कर्म | Karm
कर्म ( Karm) कर्म करो तुम हे मानव, तू क्यो संताप में डूबा हैं। फल देना है काम मेरा, तू कर जो तेरी पूजा है। मैं हर युग का नारायण जो, हर पल तेरे साथ रहा, संसय त्याग के कर्म करो, उस सा कर्म न दूजा है। मैने ही खंम्भे को फाड कर, के…
कर्म ( Karm) कर्म करो तुम हे मानव, तू क्यो संताप में डूबा हैं। फल देना है काम मेरा, तू कर जो तेरी पूजा है। मैं हर युग का नारायण जो, हर पल तेरे साथ रहा, संसय त्याग के कर्म करो, उस सा कर्म न दूजा है। मैने ही खंम्भे को फाड कर, के…
पिता बेटी संवाद पर कविता ( Pita beti samvad par kavita ) बेटी अपने घर आने को भी पूछना पड़ता है पराया कर दिया है पिता आपने पूछना पड़ता है बेशक में आपकी बेटी हूं पत्नी किसी की आपने मुझे बना दिया है आपकी एक आवाज में दौड़ कर आने वाली मैं जुड़ गई…
बीवी के नखरे हजार है फिर भी उससे प्यार है ( Biwi ke nakhre hajar phir bhi usse pyar hai ) बीवी घर की सरकार है, घर मालकिन दरकार है। बीवी के नखरे हजार है, फिर भी उससे प्यार है। बीवी बड़ी दिलदार है, खूबसूरती खजाना अपार है। ए जी ओ जी लो जी…
जन्मदिन की बधाईयाॅं जननायक ( Janmdin ki badhaiyan jananayak ) जन्म-दिन की बधाईयाॅं जननायक राजस्थान, समाज सेवा में सक्रिय रहकर बनाई पहचान। इस लोकसभा के युवा सांसद रहें कभी आप, राजनिति रास्तें में आये आपके ढ़ेर व्यवधान।। विद्यार्थी समय से रूचि थी आपमे ये भरमार, स्काउट एवं एनसीसी से सीखें प्यार व्यवहार। सादगी के…
हम भी रक्षक देश के ( Hum bhi rakshak desh ke ) कोई घबराएँ नहीं दिल में विश्वास चाहिए, हमको सलाह नही आपका साथ चाहिए। कोई नही है जो तुमको लूट रहा मार रहा, हम रक्षक देश के इसका विकास चाहिए।। परेशान नही आज सब ख़ुश रहना सीखों, कम खाना ग़म खाना गुस्सा पीना…
पुष्प ( Pushp ) टूट के डाल से जुदा हो गया फूल तो अपना नूर खो गया मुरझाया मगर खुशबू दे गया बिन कहे बहुत कुछ कह गया जिंदगी बस यूं ही तमाम होगी मुस्कुराया अलविदा हो गया नाम था अब बेनाम हो गया काम का अब बेकाम हो गया नियति का उसे भान…
श्रमिक ( Shramik ) पाँव में घाव सिर पर बोझ कुछ ऐसी गिरानी लिख। पसीने में डुबोकर लेखनी मेरी कहानी लिख।। उदर में मुझको रख के माँ ईंट गारे उठाती थी, जरा सी देर होने में मालकिन कहर ढाती थी, लगी जो चोट गिरने से अभी तक है निशानी लिख। पसीने ० ग़रीबी ने कहर…
मजदूर पर कविता ( Mazddor par kavita ) दोजून निवाला सही से नसीब ना हुआ मेरे हाथो आज तेरा सुंदर महल बन गया अपना तो झोपड़े में गुजारा हो गया कभी ठंड मे ठीठुर कर मैं सो गया कभी बारिश में भीग कांपता रह गया, कभी पसीने से लथपथ हो गरम थपेड़े सह गया…
ग़ज़ल ( Ghazal ) ( काफ़िया ईर की बंदिश रदीफ़ ग़ज़लों में ) मुहब्बत की कभी रूठी रही तक़दीर गज़लों में किसी को मिल गई है ख़्वाब की ताबीर ग़ज़लों में। वही उम्दा सुखन है हो जहां पर शायरी गहरी बहर अर्कान पैमाना कि हो तहरीर ग़ज़लों में। लुटी जिसकी मुहब्बत पा रहा…
जनक सुता जानकी ( Janak Suta Janaki ) जनक सुता जगजननी जानकी राधव प्रिया सिया अंबे मात की अष्ट सिद्धि नवनिधि सब दाता पवन पुत्र मां सिया गुण गाता रघुनंदन श्रीराम प्रिय स्वामी सारे जग के ईश्वर अंतर्यामी अवधपुरी हो आप महारानी लव-कुश बालक महाज्ञानी पतिव्रता प्रभुता बल नारी अग्नि परीक्षा तप बलधारी लक्ष्मी…