• राष्ट्रीय बालिका दिवस एवं महिला सशक्तिकरण संगोष्ठी

    24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस के शुभ अवसर पर जिलाधिकारी डॉक्टर मोनिका को मुख्य अतिथि के तौर पर “बालिका शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण संगोष्ठी” कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। यह कार्यक्रम जिले के उच्च प्रतिष्ठित पदों पर तैनात महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से कराया जा रहा था। इस कार्यक्रम में प्रत्येक विभाग की दो-दो…

  • खोज

    खोज सुख की खोज में आदमी देखो, कैसे दुख के पीछे दौड़ रहा है!घर है मगर वातानुकूलित नहीं है वह उसकी तृष्णा में चकरा रहाहै, मोटर है लेकिन सामान्य वह,‘लिमोजिन’ चढ़ने के लिए छटपटा रहा है सुख की खोज में लगने के बाद आदमी, आदमी कहाँ रह जाता है? देखते-देखते ही नदी की कलकल और,…

  • बिठा तब है मज़ा

    बिठा तब है मज़ा पास मुझको तू बिठा तब है मज़ाजाम आँखों से पिला तब है मज़ा प्यार करता है मुझे तू किस तरहबात यह खुलकर बता तब है मज़ा बज़्म में आते ही छा जाता है तूयह हुनर मुझको सिखा तब है मज़ा डस रहीं हैं मुझको यह तन्हाइयांइनसे तू आकर बचा तब है…

  • 161 वाँ मर्यादा महोत्सव

    तेरापंथ धर्मसंघ का महोत्सव मर्यादा महोत्सव हैं । यह समूचे विशव में एकमात्र ऐसा अद्भुत उत्सव हैं । यह हमारे मर्यादा महोत्सव की एक निष्पति याद दिलाना है कि जिन्दगी के हर कदम पर मर्यादाओं का ख्याल रखना जरूरी है ।कभी मर्यादाओं का उल्लंघन कर कदम नहीं रखना हैं । मर्यादाएं जिन्दगी का बंधन नहीं…

  • रवीन्द्र कुमार रौशन “रवीन्द्रोम “ की कविताएं | Ravindra Kumar Poetry

    मैं बिहार हूं दुनिया का पहला गणराज्यमुझे ही माना जाता है ,एशिया का पहला श्रेष्ठ शिक्षा केंद्रनालंदा ही कहलाता है । धर्म , साधना के लिएदुनिया को बुद्ध , जैन दिए ,भौतिक ज्ञान से निकालकरअध्यात्म का सबको नैन दिए । राजनीति सिखाने वालेचाणक्य ज्ञानवान दिए ,राम कथा लिखने वालेबाल्मीकि महान दिए । जोड़ , घटाव…

  • ताजदार करना है

    ताजदार करना है वफ़ा की राह को यूँ ख़ुशग़वार करना हैज़माने भर में तुझे ताजदार करना है भरम भी प्यार का दिल में शुमार करना हैसफ़ेद झूठ पे यूँ ऐतबार करना है बदल बदल के वो यूँ पैरहन निकलते हैंकिसी तरह से हमारा शिकार करना है ये बार बार न करिये भी बात जाने कीअभी…

  • अय्याशी

    अपने छोटे से कमरे के कोने में रखे लकड़ी के टेबल के ऊपर अभी हाल में मिले हुए द्वितीय विजेता सर्टिफिकेट और मोमेंटो देख कर राधिका देवी दीवान में लेटी लेटी मुस्कुराने लगी । आवाज कानों में गुंजने लगे जब माइक से मंच पर विजेता का नाम में राधिका देवी पुकारा गया था । फिर…

  • नयी रोशनी

    नयी रोशनी अंधेरों की बाहों से छूटकर आई है,एक उम्मीद की किरन जो जगमगाई है।थमी थी जो राहें, अब चल पड़ी हैं,दिलों में नयी रोशनी जो घर बसाई है। खामोशियों की परतें अब पिघलने लगीं,अधूरी सी कहानियां अब संवरने लगीं।हर कोना जो सूना था, वो चमक गया,नयी सुबह की आहट दिल को छूने लगी। दिकु,…

  • उड़ान | Udaan

    उड़ान पक्षी अपने गीत के बदले तोड़ लेता है धान की दो बालियाँ लौट जाता है आसमान के घने घोंसले में अनपहुँच अन्वेषा की आँखें क्षितिज के विराग को छूकर लौट आती हैं फिर से अपने अभीष्ट के अन्तिम आश्रय में डैने सन्तुलित करते हैं दूर से दूर खिसकती नीलिमा की उदार सान्द्रता और फिर…

  • तुम उस शर्वरी पढ़ते

    तुम उस शर्वरी पढ़ते खत मेरा अंततः तक,काश ! तुम उस शर्वरी पढ़ते,प्रेम का एक नव रूप,काश ! तुम विभावरी गढ़ते।तुम अगर पढ़ते तो शायद,फैसले आज कुछ और होते,देह से भले विलग रहते,किन्तु ह्रदय से एक रहते।प्रिय ! निर्णय तुम्हारा सहजरूपी,निर्मित ताज होता,शीश मैं झुकाती,पूर्ण सब अभिषेक होते।सोपान उस दिन प्रणय का,काश ! तुम दो…