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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • वो मजदूर है
    कविताएँ

    भारत की वर्तमान दुर्दशा

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    भारत की वर्तमान दुर्दशा बेरोज़गारी के अंधकार में,भटक रहे हैं युवा इस द्वार में।सपने सब कागज़ हो गए,संघर्ष के पल और गहरे हो गए। महंगाई की आग बढ़ी,हर घर की थाली सूनी पड़ी।रोटी के लिए मेहनत हार गई,सुकून की नींद अब दूर हो गई। नेताओं का गिरता स्तर,वादे बनते जुमलों का सफर।चुनावी भाषण झूठे निकले,जनता…

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  • सकूँ
    कहानियां

    सकूँ

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    विभु एक 15 वर्षीय लड़का था, जो अपने परिवार के साथ एक छोटे से शहर में रहता था। वह एक अच्छा लड़का था, जो हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। एक दिन, विभु ने अपने पिता से कहा कि वह नदी के किनारे घूमने जाना चाहता है। उसके पिता ने उसे…

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  • एक खूंखार खूनी बन गया जेल का रसोईया
    कहानियां

    एक खूंखार खूनी बन गया जेल का रसोईया

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    वह खूनी भागना चाहता था खून करके किसी व्यक्ति का लेकिन वह पुलिस कि पकड़ में आ गया और उसे गिरफ्तार कर उम्र कैद कि सजा सुनाई गई… कारण जो भी हो हमारी मानसिकता एक खूनी को कभी अच्छे विचारों के साथ स्वीकार नहीं कर सकती बल्कि करेगी ही नहीं ,एक चोर ,एक डकैती, एक…

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  • छुपा कर रक्खें
    ग़ज़ल

    छुपा कर रक्खें

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    छुपा कर रक्खें हो न जाए कहीं रुसवाई छुपा कर रक्खेंइन अमीरों से शनासाई छुपा कर रक्खें फ़ायदा कुछ नहीं चतुराई छुपा कर रक्खेंमूर्ख के सामने दानाई छुपा कर रक्खें कौन करता है यक़ीं आपकी इन बातों परइसलिए अपनी ये सच्चाई छुपा कर रक्खें लालची कोई भ्रमर इसको चुरा ले न कहींफूल कलियाँ सभी अँगड़ाई…

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  • शुभम साहित्य संस्था का भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह: शायर विनय साग़र जायसवाल की गरिमामयी अध्यक्षता
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम साहित्य संस्था का भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह: शायर विनय साग़र जायसवाल की गरिमामयी अध्यक्षता

    ByAdmin January 27, 2025January 27, 2025

    बरेली में शुभम साहित्य एवं सामाजिक संस्था द्वारा एक भव्य कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम खुशहाली सभागार में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर विनय साग़र जायसवाल ने की। मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि रणधीर प्रसाद गौड़ “धीर” रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि हिमांशु श्रोतिए…

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  • सब अदा हो गये
    ग़ज़ल

    सब अदा हो गये

    ByAdmin January 27, 2025January 27, 2025

    सब अदा हो गये प्यार के वादे जब सब अदा हो गयेसारे शिकवे गिले ख़ुद हवा हो गये इस इनायत पे मैं क्यों न क़ुर्बान हूँएक पल में वो ग़म आशना हो गये उनकी क़ुर्बत से आता है दिल को सुकूंँदर्द- ओ- ग़म की वही अब दवा हो गये दिल के मुंसिफ का हर फ़ैसला…

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  • Dr. pritam
    कविताएँ

    डॉ. प्रीतम कुमार झा की कविताएं | Dr. Pritam Kumar Jha Poetry

    ByAdmin January 27, 2025February 9, 2025

    नज़र नज़र ढूंढती है मेरी उस नज़र को, बनाया है जिसने सभी को दीवाना, सभी काम गड़बड़ हुए कुछ हैं ऐसे,  कि दिल सबके गाते उन्हीं का तराना. ये उल्फत, ये चाहत, शरारत, नज़ाकत,  सभी हैं भरे कूट कर उनमें ऐसे, ये शोखी, ये आदत, शिकायत, मोहब्बत, समझ में न आये कहूँ किसको कैसे. के…

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  • महाकुंभ
    आलेख

    महाकुंभ: प्राचीनता एवं आधुनिकता का अद्भुत संगम

    ByAdmin January 27, 2025January 27, 2025

    वर्तमान समय में प्रयागराज में लगने वाले महाकुंभ की चर्चा भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में सुनाई दे रही है। कुंभ की परंपरा तो हजारों वर्ष पुरानी है लेकिन इस वर्ष का महाकुंभ आध्यात्मिक दृष्टि ही से ही नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि…

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  • Watan ki khushboo
    ग़ज़ल

    वतन की आबरू हर हाल में बचानी है

    ByAdmin January 26, 2025January 26, 2025

    वतन की आबरू हर हाल में बचानी है सियासी नफ़रतों की आग ये बुझानी हैख़ुलूस प्यार वफ़ा से ही जीत पानी है ये धर्म मज़हबों की जंग अब तो बंद करोहरेक शख़्स में इंसानियत जगानी है इरादे हमने ज़माने में कर दिये ज़ाहिरवतन की आबरू हर हाल में बचानी है सबक ये हमको बुजुर्गों से…

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  • ghar ghar tiranga lahraye
    कविताएँ

    आकाश में जब तिरंगा लहराता

    ByAdmin January 26, 2025January 26, 2025

    आकाश में जब तिरंगा लहराता जब कोयल गीत सुनाती है।जब भंवरा नगमे गाता है।।पुरवाई शौर मचाती है।जब बादल झूम के आता है।। जब बात निकलती है हर सू ।दिलदारों की मतवालों की।।जब याद सताती है हमको।इस देश पे भरनें वालों की।। तोपों के दहन खुल जाते हैं ।बंदूके गरजनें लगती है ।।आकाश का दिल थर्राता…

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