डॉ. प्रीतम कुमार झा की कविताएं | Dr. Pritam Kumar Jha Poetry
नज़र नज़र ढूंढती है मेरी उस नज़र को, बनाया है जिसने सभी को दीवाना, सभी काम गड़बड़ हुए कुछ हैं ऐसे, कि दिल सबके गाते उन्हीं का तराना. ये उल्फत, ये चाहत, शरारत, नज़ाकत, सभी हैं भरे कूट कर उनमें ऐसे, ये शोखी, ये आदत, शिकायत, मोहब्बत, समझ में न आये कहूँ किसको कैसे. के…
