• अच्छे मूल्यों की शिक्षा

    एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का रहता था, जिसका नाम रोहन था। रोहन के माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे और उसे अच्छे मूल्यों की शिक्षा देना चाहते थे। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह रोहन को अच्छा लड़का बनाया जाए, उसमें अच्छे संस्कार डाले जाएं। अचानक रोहन के…

  • शुद्ध चिंतन आत्म मंथन

    हम यह किस दौर की तरफ जा रहे हैं? अगर पहले के समय की बात करें तो हमारे पूर्वजों में हमारी माताएं अपने पति को ‘ए जी ‘ ‘ओ जी’  ‘सुनिए जी ‘ कहती थी। उसे भी आजकल की थर्ड क्लास रील ने इतना गंदा मतलब बना दिया कि इसका मतलब होता है ए गधे/…

  • उन्माद भरा बसन्त

    उन्माद भरा बसन्त फ़रवरी की धूप में, सीढ़ियों पर बैठ कर, शरद और ग्रीष्म ऋतु के,मध्य पुल बनाती धूप के नामलिख रही हूँ ‘पाती’आँगन के फूलों परमंडराती तितलियाँ ,पराग ढूँढती मधुमक्खियाँ,गुंजायमान करते भँवरेमन को कर रहे हैं पुलकित हे प्रकृति!यूँ ही रखनायह मन का आँगन आनंदितसुरभित, सुगन्धितमधुमासी हवा का झोंकागा रहा है बाँसुरी की तरहहृदय…

  • कुत्ता काटे का टीका

    पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण जारी है, लेकिन खुशी की बात यह है कि भारत कोरोना वैक्सीन बनाने में सफल हो गया है। अब भारत में कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। लोगों के टीके लगाए जा रहे हैं। कोविड-19 का पालन करते हुए जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। सभी विद्यालयों को पुनः खोलने व…

  • कमल कुमार सैनी की कविताएं | Kamal Kumar Saini Poetry

    सब एक जैसे ही है सब एक जैसे ही हैहांसब एक जैसे ही हैसब कहते हीं सही हैहोता भी यही हैमनोविज्ञान कहता हैलगभग भावनाओं का जालसभी मेंसमान रहता हैमेरे वाला/मेरे वालींअलग हैं यह वहम हैसब उसी हाड़ मांस किबनावट हैये जो बाहरी रंग हैये सिर्फ सजावट हैकुछ में चमक हैकुछ में फिकापन है सब्र अब…

  • सरहदें

    सरहदें कौन कहता है,सरहदों का कोई रंग नहीं होता,वो बताएँगे सरहद का रंग,जिसने इन लकीरों को बनते देखा,बहते गर्म लहू से,बनती खिंचती रेखा सरहद का रंग लाल होता हैगाढ़ा तरल लालजो बहता रहता हैगलेशियर से निकलीनदी की तरहजो कभी सूखती नहीं धर्म और भाषा का भेदबड़ा होता है, बहुत बड़ाजिसे नहीं मिटा पायागाँधी जैसा महामानव…

  • क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता

    ‘क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता’ अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता,किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता।ज़िंदगी की राहों में चलते हैं हम,कभी खुशी तो कभी गम का सामना करते हैं हम। कभी राहों में फूल मिलते हैं,कभी काँटों से घायल होते हैं हम।फिर भी चलते रहते हैं अपनी मंज़िल की ओर,क्योंकि अधूरे…

  • संवेदना व यथार्थ : ‘अंतर्मन की यात्रा’

    संवेदना व यथार्थ हाँ, ‘दया’ मेरे कवि-हृदय का,एक महान तथा विशेष गुण है |सरलता,धैर्य तथा करुणा का धनी हूँ |‘दया’ मेरा सबसे बड़ा धर्म है |निर्मल मन को,असाधारण रूप से,शांत, स्थिर होना चाहिए |अनमोल जीवन को समझने के लिए |कवि की आवश्यकता से अधिकसम्वेदनशीलता नुकसानदायक है |मानवता, प्रेम, एकता, दया, करुणा,परोपकार, सहानुभूति, सदभावना,तथा उदारता का…

  • पुलक उठा

    पुलक उठा पुलक उठा रितुराज आते ही मन।नाप रहे धरती के पंछी गगन ।। पनघट के पंथ क्या वृक्षों की छाँवधरा पर नहीं हैं दोनों के पाँवलगा हमें अपना गोकुल सा गाँवकहा हमें सब ने ही राधा किशन।पुलक उठा –++++ प्रेम राग गाती हैं अमराइयांँउठती हैं श्वासों में अंगड़ाइयांँरास रंग करती हैं परछाइयांँभीग गया प्रेम…

  • धन्यवाद ओ सूखे दरख़्त

    राजस्थान का जो इलाका आज चमन बना हुआ है आधी शताब्दी के पहले अत्यधिक पिछड़ा हुआ क्षैत्र हुआ करता था.. मेवाड़ की भूमि पर अकाल का साया रहा करता था और लोगबाग रोजी रोटी के लिए महाराष्ट्र की और पलायन करने लगे थे। बाबूजी भी जन्म भूमि छोड़ अकोला पहुँचे और वहीँ रम गए.. अकोला…