• अकेलापन | Hindi Poem Akelapan

    अकेलापन ( Akelapan )   अकेलेपन का ज़हर जो पी रहे हैं, साँस थमने की आस में जी रहे हैं, कुछ बातें होती हैं जो कहनी होती है, अनकहे से दर्द होते जो बांटनी होती है, कोई हो ऐसा जो उन पलों में थाम ले, मोहब्बत से अपने होने का एहसास दे, उन एहसासों में…

  • तमाशा | Kavita Tamasha

    तमाशा ( Tamasha )   कौन कहता है आईने झूठ नहीं बोलते वे चेहरे के पीछे की परतों को कहाँ खोलते हैं दिये गये सम्मान में भी दिली सम्मान कहाँ होता है उसमे तोचापलूसी के पीछे छिपा मतलब हि होता है झंडा उठाने वाले भी लेते हैं अपनी मजदूरी दल से उन्हें किसी हमदर्दी नहीं…

  • मां- पिता | Kavita Maa Pita

    मां- पिता  ( Maa Pita )   मां जान है तो , पिता आत्मा है, आत्मा जब रोती है तो , जान निकल जाती है। जीने के लिए , मानव को चाहिए , माता-पिता का, आशीष रूपी छांव । मां पिता है तो , जीवन का अस्तित्व है, मां पिता नहीं है तो, जीवन अस्तित्वहीन…

  • लोकतंत्र अभयदान | Kavita loktantra Abhaydan

    लोकतंत्र अभयदान लोकतंत्र अभयदान,शत प्रतिशत सही मतदान मतदान लोकतांत्रिक व्यवस्था, सशक्त नागरिक अधिकार । अवसर सर्वश्रेष्ठ नेतृत्व चयन, राष्ट्र भविष्य अनूप श्रृंगार । योग्य दक्ष आदर्श प्रतिनिधि, सहर्ष प्राथमिकता सदा आह्वान। लोकतंत्र अभयदान,शत प्रतिशत सही मतदान।। जाति धर्म पंथ आकर्षण, मतदान राष्ट्र अहितकारी । प्रसरित जनमानस वैमनस्य, परिणाम अभिवृद्धित भ्रष्टाचारी । संविधान प्रदत्त शक्ति संग,…

  • पुरुआ में सिहरे बदनियाँ

    पुरुआ में सिहरे बदनियाँ   पुरुआ में सिहरे बदनियाँ, कुलेल करे देखा चँदनियाँ। (2) झुरुर- झुरूर बहे पवन पुरवाई, होतैं जो सइयाँ ओढ़उतैं रजाई। काबू में नाहीं जवनियाँ, कुलेल करे देखा चँदनियाँ। पुरुआ में सिहरे बदनियाँ, कुलेल करे देखा चँदनियाँ। उड़ि -उड़ि अँचरा बुलावे सजनवाँ, होई कब उनसे मधुर ऊ मिलनवाँ। रोज-रोज लड़े लै नथुनियाँ,…

  • नदी पार के लोग | Laghu Katha Nadi Paar ke Log

    नदी रामपुर और कैथा गाँव के बीच से होती हुई बहती है। बरसात में जब वह उफनती है तो दोनों गाँव के खेतों को एक समान डूबोती – धोती हुई बहती है। दोनों गाँव वाले दुख नहीं मानते कि नदी को ऐसा नहीं करनी चाहिए बल्कि वे खुश होते हैं कि हमें भी नदी की…

  • जब जरूरत पड़े तो तस्वीरें देखिए

    जब जरूरत पड़े तो तस्वीरें देखिए   जब जरूरत पड़े तो तस्वीर देखिए मेरी आँखों में उमड़ा भी नीर देखिए पास हैं दो दूरी आप बनाएं हैं अभी देख सकें तो मेरी तकदीर देखिए आइने में तो हम आपके मिल जाएंगे अश्कों की मेरी लकीर लकीर देखिए हम भंवर में पड़े तो हम छूट जाएंगे…

  • भूख और भगवान | Kavita Bhookh aur Bhagwan

    भूख और भगवान ( Bhookh aur Bhagwan )   भूख और भगवान में, कौन बड़ा? कौन छोटा ? छिड़ी जंग है। भूख है कि, मिटने में नहीं आती , बार-बार पेट, भरना पड़ता है । एक बार भूख लगने पर, खाने के बाद भी, फिर बार बार, खाना पड़ता है। भगवान की कथा, सुनाने वाले…

  • आहट | Kavita Aahat

    आहट ( Aahat )   घर के भीतर तो नज़र आती हैं दीवारे हि रास्ते तो बाहर हि दिखाई देते हैं उजाले की चाहत में कलियाँ अंधेरे मे ही सजती संवरती हैं आते नहीं कहकर अवसर कभी उनकी आहट को हि महसूस करना होता है गफलत भरी नींद को हि लापरवाही कहते हैं आभास हि…

  • जाये यारो | Ghazal Jaye Yaro

    जाये यारो ( Jaye Yaro ) दिल की सरगोशी मिरी मुझको डराये यारो। हद कि बस याद वही याद क्यूं आये यारो। मुस्तकिल कह दो रहे उससे वो दिल में मेरे और जाना है तो फिर जल्द ही जाये यारो। मुझको मंजूर सज़ा जो वो मुक़र्रर कर दे शर्त बस ये की ख़ता मेरी बताये…