• सच बोलने की सजा

    तो संतश्री कुछ नाखुश से थे.. शायद कुछ खफा खफा से भी.. दूध के लिए पशुओ पर होने वाले अत्यचार को ले कर मुझे उन से कुछ मार्गदर्शन लेना था.. हिंसा अहिंसा को ले कर कुछ धार्मिक चर्चाएं करनी थी.. कुछ शास्त्रों के संदर्भ होने थे जो कि मानव की अनजाने में होने वाली अनैतिकता…

  • भगवान जय श्री परशुराम जी

    भगवान जय श्री परशुराम जी ( छंद-मनहरण घनाक्षरी ) जमदग्नि रेणु सूत ,अति बलशाली पूत,छठे अवतार विष्णु ,राम  कहलाए है! अक्षय तृतीया आई,अटल मुहुर्त लाई,रामभद्र जन्मोत्सव ,जगत मनाए है। राम  बसे श्वास श्वास, करने अधर्मी नाश,हाथ में सदैव अस्त्र,परशु उठाए है । शिव धनु तोड़े राम , हर्ष हुआ चारों धाम,विलोकित राम-राम ,दोनों मुस्कुराए है। डॉ कामिनी व्यास…

  • हिंदी शिक्षण की चुनौतियाँ एवं राम कथा

    भाषा क्या है? भाषा का मानव जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। भाषा के विकास ने ही मनुष्य को अन्य जीव-जंतुओं पर वरीयता पाने में मदद की है। भाषा ज्ञान का भंडार है। ‘भाषा’ शब्द संस्कृत की भाष् धातु से निष्पन्न हुआ है, जिसका कोशीय अर्थ है ‘कहना’ या ‘प्रकट करना’। भाषा को मनुष्य के…

  • खूब हुई नंबरों की बरसात

    इस बार खूब हुई नंबरों की बरसात। बरसात ऐसी हुई कि सैकड़ो वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया। जिनको बुद्धू समझा जाता था वह भी सीना तान टापरो की लिस्ट में शामिल हो गया है। उसे खुद भी विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा अचम्भा कैसे हो गया? उसके मां-बाप भी भूल कर कुप्पा हो…

  • सिंधु नदी जल और सियासत

    सिंधु नदी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत भारत ने तीन पूर्वी नदियों — रावी, व्यास और सतलज — का अधिकतर जल उपयोग करने का अधिकार प्राप्त किया, जबकि तीन पश्चिमी नदियों — सिंधु, झेलम…

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल: हिंदी आलोचना के शिल्पकार और विचारक

    अनुसंधानकर्ता नाम: अमरेश सिंह भदौरियापद: हिंदी प्रवक्तासंस्थान: त्रिवेणी काशी इंटर कॉलेज, बिहार, उन्नाव (उत्तर प्रदेश)शोध-वर्ष: 2025 शोध-पत्र हिंदी साहित्य का आलोचना-परिदृश्य यदि आज एक सुसंस्कृत, तर्कसंगत और ऐतिहासिक चेतना से समृद्ध अनुशासन के रूप में देखा जाता है, तो इसका श्रेय आचार्य रामचंद्र शुक्ल को जाता है। उन्होंने न केवल हिंदी आलोचना की आधारशिला रखी,…

  • अमरेश सिंह भदौरिया की कविताएं | Amresh Singh Bhadauriya Poetry

    अमलतास चुपचाप झरता है अमलतास,जैसे पीली चूड़ियाँगिर रही हों किसी दुल्हन की कलाई से। गाँव की पगडंडी परजब धूप भी सो रही होती है,तब वहरंग भरता है उदासी में। न फूलों का शोर,न ख़ुशबू का घमंड—बस पीली परतों मेंएक ऋतु की मुस्कान ओढ़ेवह खड़ा रहता है। लड़कियाँ उसके नीचेखेल जाती हैं ब्याह-बनाव की कल्पनाएँ,बुजुर्ग उसकी…

  • ये गूंगी शाम

    ये गूंगी शाम ये गुंगी शाम मेरे कानों में कुछ कहती है, तु है कहीं आसपास ये अहसास मुझे दिलाती है,बेशक तू मुझे छोड़ गया, वादा अपना तोड़ गया, किया था वादा तूने ता-उम्र साथ निभाने का, हर ग़म मेरा बांट कर मुझे खुशी के फूलों की लड़ियां दिखाने का, दे गया तू ग़म उम्र-भर…

  • जीवन-भाग-2

    जीवन-भाग-2 हारना कब जितनाकब मौन रखना कबबोलना कब संतुलितहोंना कब विनम्रतापूर्वकपेश आना आदि – आदितब कहि जाकर हमइस जीवन रूपी नोकाको पार् पहुँचाने कीकोशिश कर सकते हैअतः हमनें आवेश मेंअपने आप को समनही रखा और अनियंत्रितहोकर बिना सोचें आक्रमकहोकर कुछ गलत सब्दोंका प्रयोग कर दिया तोइस जीवन रूपी नोका कोटूटने से वह डूबने से कोईभी…

  • जीवन-भाग-1

    जीवन-भाग-1 हम अपने जीवन मेंचले जा रहें है कोईदौड़े जा रहे तो कोईदिशाहीन से भटक रहे हैआखिर हम सब जाकहां रहे हैं? मंज़िल कीतलाश है राह दिखती नहींराह तो है पर मंजिलनिश्चित नहीं राह औरमंज़िल दोनों है पर गति नहींआखिर क्या करे ?कैसी ये पहेली है किजीवन जीते सब हैंपर विरले ही जीवनअपना सार्थक जीते…