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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Anupam Kher par kavita
    कविताएँ

    अनुपम खेर | Anupam Kher par kavita

    ByAdmin November 18, 2022November 18, 2022

    “अनुपम” खेर ( Anupam Kher )  –> क्या उपमा दूँ मैं “अनुपम” की …….|| 1. हैं अनुपम जी खुशहाल बडे,इन्डस्ट्री मे नाम अमर उनका | सूट करे किरदार कोई भी,आवाज बुलंद हुनर उनका | है सिर पर हांथ माँ दुलारी का,आशीष सदा बरसाती है | खट्टी-मीठी सी नोक-झोंक,सबके मन को हर्षाती है | –> क्या…

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  • Geet Kahin Pe Nigahen Kahin Pe Nishana
    गीत

    कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना | Geet Kahin Pe Nigahen Kahin Pe Nishana

    ByAdmin November 18, 2022December 3, 2022

    कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना ( Kahin Pe Nigahen Kahin Pe Nishana )      देखो कभी ये सितम ना ढहाना मेरा दिल हो गया दीवाना। कहां नजरें जरा बता दो कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना। कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना इस दिल में तस्वीर तुम्हारी महकी बगिया सुंदर फुलवारी। लगती कितनी…

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  • Poem abhi dil bhara nahin
    कविताएँ

    अभी दिल भरा नहीं | Poem abhi dil bhara nahin

    ByAdmin November 18, 2022November 18, 2022

    अभी दिल भरा नहीं ( Abhi dil bhara nahin )    अभी दिल भरा नही, अभी मन भरा नही, क्यो जाते हों छोड़ के, अभी कुछ हुआ नहीं।   अभी मन मिले नही, अभी अधर मिले नही, मंजिल अभी दूर है, सच्चे साथी मिले नही।   दिल के फूल खिले नही, मन के मैल धुले…

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  • Jansankhya niyantran par kavita
    कविताएँ

    जनसंख्या नियंत्रण | Jansankhya niyantran par kavita

    ByAdmin November 18, 2022

     जनसंख्या नियंत्रण ( Jansankhya niyantran )    आज हमारा यह भारत देश है स्वतन्त्र, लेकिन हाॅं रखना जनसंख्या नियंत्रण। रखना है सभी को यें एक ही मूलमन्त्र, जनसंख्या वृद्धि रोके यें देना निमंत्रण।।   बढ़ रहा है शोर घटाऍं छा रहीं घनघोर, ठीक न होगा नयी पीढ़ी के लिए दोर। बचना व बचाना‌ अपनें हिन्दुस्तान…

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  • यह इश्क है गर तो ऐसी | Ye ishq shayari
    शेरो-शायरी

    यह इश्क है गर तो ऐसी | Ye ishq shayari

    ByAdmin November 18, 2022November 18, 2022

    यह इश्क है गर तो ऐसी ( Yeh ishq hai gar to aisi )  #lustorlove #Psycho #shameful #sad   यह इश्क है ‘गर तो ऐसी , मौला, आशिकी किसी को न दे जिस्मों से ही खेलना हो, ‘गर तो नाम मोहब्बत का ना दे…   टुकड़े किए सौ जिस्म के ,गोया था खिलौना कोई बेजान…

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  • Poem log sochte hain
    कविताएँ

    लोग सोचते हैं | Poem log sochte hain

    ByAdmin November 18, 2022November 18, 2022

    लोग सोचते हैं ( Log sochte hain )    मगरूर हो रहा हूं बेशऊर हो रहा हूं जैसे जैसे मैं मशहूर हो रहा हूं, लोग सोचते हैं।   वक्त ने सिखा दी परख इंसान की मैं अपनों से दूर हो रहा हूं, लोग सोचते हैं।   दूर हो रहा हूं मगरूर हो रहा हूं मै…

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  • Roohi qadri kavita
    कविताएँ

    आश्चर्य नहीं होता | Roohi Quadri Kavita

    ByAdmin November 18, 2022November 18, 2022

    ” आश्चर्य नहीं होता “ ( Ashcharya nahi hota )   “आश्चर्य नहीं होता” आश्चर्य नहीं होता…. जब देखती हूं तुम्हें असहज परिस्थितियों में भी सहजता से मुस्कुराते हुए। हार -जीत के मन्थन से परे, परिवार के सुख के लिए अपने सपनों को गंवाते हुए। आश्चर्य नहीं होता….. जब तुम रखती हो अपनी अभिलाषाओं की…

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  • Bhartiya sena par kavita
    कविताएँ

    भारतीय सेना का सिपाही हूं | Bhartiya sena par kavita

    ByAdmin November 18, 2022

    भारतीय सेना का सिपाही हूं ( Bhartiya sena ka sipahi hoon )    तन से भले ही काला हूॅं लेकिन मन का मैं सच्चा हूॅं, भारत का नागरिक व भारतीय सेना का सिपाही हूॅं। नहीं हिन्दू हूॅं न मुस्लिम हूॅं नहीं सिख न ही ईसाई हूॅं, एक हाथ यह तिरंगा और दूसरे में बन्दूक रखता…

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  • Mobile par kavita
    कविताएँ

    ये मोबाइल मित्र भी शत्रु भी | Mobile par Kavita

    ByAdmin November 17, 2022September 21, 2024

    ये मोबाइल मित्र भी शत्रु भी ( Ye mobile mitra bhi shatru bhi )  ये मोबाईल हमारा है मित्र भी एवं यह है शत्रु भी, बहुत इसके फ़ायदे है और बहुत है नुकसान भी। रखता इसको अमीर भी रखता है सब ग़रीब भी, इसी से होता है वहम फिर भी यही है अहम भी।। मिलता…

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  • Shakki patni par kavita
    कविताएँ

    एक शक्की पत्नी | Shakki patni par kavita

    ByAdmin November 17, 2022

    एक शक्की पत्नी ( Ek shakki patni )    एक शक्की पत्नि अपने पति पर शक करने लगी, मन ही मन में उसके बारे में नई नई कहानी गढ़ने लगी। मेरा पति शाम को ऑफिस से देर से क्यों आता है ? शायद किसी लड़की के साथ गुलछर्रे उड़ाता है। छुट्टी के दिन भी क्यो…

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