• ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए

    ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए ।आपका बस हमें आसरा चाहिए ।। हार कर भी हमें सोचना चाहिए ।उसकी वाजिब सबब ढूँढ़ना चाहिए ।। जाँ रहा हूँ मिलूँगा तुझे भी सनम ।देखना पर तुम्हें रास्ता चाहिए ।। दो विदाई मुझे आज मुस्कान से ।फिर मिलूँ मैं तुम्हें तो दुआ…

  • वीरों की कहानी , भारत माँ कि जुबानी

    वीरों की कहानी , भारत माँ कि जुबानी खून टपकती बून्दो को तुम गिन्ती उन बून्दो की छोड़ो ,याद करो शहीदों को और भारत माँ की जय बोलो।। सूरज की किरणों में बसी एक कहानी,शहीदों का बलिदान सुनो आज भारत माँ की जुबानी।। गांधी जी की अहिंसा से जगे जन-गण-मन,लड़े बड़े जोश से हर दिल…

  • स्तवन | Stavan

    स्तवन *सरस्वती शारद ब्रम्हाणी!जय-जय वीणा पाणी!!*अमल-धवल शुचि,विमल सनातन मैया!बुद्धि-ज्ञान-विज्ञानप्रदायिनी छैंया।तिमिरहारिणी,भयनिवारिणी सुखदा,नाद-ताल, गति-यतिखेलें तव कैंया।अनहद सुनवाई दो कल्याणी!जय-जय वीणापाणी!!*स्वर, व्यंजन, गण,शब्द-शक्तियां अनुपम।वार्णिक-मात्रिक छंदअनगिनत उत्तम।अलंकार, रस, भाव,बिंब तव चारण।उक्ति-कहावत, रीति-नीति शुभ परचम।कर्मठ विराजित करते प्राणीजय-जय वीणापाणी!!*कीर्ति-गान कर,कलरव धन्य हुआ है।यश गुंजाता गीत,अनन्य हुआ है।कल-कल नाद प्रार्थना,अगणित रूपा,सनन-सनन-सन वंदनपवन बहा है।हिंदी हो भावी जगवाणीजय-जय वीणापाणी!! संजीव सलिल यह…

  • अपने सजन पर रहे

    अपने सजन पर रहे बोझ बाक़ी न इतना भी मन पर रहेकुछ भरोसा तो अपने सजन पर रहे राहे- मंज़िल थी काँटो भरी इस कदरदाग़ कितने दिनों तक बदन पर रहे आज जी भर के साक़ी पिला दे हमेंमुद्दतों से ही हम आचमन पर रहे कह रहे हैं ग़ज़ल हम तो अपनी मगरवोही छाये हमारी…

  • देश अब तुम्हें पुकारे

    देश अब तुम्हें पुकारे वापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारेदेखो हाल इस धरती काजो तुम कर गए हमारे हवालेवापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारे भूल गए सब तुम्हारी कुर्बानीलहू तुम्हारा बहा कटे हाथ और पैरमां बहन पत्नी और बेटीरोती थी तब घर में अकेलीवापस आओ देश के लालोदेश अब तुम्हें पुकारे…

  • हिन्दी तो है, बन्दूक की गोली

    हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली करती प्रहार मार कर बोली,हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली। तुम मुझे खून दो,मैं तुम्हें आजादी दूँगासुभाष ने देश में, खड़ी कर ली टोलीकरती प्रहार मार कर बोली,हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली। अंग्रेजो तुम भारत छोड़ोगांधी ने ललकार है जब मारीकरती प्रहार मार कर बोली,हिन्दी तो है,बन्दूक की गोली। जय जवान,जय…

  • तुम वर्तमान

    तुम वर्तमान तुम वर्तमान के पृष्ठों पर ,पढ़ लो जीवन का समाचार ।क्या पता कौन से द्वारे से ,आ जाये घर में अंधकार।। आशा की किरणें लौट गयीं ,बैठी हैं रूठी इच्छायेंप्रात: से आकर पसर गईं ,आँगन में कितनी संध्यायेंइन हानि लाभ की ऋतुओं में, तुम रहो सदा ही होशियार ।।तुम वर्तमान—– चल पड़ो श्रमिक…

  • हमको कभी

    हमको कभी हमको कभी ख़ुशियों का भी मंज़र नहीं मिलतादिल को मिले सुकूँ वो मुकद्दर नहीं मिलता शिद्दत से जो चाहे वही दिलबर नहीं मिलताजो ज़ख़्म मेरे सी दे रफ़ूगर नहीं मिलता रहने को ग़रीबों को कभी घर नहीं मिलतादे दे उन्हें जो छाँव वो छप्पर नहीं मिलता जो राह दिखाते थे सदा ज़ीस्त में…

  • बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष

    बच्छराज काकासा के हीरक जयन्ती वर्ष नई भोर नव ऊर्जा आनंदनव प्रभात के हम अभिलाषी है।सूरज की पहली किरण संग ! काकासाउजास ! आरोग्य !आनंद और विकास !हो वर्धमान ,रहे प्रकाशमान ! काकासाआपके जीवन के हर पल में संग !बच्छराज काकासा का20 जनवरी को जबजन्मदिन आता है तोहमको यह बात बताता है किहम सदैव फूलों…

  • एक बूढ़ा और बच्चा – “हाथों का सहारा”

    भाग एक – गांव के छोर पर स्थित एक पुराना घर, जहां बूढ़े दादा जी अपने प्यारे पोते के साथ रहते थे। उम्र के प्रभाव से दादा जी की याददाश्त कमजोर हो चुकी थी और शरीर भी थकान से झुकने लगा था। कभी खाना गिरा देते, तो कभी हाथ कांपते हुए पानी छलका देते। इन…