• होली आई रे | Holi Aayi re

    होली आई रे  ( Holi Aayi re ) ( 2 ) होली आई…..होली आई…होली आई रे होली आई…..होली आई…होली आई रे नीले पीले लाल गुलाबी रंगों का ये त्यौहार, खुशियों उमंगों से भर देता है सबका संसार। रंग बिरंगे रंगों में सबको डुबोने होली आई रे, क्या बच्चे क्या बूढ़े सबकी बनाने टोली आई रे।…

  • पहली दफ़ा | Pehli Dafa

    पहली दफ़ा ( Pehli Dafa )   जबसे तुम्हें देखा है जीने की हसरत हुई है, पहली दफ़ा ख़ुद से हमको मोहब्बत हुई है, सुन ज़रा तू ऐ मेरे हमराज़ ऐ मेरे हम-नशीं, तेरे आने से मुर्दा-ए-दिल में हरकत हुई है, तू पास है दिलमें जश्न-ए-बहारां हर रोज़ है, तेरे बिन तो फ़क़त ख़िजाँ की…

  • व्याकुलता | Vyakulta

    व्याकुलता ( Vyakulta )   खोज लेती है धारा प्रवाह अपना आपसे सलाह लेती नहीं निगाहों में जिनके बसता हो सागर वो नदी नालों में कभी रुकते नहीं आदि से अनंत तक की यात्रा रहती है गतिमान सदैव ही ठहर सकते हैं भले मन या तन से आप आपकी कहानी कभी रुकती नहीं अन गिनत…

  • खाटू वाला श्याम हमारा | Khatu Shayam

    खाटू वाला श्याम हमारा ( Khatu Wala Shayam Hamara )   हारे का सहारा,खाटू वाला श्याम हमारा शेखावाटी उत्संग खाटू नगरी, जन आस्था परम धाम । धर्म कर्म पावनता अथाह, दर्शित अलौकिकता अविराम । दुःख कष्ट मूल विलोपन, अविरल सुख समृद्धि धारा । हारे का सहारा, खाटू वाला श्याम हमारा ।। कलयुग कृष्ण अवतारी बाबा,…

  • आदमी बड़ा चाटुकार है | Aadmi Bada Chatukar

    आदमी बड़ा चाटुकार है! ( Aadmi Bada Chatukar Hai ) आदमी बड़ा चाटुकार है- स्वार्थ देखा नहीं; कि, झटपट चाटने लगता है। ऐसी-ऐसी चाटुकारी… आदमी-आदमी लेकर बैठा है; कि, वक्त आने पर… आदमी, आदमी को चाट लेता है। चाटुकारों की इस दुनिया में, आदमी इतना चाटुकार है- अपना काम निकल जाये, इसकी ख़ातिर… थूक तक…

  • मैं और मेरी तनहाई | Main aur Meri Tanhai

    मैं और मेरी तनहाई ( Main aur Meri Tanhai )   मिलने को तो मिला बहुत, पर मनचाहा न मिला। निद्रालस नयनों को सपनों ने है बहुत छला। बनते मिटते रहे चित्र कितने ही साधों के। दण्ड भोगता रहा न जाने किन अपराधों के, साॅसों की पूंजी कितनी ही, मैंने व्यर्थ गंवाई। बहुत बार भयभीत…

  • कैसे उड़े अबीर | Ude Abir

    कैसे उड़े अबीर ( Kaise Ude Abir )   फागुन बैठा देखता, खाली है चौपाल । उतरे-उतरे रंग है, फीके सभी गुलाल ।। ●●● सजनी तेरे सँग रचूँ, ऐसा एक धमाल । तुझमे खुद को घोल दूँ, जैसे रंग गुलाल ।। ●●● बदले-बदले रंग है, सूना-सूना फाग । ढपली भी गाने लगी, अब तो बदले…

  • मस्ती | Masti

     मस्ती  ( Masti )   रहा नहीं वह दौर अब कि आकार पूछेंगे कुछ आपसे आप बैठे रहे यूं ही हो गए हैं वह घोड़े रेस के सलाह लेने की आदत नहीं देने के फितरत है उनकी पढ़ी होंगी आप किताबें वो माहिर हैं डिजिटल के सिमट रही खबर आपकी अखबार के पन्नों में हो…

  • माई का आशियाना | Mai ka Ashiyana

    एक माई थी। जिसका अपना कच्चा मकान टूट कर गिर गया था। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि घर को बना सके। जिसके कारण वह मड़ैया बनाकर किसी प्रकार गुजर बसर कर रही थी। पति को गुजरे धीरे-धीरे दशकों हो गए थे। जो भी कमाई हो रही थी। किसी प्रकार से घर में नून…

  • खेलत कन्हाई है | Khelat Kanhai hai

    खेलत कन्हाई है ( Khelat Kanhai hai )   नटवर नागर है तू प्रेम भरी सागर तु ग्वाल बाल संग फाग खेलत कन्हाई है छोरा छोरी जोरा जोरी’ मोरी है कलाई मोड़ी राधा रानी संग ‘रास खेलत कन्हाई हैं रंग डारे अंग अंग’ लहंगा व चोली तंग कान्हा खेले होरी’नाहीं मानत कन्हाई है गारी देवे…