• नशे से हुआ इंसान बर्बाद

    नशे से हुआ इंसान बर्बाद उड़ता युवा नशा मुक्त समाज की ओर बढ़ते कदम,एक सपना है जो सच होने की उम्मीद है।।नशे की जंजीरों से मुक्त होकर,हम एक नए युग की ओर बढ़ सकते हैं। नशा मुक्त समाज में हर कोई होगा स्वस्थ,हर कोई होगा खुशहाल, हर कोई होगा समृद्ध।नशे की लत से मुक्त होकर,हम…

  • रंग दे बसंती चोला

    रंग दे बसंती चोला रंग दे बसंती चोला,मेरे देश की धरती को,रंग दे बसंती चोला। तेरी खुशबू से महके,मेरे देश की हवा को,तेरी खुशबू से महके। तेरे रंग से रंगे,मेरे देश की धरती को,तेरे रंग से रंगे। तेरी खुशियों से खिले,मेरे देश की फसलें को,तेरी खुशियों से खिले। तेरे प्यार से प्यारे,मेरे देश के लोगों…

  • कलाम है क्या

    कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…

  • मौजू सुहाने आ गये

    मौजू सुहाने आ गये वो बहाने से हमें हर दिन बुलाने आ गयेशायरी के वास्ते मौजू सुहाने आ गये इस कदर डूबे हुए हैं वो हमारे प्यार मेंउनकी ग़ज़लों में हमारे ही फ़साने आ गये अनसुनी कर दी जो हमने आज उनकी बात कोहोश इक झटके में ही उनके ठिकाने आ गये उस घड़ी हमको…

  • जरूरी काम

    मेरी बेटी 12 वर्षीय चुनमुन कक्षा 6 में पढ़ती है। उसमें एक गंदी आदत है कि वह एक बार में किसी काम को नहीं सुनती। ऐसा भी नहीं है कि उसे कम सुनाई देता है, बल्कि ऐसा वह जानबूझकर करती है। गुस्सा करो, तो कहती है- “मम्मी, आप इतना क्यों चिल्ला रही हो? मैं आ…

  • तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होते

    तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होते तुम जो ज़ाहिर अगर ज़रा होतेआने वालों का रास्ता होते ग़र दुबारा ये राब्ता होताकुछ न होते तो हमनवा होते ख़ुद को कितना निहारते हैं वोकाश हम यार आइना होते आप हम हैं तभी न सब कुछ हैहम न होते तो क्या ख़ुदा होते रोते रोते यही कहा उसनेख़ैर…

  • मिली जब से मुहब्बत

    मिली जब से मुहब्बत मिली जब से मुहब्बत हम सफ़र की बात करते हैंहुईं पूरी मुरादें , रहगुज़र की बात करते हैं बड़े नादान है अब पूछते दिल में हमारे क्याये दिल हम हार बैठे अब जिगर की बात करते हैं सफ़ीना आज मेरा जब फँसा है इस भँवर में तोकरें हम याद रब को…

  • आदिवासी समाज

    आदिवासी समाज संस्कृतिमें हमारीप्रेम अपार है,प्रेम से ही सुगन्धितसारा संसार आदिवासी समाजने पहलकी प्रकृतिकी, प्रकृतिके बिना खवाबोंका नकोई आकार है…”“समय आने परदिखा देना किआपने क्या किया है मानवता की खातिरजरूरत सेज़्यादा मौनआपके पक्ष कोकमज़ोरसाबित करता है…“जंगल के जीवों सेआपका उचित हैव्यवहारजिससे आपके यश काहोता है विस्तार…”“माटी ने आवाज़दी है साथियों, आजफिर एक रण लड़ा जाएप्रकृति…

  • महाकुंभ

    ग़ज़ल ( महाकुंभ विशेष) आस्था की है लगी डुबकी सदा देखाभक्ति के नव रंग में सबको रँगा देखा कुंभ मेला को इलाहाबाद के पथ परसंत नागा साधुओं से नित भरा देखा भीड़ का उमड़ा हुजूम जयघोष हैं करतेधूल से घुटने पावों तक को सना देखा सूर्य तक उठता नदी जल अंजली में योंआचमन में हाथ…

  • उरी विजय की गूंज

    उरी विजय की गूंज जंगलों में गूंजे थे धमाके,भारत की सेना ने किया था हमला,नियति की दिशा बदल दी थी,सर्जिकल स्ट्राइक का था ऐलान। शेर की तरह ललकारते हुए,हमने दुश्मन को घेरा था,उरी की धरती पर निशान छोड़ा,शौर्य का इतिहास फिर से लिखा था। हमारे दिलों में जज्बा था,आत्मविश्वास से भरे थे हम,किसी भी चुनौती…