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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • आओ रोएँ
    कविताएँ

    आओ रोएँ

    ByAdmin January 29, 2025January 29, 2025

    आओ रोएँ ०जिसको खोया उसे याद कर बिलखें कलपें नयन भिगोएँआओ रोएँ०जो न खो गए उनको भूलेंखुशी दफ़्न कर, मातम वर लेंनंदन वन की जमीं बेचकरझट मसान में बसने घर लेंसुख-सपनों में आग लगाकरदुख-दर्दों के बीजे बोएँआओ रोएँ०पक्ष-विपक्ष नयन बन जाएँभूले से मत हाथ बँटाएँसाथ न चलकर टाँग अड़ाएँफूटी आँख न साथी भाएँनहीं चैन से…

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  • उसका मज़ा ले
    ग़ज़ल

    उसका मज़ा ले

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    उसका मज़ा ले गुलों सी ज़िन्दगी अपनी खिला लेजो हासिल हो रहा उसका मज़ा ले मुहब्बत हो गई है तुझको मुझसेनिगाहें लाख तू अपनी चुरा ले खरा उतरूंगा मैं हर बार यूँहींतू जितना चाहे मुझको आज़मा ले लुटा दूँगा मैं चाहत का समुंदरकिसी दिन चाय पर मुझको बुला ले घटा छाती नहीं उल्फ़त की हर…

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  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ काव्य अनुष्ठान
    साहित्यिक गतिविधि

    शब्दाक्षर राजस्थान के तत्वावधान में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ काव्य अनुष्ठान

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान के तत्वावधान में गायत्री मंदिर परिसर में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्दाक्षर राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष प्रसि़द्ध वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की। मुख्य अतिथि सह प्रांतपाल रामावतार सबलानिया थे। विशिष्ट अथिति डाॅ कैलाश शर्मा सीताराम वर्मा सीताराम…

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  • मिरे पास ग़म के तराने बहुत है
    ग़ज़ल

    मिरे पास ग़म के तराने बहुत है

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    मिरे पास ग़म के तराने बहुत है गुल-ए-दर्द के से ख़ज़ाने बहुत हैं।मिरे पास ग़म के तराने बहुत है। न हो पाएगा तुम से इनका मुदावा।मिरे ज़ख़्मे-ख़न्दां पुराने बहुत हैं। जो आना है तो आ ही जाओगे वरना।न आने के दिलबर बहाने बहुत हैं। कहां तक छुपाऊं में चेहरे को अपने।तिरे शहर में जाम-ख़ाने बहुत…

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  • वो मजदूर है
    कविताएँ

    भारत की वर्तमान दुर्दशा

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    भारत की वर्तमान दुर्दशा बेरोज़गारी के अंधकार में,भटक रहे हैं युवा इस द्वार में।सपने सब कागज़ हो गए,संघर्ष के पल और गहरे हो गए। महंगाई की आग बढ़ी,हर घर की थाली सूनी पड़ी।रोटी के लिए मेहनत हार गई,सुकून की नींद अब दूर हो गई। नेताओं का गिरता स्तर,वादे बनते जुमलों का सफर।चुनावी भाषण झूठे निकले,जनता…

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  • सकूँ
    कहानियां

    सकूँ

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    विभु एक 15 वर्षीय लड़का था, जो अपने परिवार के साथ एक छोटे से शहर में रहता था। वह एक अच्छा लड़का था, जो हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। एक दिन, विभु ने अपने पिता से कहा कि वह नदी के किनारे घूमने जाना चाहता है। उसके पिता ने उसे…

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  • एक खूंखार खूनी बन गया जेल का रसोईया
    कहानियां

    एक खूंखार खूनी बन गया जेल का रसोईया

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    वह खूनी भागना चाहता था खून करके किसी व्यक्ति का लेकिन वह पुलिस कि पकड़ में आ गया और उसे गिरफ्तार कर उम्र कैद कि सजा सुनाई गई… कारण जो भी हो हमारी मानसिकता एक खूनी को कभी अच्छे विचारों के साथ स्वीकार नहीं कर सकती बल्कि करेगी ही नहीं ,एक चोर ,एक डकैती, एक…

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  • छुपा कर रक्खें
    ग़ज़ल

    छुपा कर रक्खें

    ByAdmin January 28, 2025January 28, 2025

    छुपा कर रक्खें हो न जाए कहीं रुसवाई छुपा कर रक्खेंइन अमीरों से शनासाई छुपा कर रक्खें फ़ायदा कुछ नहीं चतुराई छुपा कर रक्खेंमूर्ख के सामने दानाई छुपा कर रक्खें कौन करता है यक़ीं आपकी इन बातों परइसलिए अपनी ये सच्चाई छुपा कर रक्खें लालची कोई भ्रमर इसको चुरा ले न कहींफूल कलियाँ सभी अँगड़ाई…

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  • शुभम साहित्य संस्था का भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह: शायर विनय साग़र जायसवाल की गरिमामयी अध्यक्षता
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम साहित्य संस्था का भव्य कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह: शायर विनय साग़र जायसवाल की गरिमामयी अध्यक्षता

    ByAdmin January 27, 2025January 27, 2025

    बरेली में शुभम साहित्य एवं सामाजिक संस्था द्वारा एक भव्य कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम खुशहाली सभागार में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर विनय साग़र जायसवाल ने की। मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि रणधीर प्रसाद गौड़ “धीर” रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि हिमांशु श्रोतिए…

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  • सब अदा हो गये
    ग़ज़ल

    सब अदा हो गये

    ByAdmin January 27, 2025January 27, 2025

    सब अदा हो गये प्यार के वादे जब सब अदा हो गयेसारे शिकवे गिले ख़ुद हवा हो गये इस इनायत पे मैं क्यों न क़ुर्बान हूँएक पल में वो ग़म आशना हो गये उनकी क़ुर्बत से आता है दिल को सुकूंँदर्द- ओ- ग़म की वही अब दवा हो गये दिल के मुंसिफ का हर फ़ैसला…

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