• क्या खोया? क्या पाया? | Kahani Kya Khoya Kya Paya

    घर में चारों ओर जाले लगे हुए हैं। कूड़ा कटकर भी जहां देखो पड़ा हुआ है । अबकी होली में घर में पुताई नहीं हुए हैं तो कोई बात नहीं लेकिन जाला भी नहीं साफ हो सकता है। बेटों की शादी करके बहू लाने से क्या फायदा जब बहुएं घर के साफ सफाई नहीं कर…

  • मै अयोध्या हूं | Kavita Main Ayodhya Hoon

    मै अयोध्या हूं ( Main Ayodhya Hoon )   जम्बू द्वीप में जलते दीये आर्यावर्त की चमकती आभा बहते सरयू की निर्मल धारा मैं अयोध्या हूं ! स्कंद पुराण की कथा सुनाती रघुवंशियों की राजधानी होती प्रभु राम की जन्मभूमि बताती मैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ! सदियों से यातनाएं सहती बर्बर बाबर का विध्वंश झेलती न्याय मंडलों…

  • विश्व पृथवी दिवस | Kavita Vishwa Prithvi Divas

    विश्व पृथवी दिवस ( Vishwa Prithvi Divas )   पृथ्वी या पृथिवी या मानो विशाल धरा बसता इसके ऊपर ही सृष्टि हरा भरा भू भूमि वसुधा कहो या वसुंधरा धन संपदा का है मुझ में भंडार भरा पेट की छुदा मिटाने को मैं हूं धरित्री संतान का पोषण करती जैसे मां जीवन दात्री धूप छांव…

  • आजा अंजनी का लाला | Geet AaJa Anjani ka Lala

    आजा अंजनी का लाला   हे पवन पुत्र हनुमान आजा, अंजनी का लाला। रामदुलारे कष्ट मिटा जा, हे वीर बजरंग बाला। आजा अंजनी का लाला अष्ट सिद्धि नव निधि धारी, रोम रोम बसे राम। रामदूत संकट मोचन, बस राम नाम ही काम। स्वाहा स्वर्ण नगरी किन्हीं, रामभक्त मतवाला। सौ योजन सिंधु लांघ, माता का पता…

  • आप कहाँ हैं | Kavita Aap Kahan Hain

    आप कहाँ हैं ( Aap Kahan Hain )   निवास क्षेत्र और कर्म क्षेत्र हि है आपका जीवन क्षेत्र इनके संग का व्यवहार ही करता है प्रमाणित जीवन चरित्र अनगिनत रास्ते हैं कर्म पथ के पथ को मिलती है दिशा विवेक से विवेक आता है संस्कार से और संस्कार मिलते हैं संगत से संगत आपके…

  • मतदान महोत्सव | Kavita Matdan Mahotsav

    मतदान महोत्सव ( Matdan Mahotsav )   लोकतंत्र का महान महोत्सव मतदान करना शक्ति भक्ति महान महोत्सव मतदान करना राष्ट्र भक्त का कर्त्तव्य मतदान करें देश हित्त में मिलजुल मतदान करें राजतंत्र में राज घरानों की परम्परा प्रजातंत्र में मतदान करने की परम्परा अपने राजा का ख़ुद चयन करो मत में शक्ति समाई चयन करो…

  • दर्पण ना समाए | Kavita Darpan na Samaye

    दर्पण ना समाए  ( Darpan na Samaye ) रुप तेरा ऐसा दर्पण ना समाए मन ना उतराए भृकुटी ऐसी चांदनी चांद ना शरमाय गाल ऐसी लागी कनक ना चमकाय ओठ ऐसी रंगाय भौंरें ना गूंजाय बाला कानें लटकाए चंद्रमुखी सा इतराय हथेली ऐसी जुडाय सूर्यमुखी नमो कराए गेसू ऐसी लहलहाय सौंदर्य प्रकृति बरसाए। शेखर कुमार…

  • दूबर बाटे सबसे किसान देशवा में

    दूबर बाटे सबसे किसान देशवा में   रानी भरल खलिहान ई चइतवा में, लिट्टी-चोखवा लगाउतू यही खेतवा में। लूहिया-लुहान से ई नाचाला कपरवा, हमरे पसीनवाँ से लूटै ऊ लहरवा। दूबर बाटे सबसे किसान देशवा में, लिट्टी-चोखवा लगाउतू यही खेतवा में। रानी भरल खलिहान ई चइतवा में, लिट्टी-चोखवा लगाउतू यही खेतवा में। ठारी पड़े, हाड़ काँपे,…

  • महावीर जयंती | Kavita Mahavir Jayanti

    महावीर जयंती ( Mahavir Jayanti )   जीओ जीने दो परम पावन प्रवचन पीओ पीने दो परम पावन प्रवचन जीओ जीवन पीओ ग़म हरदम प्यारे अहि़सा परमो धर्म परम पावन प्रवचन महावीर का महान संदेश दिया सर्वोत्तम मनन मंथन करें परम पावन प्रवचन सुक्ष्म जीव अनंत आत्मा का बासा तीन ताप विनाशे परम पावन प्रवचन…

  • दिखावा | Kavita Dikhawa

    दिखावा ( Dikhawa )   शुभचिंतक हैं कितने सारे बाहर गोरे भीतर कारे मुखरा-मुखरा बना मुखौटा मिट्ठू दिखते जो हैं सारे लेकर आड़ झाड़ को काटे नए और पैने हैं आरे तन तितली मन हुआ तैयार ऐसे लोगों के पौ बारे सब कुछ दे देते हँसकर गए हाशिये में वे प्यारे दृष्टि हो गयी इतनी…