Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • आदर्श समाज एक परिकल्पना
    कविताएँ

    आदर्श समाज एक परिकल्पना

    ByAdmin February 26, 2025February 26, 2025

    आदर्श समाज एक परिकल्पना आदर्श समाज की कल्पना करें,जहां हर व्यक्ति सम्मानित हो।जहां हर कोई अपने अधिकारों को जानता हो,और अपने कर्तव्यों को निभाता हो।जहां समाज में शांति और सौहार्द हो। आदर्श समाज में शिक्षा का महत्व होगा,हर व्यक्ति को शिक्षा का अधिकार होगा।जहां हर कोई अपने सपनों को पूरा कर सकेगा,और अपने लक्ष्यों को…

    Read More आदर्श समाज एक परिकल्पनाContinue

  • शिव और पार्वती
    आलेख

    शिव और शिवतत्व

    ByAdmin February 25, 2025February 25, 2025

    सृष्टि की सबसे सुंदर अवधारणा ‘सत्यं, शिवं एवं सुन्दरम’ है। सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है और सुंदर ही कल्याणकारी है। तभी तो ये पूरी कायनात इतनी खूबसूरत है। शिव से जुड़ना अर्थात सम्पूर्ण सृष्टि का साथ हो जाना। यह शिवतत्व ही है, जहाँ से सब कुछ आया है एवं सब कुछ कायम…

    Read More शिव और शिवतत्वContinue

  • Poem in Hindi on Mahashivratri
    आलेख

    महाशिवरात्रि:- जागृतिका उत्सव

    ByAdmin February 25, 2025February 25, 2025

    महाशिवरात्रि का त्यौहार भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है । यह त्यौहार फागुन महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को मनाया जाता है, इस दिन भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था। जो सृजन संरक्षण और विनाश का ब्रह्मांडीय नृत्य है।शिवरात्रि से जुड़े अनेक मान्यताएं प्रचलित है जो…

    Read More महाशिवरात्रि:- जागृतिका उत्सवContinue

  • कलाएँ और रंगमंच
    आलेख

    सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े हुए हैं प्रदर्शन कलाएँ और रंगमंच

    ByAdmin February 25, 2025February 25, 2025

    मजदूर वर्ग को आजाद कराने और स्थापित सत्ता के खिलाफ क्रांति को मज़बूत करने के लिए 20वीं सदी की शुरुआत में नुक्कड़ नाटक का विकास हुआ। इसकी शुरुआत मुख्य रूप से उपनिवेशवाद विरोधी युग के दौरान भारत में वामपंथी रंगमंच कार्यकर्ताओं द्वारा की गई थी। यद्यपि नुक्कड़ नाटक और लोक नाटक में कई समानताएँ हैं,…

    Read More सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े हुए हैं प्रदर्शन कलाएँ और रंगमंचContinue

  • सही फैसला
    कहानियां

    सही फैसला

    ByAdmin February 24, 2025February 24, 2025

    राजू और रीना एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वे एक दूसरे से अलग हो गए थे। राजू की शादी कविता से हो गई थी, लेकिन वह अभी भी रीना को प्यार करता था, उसे भुला नहीं पाया था। उसके दिल में रीना के लिए एक गहरा प्यार और आकर्षण…

    Read More सही फैसलाContinue

  • कवियों ने मोहा मन
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम संस्था के कवि सम्मेलन में ‘प्यामे ज़ीस्त’ ग़ज़ल संग्रह भेंट, कवियों ने मोहा मन

    ByAdmin February 24, 2025February 24, 2025

    शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित एक भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में योजना आयोग के सदस्य उमेश कठेरिया जी तथा समाजसेवी सुरेन्द्र लाला जी को संस्था की ओर से ग़ज़ल संग्रह ‘प्यामे ज़ीस्त’ भेंट किया गया। यह कार्यक्रम साहित्य और समाज के प्रति समर्पित रहने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के उद्देश्य…

    Read More शुभम संस्था के कवि सम्मेलन में ‘प्यामे ज़ीस्त’ ग़ज़ल संग्रह भेंट, कवियों ने मोहा मनContinue

  • कर्म
    कविताएँ

    कर्म

    ByAdmin February 24, 2025February 24, 2025

    कर्म राहें चाहे जितनी कठिन हों,मैं चलना जानता हूँ,तेरे साथ की उम्मीद में,मैं हर मंजिल पाना जानता हूँ। कर्म ही मेरा साथी है,पर तेरी याद भी संजीवनी है,हर कदम पर तुझे पाने की आशा,मेरे सम्पूर्ण जीवन की कथनी है। मेरे सपनों में बस तू है,पर मेहनत से है मिलन का रास्ता,क्योंकि कर्म के बिना अधूरा…

    Read More कर्मContinue

  • वर्तमान समय में बढ़ता फैशन
    कविताएँ

    वर्तमान समय में बढ़ता फैशन

    ByAdmin February 24, 2025February 24, 2025

    वर्तमान समय में बढ़ता फैशन फैशन की दुनिया में हम खो गए,अपने आप को भूलकर हम दूसरों को देख गए।कपड़े, जूते, एक्सेसरीज़ की दौड़ में हम भाग गए,और अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की अनदेखी कर गए। हमारे घरों में नए और आधुनिक सामान आए,लेकिन हमारे दिलों में पुराने और सच्चे मूल्यों की कमी आई।हमारे जीवन…

    Read More वर्तमान समय में बढ़ता फैशनContinue

  • भारतीय साहित्य और तहज़ीब, संस्कृति को बचाने में बाल साहित्य का योगदान
    निबंध

    भारतीय साहित्य और तहज़ीब, संस्कृति को बचाने में बाल साहित्य का योगदान

    ByAdmin February 24, 2025February 24, 2025

    प्रस्तावना: भारतीय साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने में बाल साहित्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल बच्चों को मनोरंजन प्रदान करता है, बल्कि उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने, नैतिकता सिखाने और भाषा एवं परंपराओं के प्रति जागरूक करने का कार्य भी करता है। उपसंहार/ निष्कर्ष : भारतीय…

    Read More भारतीय साहित्य और तहज़ीब, संस्कृति को बचाने में बाल साहित्य का योगदानContinue

  • भारतीय अपराजिता नारियों की स्थिति हेतु प्रयासरत व चिंतनशील हूँ
    आलेख

    भारतीय अपराजिता नारियों की स्थिति हेतु प्रयासरत व चिंतनशील हूँ

    ByAdmin February 23, 2025February 23, 2025

    आधुनिक भारत के समाज की तमाम कुरीतियों के विरोध में अहम भूमिका निभाने वाले जाने-माने प्रतिष्ठित समाज-सुधारक : युगपुरुष कविवर श्री “सूर्यदीप” कवि-हृदय की यही मेरी आकांक्षा है कि सद्भाव के पुष्प निरंतर यहाँ खिलते रहें। हाँ, वास्तव में, लिखना एक महान कला है। आज की अपनी जंग तलवारों से नहीं बल्कि स्वयं की जीवंत…

    Read More भारतीय अपराजिता नारियों की स्थिति हेतु प्रयासरत व चिंतनशील हूँContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 36 37 38 39 40 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search