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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Manavata hanan par kavita
    कविताएँ

    मानवता हनन | Manavata hanan par kavita

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    मानवता हनन ( Manavata hanan )    हे प्रभु इस धरती पर नर को दानवता क्यों भाती है। ईर्ष्या द्वेष नफरते हावी सारी मानवता खा जाती है।   लालच लोभ स्वार्थ में नर इंसानियत क्यों भूल गया। मतलब कि इस दुनिया में क्यों मझधार में झूल गया।   लूट खसोट भ्रष्टाचार की नर राहें क्यों…

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  • Vidyarthi par kavita
    कविताएँ

    विद्यार्थी | Vidyarthi par kavita

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    विद्यार्थी ( Vidyarthi )    एक यही होती विद्यार्थियों की पहचान, मंजिल को पाना और बनना है महान। एक जैसी युनिफॉर्म ये जूतें एवं जुराब, अध्यापकों का सदैव करतें वे गुणगान।।   पढ़ते है जीवनी जैसे यह राम व रहीम, गुरुग्रंथ एवं बाईबल गीता और क़ुरान। ना कोई जानते क्या है जाति क्या धर्म, होते…

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  • Rastogi ke dohe
    कविताएँ

    कलयुगी दोहे | Rastogi ke dohe

    ByAdmin November 8, 2022

    कलयुगी दोहे ( Kalyugi dohe )    झूठ बराबर तप नही,सांच बराबर पाप। जाके हृदय झूठ है,ताके हृदय है आप।।   रिश्वत लेना धर्म है,सच बोलना है पाप। दोनो को अपनाइए,मिट जाएंगे संताप।।   माखन ऐसा लगाईये, बॉस खुश हो जाए। बिना काम के ही,प्रमोशन जल्दी हो जाए।।   गंगा नहाए से पाप धुले,मै सागर…

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  • Poem on nari in Hindi
    कविताएँ

    लाचार नारी | Poem on nari in Hindi

    ByAdmin November 8, 2022

    लाचार नारी ( lachar nari )    एक नारी थी वक्त की मारी थी दुनिया में कोई बेचारी थी। मानवता का स्वांग करने वालों पे फिर भी चोट भारी थी।   लाचार नारी तड़पती रही दर्द से लोग वीडियो बनाते रहे। दरिंदो की दरिंदगी वो वहशीपन का नाना खेल रचाते रहे।   दुनिया की भीड़…

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  • पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ राम आसरे कुशवाहा को हृदयांगन का संरक्षक बनाया गया
    साहित्यिक गतिविधि

    पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ राम आसरे कुशवाहा को हृदयांगन का संरक्षक बनाया गया

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ राम आसरे कुशवाहा को हृदयांगन का संरक्षक बनाया गया   40वीं श्रीमदभागवत कथा के पावन अवसर पर शुक्रवार दिनांक 4 नवंबर 2022 को व्यासपीठ से आचार्य श्रीकृष्ण द्विवेदी महाराज साहित्याचार्य, साहित्यरत्न, श्रीमदभागवत कथा प्रवक्ता ने व्यास पीठ से घोषणा करते हुए प्रोफेसर एवं छह बार कैबिनेट मंत्री रह चुके डा0 राम…

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  • Poem pariyon ki kahani
    शेरो-शायरी

    के सुनाती नानी परियों की कहानी खूब है | Poem pariyon ki kahani

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    के सुनाती नानी परियों की कहानी खूब है ( Ke sunati nani pariyon ki kahani khoob hai )      के सुनाती नानी परियों की कहानी खूब है लाड में यूं हर रात कटती सुहानी खूब है   बेवफ़ा कह दे न मुझको वो कहीं दिल से कभी दोस्ती उससे मगर दिल से निभानी खूब…

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  • Mahadev par kavita
    कविताएँ

    देवों के देव महादेव | Mahadev par kavita

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    देवों के देव महादेव ( Devon ke dev mahadev )     दर्शन तो करके ही जाऐगे चाहे बाधाएँ हो कही, टूटकर बिखरना तो हमने  कभी सीखा ही नही। भोले को पाने के लिए  शोले का रास्ता ही सही, प्रसाद भांग ही मिले बिना दर्शन जाऐगे ही नही।।   लक्ष्य नही मिलता है उनको जो…

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  • Poem aazma kar dekh lena
    कविताएँ

    मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना | Poem aazma kar dekh lena

    ByAdmin November 8, 2022

    मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना ( Mujhko kabhi bhi aazma kar dekh lena )     मुझको कभी भी आज़मा कर देख लेना। हो सके मुझसे दिल लगा कर देख लेना।।   एक पल भी मुझसे दूर नहीं रह पाओगे। कितना भी फासला बना कर देख लेना।।   चाहे लाख नज़रें भी चुराओ…

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  • Guru Nanak dev ji poem in Hindi
    कविताएँ

    गुरु नानक देव | Guru Nanak dev ji poem in Hindi

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    गुरु नानक देव ( Guru Nanak Dev )   सिख धर्म के संस्थापक प्यारे गुरु नानक देव हमारे। प्रकाश पर्व जयंती मनाये गुरु ज्ञान आलोकित तारे।   धर्म सुधारक समाज सुधारक योगी धर्मगुरु कहलाए। दार्शनिक गुण धर मन मानस देशभक्ति राह अपनाए।   वाहे गुरुजी का दरबार सजता गुरुद्वारे गूंजे कीर्तन कर। धर्म की रक्षा…

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  • Poem on kartik purnima
    कविताएँ

    कार्तिक पूर्णिमा का स्नान | Poem on kartik purnima

    ByAdmin November 8, 2022November 8, 2022

    कार्तिक पूर्णिमा का स्नान ( Kartik purnima snan kavita )   पूर्णिमा से शुरु होती यह सर्दियों की रात, अमृत बरसता है इस दिन सब पर खास। चन्द्र और पृथ्वी इस रोज आतें है समीप, राधे व कृष्ण ने इस दिन रचाया था रास।।   इसी उजियाली शरद पूनम वाली रात में, अनेंक रुप बनाऍं…

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