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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • राजस्थानी साहित्य के द्रौणाचार्य जनकवि बजरंग लाल पारीक ‘लाल’ की 39वीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी आयोजित
    साहित्यिक गतिविधि

    राजस्थानी साहित्य के द्रौणाचार्य जनकवि बजरंग लाल पारीक ‘लाल’ की 39वीं पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी आयोजित

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    नवलगढ़। राजस्थानी साहित्य के द्रोणाचार्य एवं सुप्रसिद्ध काव्य रचना “चांद चढ़्यो गिगनार” के रचयिता जनकवि बजरंग लाल पारीक ‘लाल’ की 39वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जनकवि ‘लाल’ के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मुख्य अतिथि के रूप में ठाकुर आनंद सिंह शेखावत…

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  • dr.bhimrao ambedkar
    आलेख

    बाबा साहब डॉ.भीमराव अंबेडकर:-व्यक्तित्व एंव कृतित्व

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    अगाध ज्ञान के भंडार, घोर अध्यवसायी, अद्भुत प्रतिभा, सराहनीय निष्ठा और न्यायशीलता तथा स्पष्टवादिता के धनी डॉ.भीमराव अंबेडकर जी का जन्म 14, अप्रैल,1891ई. को इंदौर के पास महू छावनी में हुआ था।जन्म के समय उनका नाम भीम सकपाल था।डॉ.अंबेडकर साहब का जन्म महाराष्ट्र की सब से अछूत समझी जाने वाली महार जाति में हुआ था।,बाबा…

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  • संविधान निर्माता नमन वंदन हे राष्ट्र रतन भारत पंचशील सिद्धांत अपनाया बौद्ध धर्म में हुये रत समानता भाईचारा मानवतावाद के पथ प्रदर्शक
    आलेख

    “डॉ. भीमराव अंबेडकर: समता, न्याय और मानव गरिमा के पुरोधा”

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    14 अप्रैल को सम्पूर्ण भारतवर्ष में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। यह दिवस न केवल एक महापुरुष के जन्म की स्मृति है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समता और मानव गरिमा की स्थापना के संकल्प का प्रतीक भी है। डॉ. अंबेडकर का जन्म 1891 में एक निर्धन और…

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  • Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita
    आलेख

    दलितों के भगवान थे: डॉ भीमराव अम्बेडकर

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    आधुनिक समय में जहां लोग कुत्ते का जूठा पानी तो पी सकते थे लेकिन एक मनुष्य के छूने से लोगों का धर्म भ्रष्ट हो जाता था। उन्हें गांव से दूर जंगलों बस्तियों में रहने को मजबूर होना पड़ता था। उनकी जिंदगी जानवरों से भी बदतर थी। ऐसी परिस्थिति में एक ऐसे दिव्य महामानव का जन्म…

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  • राष्ट्र निर्माता एवं दलितों के मशीहा डॉ भीमराव अंबेडकर
    आलेख

    भीमराव अंबेडकर और आज: विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन?

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा और सामाजिक न्याय को हथियार बनाया, और जाति व्यवस्था का खुला विरोध किया। आज उनका नाम हर मंच पर लिया जाता है, लेकिन उनके विचारों को गंभीरता से अपनाया नहीं जाता। आरक्षण को राजनीतिक हथियार…

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  • अद्वितीय
    कविताएँ

    अद्वितीय

    ByAdmin April 14, 2025April 14, 2025

    अद्वितीय दर्शन की भाषा मेंकहा जा सकता हैदूसरा कोई नहींव्यवहार की भाषामें कहा जा सकता हैअकेला कोई नहींअपेक्षित सुधार व परिस्कार हो,और उसके हर कदम के साथसंतुलन का अनोखा उपहार होबाहरी दुनियां का भ्रमणतो केवल संसार समुद्र मेंआत्मा का भटकन है वहइसी में क्यों पागल बनाहमारा यह मन और जीवन हैजिस दिन हमें अन्तर केआनन्द…

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  • ज़िंदगी
    कविताएँ

    ज़िंदगी

    ByAdmin April 13, 2025April 13, 2025

    ज़िंदगी तेरे बिना ये साँझ भी वीरान लगी,हर सुबह भी अब तो अनजान लगी,मैं मुस्कराया पर दिल रो दिया,दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया? तन्हा हुआ तो वक़्त भी थम गया,हर रास्ता जैसे मुझसे छिन गया,जब तू थी, हर मोड़ पे तूने हौंसला दिया,दिकु, तूने इतनी गहराई से क्यों प्रेम किया? बातें अधूरी,…

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  • वाणी और पानी -ध्रुव-2
    कविताएँ

    वाणी और पानी -ध्रुव-2

    ByAdmin April 13, 2025April 13, 2025

    वाणी और पानी – ध्रुव-2 वह ठीक उसी तरहअसंयमित बहते हुएपानी से बाढ़ कीत्रासदी, भूस्खलनआदि जैसे प्राकृतिकआपदाएं आ जाती हैवह गांव कस्बे सब जलसमाधि में विलीन हो जाते हैंऔर साथ में धन–जन आदिकी भी भारी क्षति होती हैइसलिए यह जरूरी हैकि पर्यावरण का संतुलनसही से बनाए रखें औरअसंयमित बहते हुएपानी और बिनाविचारे बोली वाणीदोनों पर…

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  • वाणी और पानी
    कविताएँ

    वाणी और पानी -ध्रुव-1

    ByAdmin April 13, 2025April 13, 2025

    वाणी और पानी – ध्रुव-1 वाणी की मधुरताहमारे ह्रदय द्वारको सही सेखोलने की कुंजी हैपानी जीवन पर्यन्तहमारे साथ सदैवरहने वाला होता हैवह हमारे जीवन मेंरिश्ते भी काफीमहत्वपूर्ण होते हैंपहन ले हम चाहेकितने भी क़ीमतीवस्त्र या आभूषणपर वाणी बता देती हैकि व्यक्ति कितने पानी मेंजैसे कोयल और कागदिखते एक जैसेबोल मीठे सुनकोयल के दिल जीत लेतेपर…

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  • आख़िर क्यों?
    कविताएँ

    आख़िर क्यों?

    ByAdmin April 12, 2025April 12, 2025

    आख़िर क्यों? क्यों हर राह तुझ तक जाती नहीं,क्यों तेरी झलक नज़र आती नहीं?हर रोज़ तुझे देखने की कोशिश की,फिर भी क्यों मेरी दुआ असर लाती नहीं? ना कोई शिकवा, ना कोई गिला है,तेरे बिना हर लम्हा मुझे अधूरा मिला है।मैंने तो बस तुझसे प्यार किया,फिर क्यों मुझे ये फ़ासला मिला? कभी ख्वाबों में, तो…

    Read More आख़िर क्यों?Continue

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