहे किसी भी जहान चले जाएं तुमको भूल न पाएंगे, तेरा इंतज़ार भी ख़त्म होगा, यह उम्मीद लगाए रहना, सुबह तुझे अलविदा कह निकलें, शामें तेरे…

  • गर्म हवाएं | Kavita Garm Hawayen

    गर्म हवाएं ( Garm Hawayen )   बह रही हवाएं गर्म हैं मुश्किल है लू से बचकर रहना एक छत हि काफी नहीं तुम भी जरा संभलकर चलना उमस भरा माहौल है हो गई है खत्म सोच की शीतलता उठ सी गई है स्वाभिमान की आंधी यद्दयपि कुछ नहीं है कुशलता खो गई है पहचान…

  • नया दौर | Kavita Naya Daur

    नया दौर ( Naya Daur )   इतना बेरुख जमाना हो गया मुसकुराना तक गुनाह हो गया जजबातों का जमाना अब कहां हर इक शय अंजाना हो गया खून की नदियां कहा करती है दुश्मन अपना जमाना हो गया आखों में किसी के खुशियां कहा दर्द का ये पैमाना फसाना हो गया मिटा मजहब की…

  • नव-सभ्यता | Kavita Nav Sabhyata

    नव-सभ्यता ( Nav Sabhyata ) नव सभ्यता की मजार में फटी चादर का रिवाज है आदिम जीवन की आवृत्ति में शरमों -हया की हत्या है प्रेम-भाव के विलोपन में तांडव का नर्तन है मशीनी मानव की खोज में मां-बेटियां नीलाम है हाय-हेलो की संस्कृति में सनातन हमारी श्मशान है पछुयायी की नशे में मिजाज हमारा…

  • नारी मन | Kavita Nari Man

    नारी मन ( Nari Man )   नारी मन, प्रेम का दिव्य दर्पण परम माध्य सृष्टि सृजन, परिवार समाज अनूप कड़ी । सदा उत्सर्गी सोच व्यंजना, पर आनंद हित सावन झड़ी । संवाहिका संस्कृति परंपरा, अग्र पाद धर्म आस्था तर्पण । नारी मन, प्रेम का दिव्य दर्पण ।। मृदुल मधुर अंतर भाव, नैसर्गिकता अंग प्रत्यंग…

  • बहुतई कड़ाई बा | Kahani Bahut Kadai ba

    “आपको पता है योगी जी के राज चल रहा है। योगी जी के राज में बहुतई कड़ाई है। हमही अकेले नहीं खाइत है। बाबू लोगन के बिना खिलाएं काम नहीं करते। इसलिए बिटिया के जो पैसा मिली उसमें से आधा देना होगा।”- यह बात रमेश को एक बिचौलिया समझा रहा था। बात दरअसल यह है…

  • स्मृति शेष | Kavita Smriti Shesh

    स्मृति शेष ( Smriti Shesh ) हे धरा के पंथी नमन तुम्हें हे धरा के पंथी नमन तुम्हें घर छूटा मिला गगन तुम्हें। तुम चले गए हमें छोड़कर कहे थे रहेंगे रिश्ते जोड़कर। तय था जो होना हो गया हे पंथी तुम नींद में सो गया। चिर शांति मिले अमन तुम्हें हे धरा के पंथी…

  • आँखों की शरारत | Nazm Aankhon ki Shararat

    आँखों की शरारत ( Aankhon ki Shararat )   तूने अभी तक मेरी मोहब्बत नहीं देखी, मेरे इन आँखों की शरारत नहीं देखी। नित्य आती हो ख्वाबों में तू देर रात मेरे, मेरी इन आँखों की तूने रंगत नहीं देखी। मैंने कितनी रातें गुजारी तेरी तन्हाई में, मगर तूने मेरी वो मुसीबत नहीं देखी। पहले…

  • मधुमय रस लहरा दे | Madhumay Ras Lahra de

    मधुमय रस लहरा दे ( Madhumay Ras Lahra de )   नव-लय-छंद अलंकृत जननी मधुमय रस लहरा दे। वेद रिचाओं के आखर से रचना कर्म करा दे।। शब्द अर्थ का बोध नहीं है ना भावों की गहराई। बुद्धि विवेक जगाकर उरमें ललित कला लहराई।। दूर क्षितिज के रम्यछटा से अंधकार बिलगानी । कलम पकड़ कर…

  • अगर तू जो एक किताब है

    अगर तू जो एक किताब है तुम्हें पढ़ना चाहता हूं तेरे हर एक पन्ने को अगर तू जिंदगी है जीना चाहता हूं आहिस्ता-आहिस्ता पूरी उम्र अगर तू फूल है तो मैं तेरा रंग बनना चाहता हूं अगर तू जो एक किताब है तुम्हें पढ़ना चाहता हूं तेरी तस्वीर में बिखरे रंगों का एक एहसास बनना…