संजीव सलिल की कविताएं | Sanjeev Salil Poetry
सेमल अनुभूति की मिट्टी मेंविचारों के बीजसंवेदना का पानी पीकरफूले न समाए।फट गया कठोरता काकृत्रिम आवरण,सृजन के अंकुरपैर जमाकर मुस्काए।संकल्प की जड़ेंजमीं में जमीँ,प्रयास के पल्लव हरियाए।गगन चूमने को आतुरतना तना औरशाखाओं ने हाथ फैलाए।सूर्य की तपिश झेलीपवन संग करी अठखेलीचाँदनी संग आँख मिचौलीचाँद संग खिलखिलाए।कभी सब्जी बन मिटाई क्षुधाकभी चर्म रोग मिटाएघटाकर बढ़ती उम्र…










