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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Shamshan par Bhojpuri Kavita
    भोजपुरी

    श्मशान | Shamshan par Bhojpuri Kavita

    ByAdmin February 9, 2023

    ” श्मशान ” भोजपुरी कविता ( Shamshan )    चार कंधा पे पड़ाल एगो लाश रहे फूल ,पईसा के होत बरसात रहे राम नाम सत्य ह सब केहू कहत जात रहे केहु रोआत रहे केहू चिल्लात रहे भीड़ चलत रहे ओके साथ मे जे समाज से अलग रहे, आज हांथ में आग ले सब कुछ…

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  • Poem Dil ko Harne se Roko Zara
    कविताएँ

    दिल को हारने से रोको जरा | Poem Dil ko Harne se Roko Zara

    ByAdmin February 9, 2023February 9, 2023

    दिल को हारने से रोको जरा ( Dil ko harne se roko jara ) मेहनत का फल होता खरा अतीत हो कितना अंधेरा भरा आशा ने देखो उजाला करा मजदूर मेहनतकश देखो जरा लगन किसान की खेत है हरा सोकर उठो जागो देखो जरा जीवन में रुकना नहीं है भला कदमों को आगे बढ़ते चला…

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  • Geet Sukh Dukh Milke Sahenge
    गीत

    सुख दुख मिलके सहेंगे | Geet Sukh Dukh Milke Sahenge

    ByAdmin February 9, 2023February 9, 2023

    सुख दुख मिलके सहेंगे ( Sukh dukh milke sahenge )    आशाओं की ज्योत जला, मीठे बोल सबसे कहेंगे। मुस्कानों के मोती लेकर, सुख-दुख मिलकर सहेंगे। मिले बड़ों का साया सर पे, आशीषों से भरे झोली। खुशियों के दीपक लेकर, सबसे बोले मीठी बोली। हंसी-खुशी जीवन बिताएं, हौसलों की बात कहेंगे। प्यार के मोती लुटाकर,…

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  • Nadi par Kavita
    कविताएँ

    नदी | Nadi par Kavita

    ByAdmin February 9, 2023

    नदी ( Nadi )  आँधी आऍं चाहें आऍं तूफ़ान, मैं सदैव ही चलती ही रहती। और गन्दगी सारे ब्रह्माण्ड की, समेट कर के बहा ले जाती।। मैं किसी के रोके नहीं रुकती, और कभी भी मैं नहीं थकती। मैं नदी ख़ुद मन वेग से चलती, अविरल सदैव बहती जाती।। अपनें इस प्रवाह से धरती के,…

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  • Mazdoor par Kavita
    कविताएँ

    मजदूर है मजबूर | Mazdoor par Kavita

    ByAdmin February 9, 2023

    मजदूर है मजबूर ( Mazdoor hai majboor )   जो मज़दूर था वह आज मजबूर हो गया, न रहा कोई काम वह बेरोजगार हो गया। निर्भर था पूरा परिवार उसकी दिहाड़ी से, रोज़गार उसके हाथ से सारा दूर हो गया।।   इस महामारी को लेकर आया था अमीर, आज इस मज़दूर को बेचना पड़ा ज़मीर।…

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  • Bhartiya Sanskriti par Kavita
    कविताएँ

    भारतीय संस्कृति | Bhartiya Sanskriti par Kavita

    ByAdmin February 8, 2023

    भारतीय संस्कृति! ( Bhartiya Sanskriti )   अपने हाथों अपनी संस्कृति मिटा रहे हैं लोग, जिसे देखा ही नहीं उसे खुदा कह रहे हैं लोग। पहुँचाना तो था अंतिम साँस को मोक्ष के द्वार, संस्कारों से देखो फासला बढ़ा रहे हैं लोग। दधीचि की अस्थियों से ही देवता बनाए थे वज्र, आखिर क्यों बाल्मीक बनना…

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  • Poem on Tabassum
    कविताएँ

    तबस्सुम | Poem on Tabassum

    ByAdmin February 8, 2023

    तबस्सुम ( Tabassum )    तरोताजगी भर जाती तबस्सुम महफिल को महकाती तबस्सुम दिलों के दरमियां प्यारा तोहफा चेहरों पे खुशियां लाती तबस्सुम गैरों को अपना बनाती तबस्सुम रिश्तो में मधुरता लाती तबस्सुम खिल जाता दिलों का चमन सारा भावों की सरिता बहाती तबस्सुम घर को स्वर्ग सा सुंदर बनाती तबस्सुम सुंदरता में चार चांद…

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  • Nayan par Kavita
    कविताएँ

    नयन नीर भरा समंदर | Nayan par Kavita

    ByAdmin February 8, 2023February 8, 2023

    नयन नीर भरा समंदर ( Nayan neer bhara samandar )    टप टप नीर नैन सूं टपका ये भरा समन्दर हो जाता है। सागर के खारे पानी को आंखों का पता चल जाता है। खुशियों का सैलाब हृदय में उमड़ घुमड़कर आता है। नैन नीर भरी सरिता बहती भाव भरा मन हरसाता है।   टूट…

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  • Kavita shahid Fauji ka Beta
    कविताएँ

    शहीद फौजी का बेटा | Kavita shahid Fauji ka Beta

    ByAdmin February 8, 2023

    शहीद फौजी का बेटा ( Shahid fauji ka beta )    मैंरे पापा घर कब आएंगे माॅं, इतना मुझको बता दो माँ। रोज़ाना मैं पूछता हूॅं तुझको, क्यों नही मुझको बताती माँ।। होली पर भी नही आए पापा, मैंरे पिचकारी नही लाए पापा। अब तो आनें वाली है दिवाली, क्या नही आएंगे इस दिवाली।। मेंरे…

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  • Kavita Jeevan Paheli
    कविताएँ

    जीवन पहेली समान | Kavita Jeevan Paheli

    ByAdmin February 8, 2023

    जीवन पहेली समान ( Jeevan paheli saman )    ऐसा है हमारा यह जीवन का सफ़र, चलते ही रहते चाहें कैसी यह डगर। ख़ुद के घर में अतिथि बनकर जाते, गांव शहर अथवा वह हो फिर नगर।। गांवो की गलियां और हरे-भरे खेत, पूछती है हमसे यह दीवारें और रेत। कौन हो भाई और कहा…

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