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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • कवि सम्मेलन
    साहित्यिक गतिविधि

    भावांजलि कला एवं साहित्य मंच और अखिल भारतीय सांस्कृतिक चेतना मंच के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ कवि सम्मेलन

    ByAdmin April 7, 2025April 7, 2025

    आज रविवार दिनांक 6 अप्रैल, 2025 को प्रातः फारूका खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अंबाला छावनी के प्रांगण में भावांजलि कला एवं साहित्य मंच, अंबाला और अखिल भारतीय सांस्कृतिक चेतना मंच, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शानदार कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली, मधुबनी, देवरिया, चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र और इस्माईलाबाद से पधारे कवि-कवयित्रियों के साथ अंबाला…

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  • प्रेम : एक नाम, एक एहसास
    आलेख

    प्रेम : एक नाम, एक एहसास

    ByAdmin April 7, 2025April 7, 2025

    कुछ नाम होते हैं, जो सिर्फ पहचान नहीं होते, वो एक संपूर्ण भावना होते हैं। प्रेम—ये मेरा नाम है, पर इससे भी ज़्यादा, ये मेरी आत्मा का सबसे कोमल हिस्सा है। इस नाम में सिर्फ मैं नहीं हूँ, इसमें वो हर स्पर्श, हर इंतज़ार, हर टूटन और हर जुड़ाव भी है… जिसे मैंने जिया है,…

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  • Ram Ram
    आलेख

    मर्यादा पुरुषोत्तम: कथा से कर्म तक

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    (राम नवमी पर एक साहित्यिक आलेख) साहित्य, धर्म और संस्कृति जब एकत्र होकर किसी एक स्वरूप को आकार देते हैं, तो वह स्वरूप केवल वंदनीय नहीं, जीवंत होता है—वह प्रेरक होता है, वह पथप्रदर्शक होता है। श्रीराम ऐसा ही एक स्वरूप हैं—जो केवल देवता नहीं, एक जीवन-दर्शन हैं, एक मानवता का आदर्श हैं, और भारतीय…

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  • जय श्री राम ( दोहे )
    कविताएँ

    जय श्री राम ( दोहे )

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    जय श्री राम ( दोहे ) जनमे जिस क्षण महल में, कौशल्या ने लाल।गूंजी घर -घर में तभी, ढोल मँजीरा ताल ।। पिता वचन की राम ने , रखी सहज ही लाज |ठुकराया संकोच बिन , अवधपुरी का राज ।। पीछे पीछे चल दिये ,जहाँ चले प्रभुराम।।सीता लक्ष्मण साथ में, छोड़ अवध का धाम ।…

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  • Mahavir jayanti par Kavita
    कविताएँ

    2624 वां महावीर जन्म कल्याणक दिवस

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    2624 वां महावीर जन्म कल्याणक दिवस भगवान महावीर को मेरा भावों से शत – शत वन्दन !भगवान महावीर की राह को अपनायें ।मानव जीवन सफल बनायें ।अब भोर है उठ जाग जायें ।क्यों आँखें मूंदकर हम सोयें ।संत हमारी मूर्छित चेतना जगाते ।कीमती वक्त हमारा हम क्यों खोते।दुनिया की हैं यह झूठी माया ।जैसे बादल…

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  • जब जंगल रोए
    कविताएँ

    जब जंगल रोए

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    जब जंगल रोए – कांचा गचीबोवली की पुकार ( दिकुप्रेमी की कलम से ) कुछ आवाज़ें मौन होती हैं,जैसे टूटी टहनियों की टीस,जैसे मिट्टी से उखड़ते पेड़ों की कराहजिन्हें कोई सुनना नहीं चाहता। तेलंगाना के कांचा गचीबोवली वन क्षेत्र मेंविकास की आड़ मेंविनाश का वाक्य लिखा गया।जहाँ कभी हवाओं की सरसराहटकवियों को गीत देती थी,वहाँ…

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  • Shree Ram ki Vanshavali
    कविताएँ

    रामनवमी का त्योहार

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    रामनवमी का त्योहार रामनवमीअसहयोगजो व्यक्ति अकेलाप्रभु भक्ति में रतरहकर जीवनजीना जानता हैं ,वह स्वयं मेंआनंद कोखोज लेता हैं ;उसे प्रभु श्री रामकी तरह असंयममें असहयोगकरने में कोईकठिनाई नहींहोती हैं ।क्योंकि उसकेमन में कोईचाह नहीं हैं ,आकांक्षा नहीं हैं ,वह स्वयं आत्मामें संतुष्ट हैं ।जो सन्तुष्टहै वह प्रभु श्रीराम की तरहकर सकता हैअसहयोग । प्रदीप छाजेड़(…

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  • अकोला के ये सिनेमाघर
    आलेख

    बहते जीवन की पहचान.. अकोला के ये सिनेमाघर

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    अकोला फिल्मो का शौकीन हैं.. अकोला में फिल्में भर भर कर व्यपार करती है.. फिल्मो के प्रति जुनून ओर दीवानगी जो अकोला वासियों में है उस के उदाहरण कम ही है.. मगर अब हालात बदले है.. सिनेमा अब अकेला होने लगा है। सिनेमाघरों से भिड़ छंटने लगी है.. सिनेमाघरों के बाहर जो मेले लगते थे…

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  • रामनवमी
    आलेख

    रामनवमी: मर्यादा, धर्म और आत्मबोध का पर्व

    ByAdmin April 6, 2025April 6, 2025

    रामनवमी केवल एक उत्सव नहीं, अपितु आत्मबोध और सामाजिक चेतना का जागरण है। यह दिवस बाह्य आडंबर से परे, अंतःकरण में निहित दिव्यता को जागृत करने का अवसर है। श्रीराम केवल इतिहास के पृष्ठों में अंकित एक चरित्र नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आत्मा, मर्यादा का आदर्श और कर्तव्य की परम निष्पत्ति हैं। उनका जीवन…

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  • कवि और कुत्ता
    कविताएँ

    कवि और कुत्ता

    ByAdmin April 4, 2025April 4, 2025

    कवि और कुत्ता मैं कवि हूॅं,आधुनिक कवि हूॅं।शब्दों का सरदार हूॅं,बेइमानों में ईमानदार हूॅं । नेताओं का बखान करता हूॅं,सरकार का गुणगान करता हूॅं,योजनाओं की प्रशंसा करता हूॅं,फायदे का धंधा करता हूॅं,डर महराज का हैपीले यमराज का है। मैं संयोजक हूॅंसपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस का,मुझे महारत है रंग बदलने का,किसी मौसम, किसी परिवेश का,उधार में…

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