• अद्वितीय

    अद्वितीय दर्शन की भाषा मेंकहा जा सकता हैदूसरा कोई नहींव्यवहार की भाषामें कहा जा सकता हैअकेला कोई नहींअपेक्षित सुधार व परिस्कार हो,और उसके हर कदम के साथसंतुलन का अनोखा उपहार होबाहरी दुनियां का भ्रमणतो केवल संसार समुद्र मेंआत्मा का भटकन है वहइसी में क्यों पागल बनाहमारा यह मन और जीवन हैजिस दिन हमें अन्तर केआनन्द…

  • ज़िंदगी

    ज़िंदगी तेरे बिना ये साँझ भी वीरान लगी,हर सुबह भी अब तो अनजान लगी,मैं मुस्कराया पर दिल रो दिया,दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया? तन्हा हुआ तो वक़्त भी थम गया,हर रास्ता जैसे मुझसे छिन गया,जब तू थी, हर मोड़ पे तूने हौंसला दिया,दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया? बातें अधूरी,…

  • वाणी और पानी -ध्रुव-2

    वाणी और पानी – ध्रुव-2 वह ठीक उसी तरहअसंयमित बहते हुएपानी से बाढ़ कीत्रासदी, भूस्खलनआदि जैसे प्राकृतिकआपदाएं आ जाती हैवह गांव कस्बे सब जलसमाधि में विलीन हो जाते हैंऔर साथ में धन–जन आदिकी भी भारी क्षति होती हैइसलिए यह जरूरी हैकि पर्यावरण का संतुलनसही से बनाए रखें औरअसंयमित बहते हुएपानी और बिनाविचारे बोली वाणीदोनों पर…

  • वाणी और पानी -ध्रुव-1

    वाणी और पानी – ध्रुव-1 वाणी की मधुरताहमारे ह्रदय द्वारको सही सेखोलने की कुंजी हैपानी जीवन पर्यन्तहमारे साथ सदैवरहने वाला होता हैवह हमारे जीवन मेंरिश्ते भी काफीमहत्वपूर्ण होते हैंपहन ले हम चाहेकितने भी क़ीमतीवस्त्र या आभूषणपर वाणी बता देती हैकि व्यक्ति कितने पानी मेंजैसे कोयल और कागदिखते एक जैसेबोल मीठे सुनकोयल के दिल जीत लेतेपर…

  • आख़िर क्यों?

    आख़िर क्यों? क्यों हर राह तुझ तक जाती नहीं,क्यों तेरी झलक नज़र आती नहीं?हर रोज़ तुझे देखने की कोशिश की,फिर भी क्यों मेरी दुआ असर लाती नहीं? ना कोई शिकवा, ना कोई गिला है,तेरे बिना हर लम्हा मुझे अधूरा मिला है।मैंने तो बस तुझसे प्यार किया,फिर क्यों मुझे ये फ़ासला मिला? कभी ख्वाबों में, तो…

  • अमर

    अमर दुनिया की हरवस्तु जन्म लेती हैऔर मरती हैइस मरणधर्माजगत में अमर कीकल्पना करने वालाकोई महान हीकल्पनाकार होगाकर्मों के सही सेक्षयोपशम होने परमनुष्य भव मेंसही से कर्मों काक्षयकर संपूर्णज्ञान प्राप्त होनेपर मिलन जबआत्मा से स्वयं काहोता तो आत्माके शुद्ध रूप सेफिर कोई भेदभेद न रहताज़िंदगी का सफ़रआयुष्य जितनाकेवली का होताधर्म का हीउस अवस्था मेंपहुँचने का…

  • “गाँव से ग्लोबल तक: डॉ. सत्यवान सौरभ की कलम की उड़ान”

    (संघर्ष, साहित्य और संवेदना, हरियाणा की माटी से निकला साहित्य का सितारा, शब्दों से समाज तक,युवा साहित्य का उगता सूरज) भारत की मिट्टी ने सदैव ऐसे रचनाकारों को जन्म दिया है जिन्होंने समाज, संस्कृति और विचारों को नई दिशा दी है। इन्हीं में एक विशिष्ट नाम है डॉ. सत्यवान सौरभ, जो अपनी लेखनी के माध्यम…

  • आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता

    एक नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की पुकार आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांतों के माध्यम से आत्म-शुद्धि और सामाजिक सद्भाव का मार्ग दिखाया। उनके विचार उपभोक्तावाद, हिंसा, पर्यावरण विनाश और नैतिक पतन जैसी समकालीन समस्याओं…

  • 2624 वां महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

    2624 वां महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव निरख निरख के रूप तुम्हारा “महावीर “दिल भरता ही नहीं,तेरे चरणों से उठकर जाने को मन करता ही नहीं !!सफल हो गए नरभव सबके जो भी दर्शन को पाए,बुला रहा सौभाग्य सभी को विघ्न कोई पड़ता ही नहीं || रवि सम आभा मुखमण्डल पर कामदेव सी काया है,रूप अनंग…

  • डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार की कविताएं | Dr. Preeti Singh Parmar Poetry

    “कुंभलगढ़ के शेर” (महाराणा प्रताप पर समर्पित एक भावनात्मक, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण कविता) कुंभलगढ़ की गोद में जन्मा, मेवाड़ का लाल, वीर प्रताप, सिंह सा गर्जे,  जिसने रण में ढाया काल। धूप-छाँव में पला बढ़ा वो स्वाभिमानी माटी का गौरव राजपूताना की शान बना, जो झुका नहीं, बना प्रमाण। पिता उदयसिंह के आँगन में, जयवंता…