भारत की वर्तमान दुर्दशा
भारत की वर्तमान दुर्दशा बेरोज़गारी के अंधकार में,भटक रहे हैं युवा इस द्वार में।सपने सब कागज़ हो गए,संघर्ष के पल और गहरे हो गए। महंगाई की आग बढ़ी,हर घर की थाली सूनी पड़ी।रोटी के लिए मेहनत हार गई,सुकून की नींद अब दूर हो गई। नेताओं का गिरता स्तर,वादे बनते जुमलों का सफर।चुनावी भाषण झूठे निकले,जनता…










