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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मां सरस्वती
    कविताएँ

    श्रुत स्तुति | सरस्वती वंदना

    ByAdmin February 2, 2025February 2, 2025

    श्रुत स्तुति ( सरस्वती वंदना ) वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी जो तीर्थंकर हैं,अष्ट कर्मों और अठारह दोषों से रहित जिनेश्वर हैं,अनंत चतुष्टय के धारी हैं अनंत कैवल्य ज्ञानी हैं,ऐसे त्रिकालदर्शी जिनमुख से झरती वाणी श्रेयस्कर है!! सरस्वती कहो या श्रुतमाता एक दूजे के पर्याय कहाएं,जैन धर्म में देव शास्त्र गुरु भव्य जनों को मोक्षमार्ग दिखाएं…

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  • Avnish Kumar Gupta Poetry
    कविताएँ

    अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’ की कविताएं | Avnish Kumar Gupta Poetry

    ByAdmin February 2, 2025August 18, 2025

    बरखा की गोद में सोती संध्या घन गगन में गूँज रही बादल की मंद पुकार,धरती के आँगन में झर-झर मोती की बौछार। सूरज की लाली थककर पथ से धीरे खो जाए,बूँदों की चादर में संध्या चुपके सो जाए। पीपल की डाली से टपके मोती-से आँसू,भीगती हवाओं में छुप जाए दिन का मानसू। दीपक की लौ…

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  • सुमंगला सुमन की कविताएं
    ग़ज़ल

    सुमंगला सुमन की ग़ज़लें | Sumangla Suman Poetry

    ByAdmin February 2, 2025May 22, 2025

    न कोई सफ़र, न किनारा मिला न कोई सफ़र, न किनारा मिलाहमें डूबने का इशारा मिला हवा साथ थी, फिर भी ठहरे रहेमुहब्बत में ना कुछ सहारा मिला कभी ख़्वाब लहरों पे लिखते रहेलिखा जो नहीं था, दुबारा मिला हमें ख़ार समझा था फूलों ने जबफ़िज़ा से वही फिर इशारा मिला भटकती रही कश्ती दरिया…

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  • बुलावा माँ का
    ग़ज़ल

    बुलावा माँ का

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    बुलावा माँ का कहाँ पिकनिक मनाने को वो नैनीताल जाता है, बुलावा माँ का आये तो वहां हर साल जाता है, खुले बाज़ार में जबसे बड़े ये मॉल हैं यारों, दुकानों से कहाँ फिर कोई लेने माल जाता है, बहुत तारीफ करता है सभी से माँ की तू अपने, मगर कब पूछने तू अपनी माँ…

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  • संजीव सलिल की कविताएं
    कविताएँ

    संजीव सलिल की कविताएं | Sanjeev Salil Poetry

    ByAdmin February 1, 2025July 22, 2025

    सेमल अनुभूति की मिट्टी मेंविचारों के बीजसंवेदना का पानी पीकरफूले न समाए।फट गया कठोरता काकृत्रिम आवरण,सृजन के अंकुरपैर जमाकर मुस्काए।संकल्प की जड़ेंजमीं में जमीँ,प्रयास के पल्लव हरियाए।गगन चूमने को आतुरतना तना औरशाखाओं ने हाथ फैलाए।सूर्य की तपिश झेलीपवन संग करी अठखेलीचाँदनी संग आँख मिचौलीचाँद संग खिलखिलाए।कभी सब्जी बन मिटाई क्षुधाकभी चर्म रोग मिटाएघटाकर बढ़ती उम्र…

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  • जैनियो सावधान.. कर्म की महिमा कम की जा रही है
    आलेख

    जैनियो सावधान.. कर्म की महिमा कम की जा रही है

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    आज तारीख है तीस जनवरी दो हजार पच्चीस.. समय है ब्रह्म मुहूर्त का ओर सहज ही मेरी नींद उचट गयी.. मोबाईल नामक बीमारी हाथ मे ओर नजर थम गई एक वीडियो पर.. एक मुनिराज ( उनके सम्मान में मैं उनका नाम नही लिख रहा हु ) अपने आहार को ले कर घोषणा कर रहे है…

    Read More जैनियो सावधान.. कर्म की महिमा कम की जा रही हैContinue

  • इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो
    ग़ज़ल

    इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करो इश्क़ को एहसान के जैसे जताया मत करोइस कदर जाने की जल्दी है तो आया मत करो। जानते हम अहमियत अपनी तुम्हारे सामनेतो ये किस्से बेक़रारी के सुनाया मत करो। मुस्कुराने पे बहुत दिलकश लगा करते हो तुममहफिलों में बेवजह तब मुस्कुराया मत करो। एक दूजे के…

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  • 26 वीं वैवाहिक वर्षगांठ
    संस्मरण

    26 वीं वैवाहिक वर्षगांठ

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    सर्वप्रथम अरविंद भैया और स्मिता भाभीजी को 26 वीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर “प्रदीप” की और से प्रणाम! बहुत- बहुत बधाई , शुभकामनाएँ व मंगलकामनाएँ । जीवन के प्रवाहमान में निरन्तर साँसों की तरह रिश्तों को भी उतार- चढ़ाव में पत्थर की ठोकर लगती हैं और विवेक से ख़ुशी का रसनानुवादन भी होता हैं परन्तु यह…

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  • हिन्दी महाकुंभ जबलपुर में महिमायुक्त कवयित्री श्रीमती बसंती ‘दीपशिखा’ जी को सर्वश्रेष्ठ साहित्य व कवयित्री सम्मान
    साहित्यिक गतिविधि

    हिन्दी महाकुंभ जबलपुर में महिमायुक्त कवयित्री श्रीमती बसंती ‘दीपशिखा’ जी को सर्वश्रेष्ठ साहित्य व कवयित्री सम्मान

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    जबलपुर, मध्य प्रदेश। हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित मंच “हिन्दी महाकुंभ जबलपुर” में इस वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों, साहित्यकारों और कवियों के साथ-साथ कवयित्री, लेखिका एवं सामाजिक चिंतक श्रीमती बसंती ‘दीपशिखा’ को भी “सर्वश्रेष्ठ साहित्य और कवयित्री सम्मान” से अलंकृत किया गया। श्रीमती बसंती दीपशिखा साहित्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र…

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  • गिरे आंखों से आंसु तो क्या
    कविताएँ

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या

    ByAdmin February 1, 2025February 1, 2025

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या गिरे आंखों से आंसु तो क्या ,नहीं मिले गले उनके तो क्या ,तराने लिखने मिले थे दो डगर,नहीं लिख सके मिलन गीत तो क्या ,गिरे आंख से आंसू तो क्या …..सभी कदम तरंग की धुन में ,कोई सुने कुछ कोई कुछ मन में ,मिलाते रहे बिंदुओं को रेख में,जिन्हें…

    Read More गिरे आंखों से आंसु तो क्याContinue

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