• वेश्याएं | Veshyaen

    वेश्याएं ( Veshyaen )    उनकी गलियों में, दिन के उजाले में जाना, सभ्य समाज को, अच्छा न लगता, इसलिए छद्म वेश में , रात्रि के अंधियारे में , छुप-छुप कर वह जाता है , सुबह दिन के उजाले में, सभ्यता का लबादा ओढ़े , सदाचरण पर भाषण देता, लोग उसे देवता समझ , फूल…

  • दशानन | Dashanan

    दशानन ( Dashanan )  ( 2)  जली थी दशानन की नगरी कभी कभी हुआ था वध रावण के तन का जला लो भले आज पुतले रावण के उसने चुन लिया है घर आपके मन का.. मर गया हो भले वह शरीर के रूप मे किंतु कर रहा रमन विभिन्न स्वरूप मे बसा ,हुआ खिल खिला…

  • प्रभु तुम आए | Prabhu tum Aaye

    प्रभु तुम आए ( Prabhu tum aaye )    प्रभु तुम आए , दीन हीन बनकर , हमारे द्वार, मैंने तुझे दुत्कारा , जलील किया, तुम कुछ ना बोले , मेरी सारी नादानियों को, सहते रहे, फिर लौट गये। मैं मंदिरों में , तुझे ढूंढता रहा, परंतु मंदिर के बाहर, कोढी का रूप रखकर ,…

  • राधा कान्हा के द्वार | Radha Kanha ke Dwaar

    राधा कान्हा के द्वार ( Radha kanha ke dwaar )    फिर से  खड़ी  हुई  है  राधा  आ कान्हा के द्वार । माँग  रही है  उससे  अपने , सारे  ही  अधिकार ।। वापस करे कन्हैय्या गोकुल से चोरी की खुशियाँ और चुकाए  वृन्दावन का, पिछला  सभी उधार ।। महका रचा बसा खुशबू सा फिर भी…

  • मुझे मत तौलों | Mujhe mat Toulo

    मुझे मत तौलों ( Mujhe mat toulo )   मुझे मत तौलों , ईश्वरत्व से, मैं मनुष्य ही बने रहना चाहता हूं, जिसके हृदय में हो , मां जैसी ममता , पिता जैसा साथी, बहन जैसा स्नेह , जो हर दुखित प्राणी के, आंसुओं को पोछ सके , जिसके अंतर में हो , पद दलितों…

  • गूंज उठी रणभेरी | Gunj uthi Ranbheri

    गूंज उठी रणभेरी ( Gunj uthi ranbheri )    गूंज उठी रणभेरी, अंतर्मन विजय ज्योत जला आन बान शान रक्षा, दृढ़ प्रण दृष्टि श्रृंगार । शक्ति भक्ति धार धर, हिय भर सूरता आगार। अजेय पथ गमन कर, सर्वत्र बैठी घात लगा बला । गूंज उठी रणभेरी, अंतर्मन विजय ज्योत जला ।। स्मरण कर स्वप्न माला,…

  • चुनाव फिर से आ गया | Chunav

    चुनाव फिर से आ गया ( Chunav phir se aa gaya )   मतदान करने जरूर जाना चुनाव फिर से आ गया । अब करना न कोई बहाना चुनाव फिर से आ गया । सही व्यक्ति को पहले चुन लो । गुण सारे तुम उसके गुन लो । फिर उस पर मुहर लगाना । चुनाव…

  • जय हो जय हो कलम तेरी | Jai ho Kalam Teri

    जय हो जय हो कलम तेरी  ( Jai ho jai ho kalam teri )    तीर और तलवार कहां कब कर पाए वह काम कभी कलमों के ताकत के आगे टिका कौन बलवान कभी   जड़चेतन में जान फूंककर पिघल पिघल स्याही लिख दी सिंहनाद सी कलम गरज कर युग की युगभावी लिख दी  …

  • अनमोल सुख | Anmol Sukh

    अनमोल सुख ( Anmol sukh )    एक दिन पुष्प पूछ बैठा माली से ऐ माली इक बात बताओ सारा दिन मेहनत करते हो खून पसीना इक करते हो तभी ये बगिया खिलती है हरियाली यहां दिखती है। कभी निराई,कभी गुड़ाई कभी पौधों को पानी देते डाल कभी खाद- मिट्टी में तुम पौधों को पोषण…

  • टूटता तारा | Tootata Tara

    टूटता तारा ( Tootata tara )    एक रात बातों के मध्य तुम एकाएक खामोश हो गए थे मेरे पूछने पर मुझसे कहा मांग लो तुम्हें जो दुआ में माँगना है आज तुम्हारी मुराद पूरी हो जायेगी मैंने कहा – कैसे ? तुमने इशारा किया टूटते तारे का जिससे मैं थी अनभिज्ञ देख लो मेरी…