• बचपन की यादें | Bachpan ki Yaadein

    बचपन की यादें  ( Bachpan ki yaadein )    बचपन की यादों का अब तो मैं दिवाना हो गया क्या शमा कैसी फिजाएं,मन मस्ताना हो गया।   मासूमियत की है लरी,मस्ती का फ़साना क्या कहें प्यार था पहले का जो अब वह तराना हो गया।   वह खेलना वह कूदना उस खेत से खलियान तक…

  • चंद्रघंटा मां | Chandraghanta Maa

    चंद्रघंटा मां ( Chandraghanta Maa )    स्वर्णिम आभामयी मां चंद्रघंटा,अनंत सद्यः फलदायक शारदीय नवरात्र तृतीय बेला, शीर्षस्थ भक्ति शक्ति भाव । सर्वत्र दर्शित आध्यात्म ओज, जीवन आरूढ़ धर्म निष्ठा नाव । चंद्रघंटा रूप धर मां भवानी, शांति समग्र कल्याण प्रदायक । स्वर्णिम आभामयी मां चंद्रघंटा,अनंत सद्यः फलदायक ।। साधक पुनीत अंतर्मन आज, मणिपूर चक्र…

  • मां चंद्रघंटा | Maa Chandraghanta

    मां चंद्रघंटा ( Maa chandraghanta ) तीसरा स्वरूप अदभुद माता का, कहाती जो दुर्गा मां चंद्रघंटा। मस्तक धारे मां अर्धचंद्र, चमकीला रंग उनका स्वर्ण। दस भुजाएं अस्त्रों से सुशोभित, खड़ग, बाण शस्त्र किए धारण। तीसरा नेत्र सदा खुला रहता, बुराई से लड़ने की दिखाए तत्परता। मां चंद्रघंटा का सिंह है वाहन, शांति मिलती जो करे…

  • अनुपमा अनुश्री को “पत्रकारिता अलंकरण 2023 एवं एवं ” हिंदी भाषा रत्न मैथिलीशरण गुप्त सम्मान “

    प्रज्ञा हिंदी सेवार्थ संस्थान ट्रस्ट, फिरोजाबाद के प्रबंधक सचिव कृष्ण कुमार कनक के द्वारा पंचम राष्ट्रीय प्रज्ञा सम्मान समारोह 2023 हेतु प्रदान किए जाने वाले सम्मानों से सम्मानित होने वाली विभूतियांँ और सम्मान प्रदाताओं का विवरण घोषित किया गया जिसमें भोपाल से कवयित्री ,साहित्यकार, रेडियो- टीवी एंकर, समाजसेवी ,अध्यक्ष आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन एवं विश्व हिंदी…

  • वक्त कब करवट बदलें | Waqt Kab

    वक्त कब करवट बदलें ( Waqt kab karwat badle )    वक्त कब करवट बदल ले, क्या-क्या खेल दिखाता है। वक्त कहकर नहीं बदलता, समय चक्र चलता जाता है। मौसम रंग बदलता रहता, पल-पल जब मुस्काता है। कालचक्र के चक्रव्यूह में, नव परिवर्तन तब आता है। समय बड़ा बलवान प्यारे, बदलते किस्मत के तारे। गुजरा…

  • धिक्कार | Dhikkar

    धिक्कार! ( Dhikkar )    सिसक रही क्यों ममता मेरी हाहाकार मचा है क्यों उर मेरे नारी होना ही अपराध है क्या क्यों सहती वह इतने कष्ट घनेरे पली बढ़ी जिस गोद कभी मैं उसने भी कर दिया दान मुझे हुई अभागन क्यों मैं बेटी होकर तब पूज रहे क्यों कन्या कहकर नारी ही नारायणी…

  • सिंह पे सवार भवानी | Singh pe Sawar Bhawani

    सिंह पे सवार भवानी ( Singh pe sawar bhawani )    सिंह पे सवार भवानी, सजा दरबार भवानी। दुखड़े मिटाने वाली, भर दो भंडार भवानी। सजा दरबार भवानी अष्टभुजाओं वाली, ढाल खड्ग खप्पर वाली। जय अंबे मांँ भवानी, महागौरी जय मांँ काली। अटल सिंहासन माता, हे जग करतार भवानी। साधक शरण में तेरी, बेड़ा कर…

  • नवदुर्गा | Navdurga

    नवदुर्गा ( Navdurga )   नवदुर्गा के नौ रूपों को पूजे हैं संसार। मात  करतीं सबका कल्याण । सिंह सवारी वाली मैया ,आईं गज पे सवार।  मात करतीं जग का कल्याण।  प्रथम शैलपुत्री कहलातीं,  पिता हिमाचल के घर जनमीं।  द्वितीय ब्रह्मचारिणी हो माते, संयम नियम का पाठ पढ़ातीं।  माथे पर घंटा सा चंदा, चंद्रघंटा है…

  • विरासत | Virasat

    विरासत ( Virasat )    युद्ध और जंग से गुजरते इस दौर में – सड़कों पर चलते एंटी माइनिंग टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों की आवाज़ों के बीच- स्कूलों पर गिरती मिसाइलों से धराशायी होती इमारतों में मासूमों की चीख पुकार के बीच- आसमान में उड़ते अचूक फाइटर जहाजों की कर्णभेदी ध्वनि के बीच – ढहे…

  • मां ब्रह्मचारिणी | Maa Brahmacharini

    मां ब्रह्मचारिणी ( Maa Brahmacharini )  ( 2 ) दूजा माँ का रूप है, ब्रह्मचारिणी जान। हस्त कमण्डलु घोर तप, निरत सघन जप- ध्यान।। ब्रह्मचारिणी मातु की, करें वंदना भक्त। पूज रहे माँ के चरण, लगा आलता रक्त।। कष्टों की बरसात में, भीग रही हर बार। माँ सिर पर छाया करो, आऊँ जब भी द्वार।।…