उरी विजय की गूंज

उरी विजय की गूंज

उरी विजय की गूंज

जंगलों में गूंजे थे धमाके,
भारत की सेना ने किया था हमला,
नियति की दिशा बदल दी थी,
सर्जिकल स्ट्राइक का था ऐलान।

शेर की तरह ललकारते हुए,
हमने दुश्मन को घेरा था,
उरी की धरती पर निशान छोड़ा,
शौर्य का इतिहास फिर से लिखा था।

हमारे दिलों में जज्बा था,
आत्मविश्वास से भरे थे हम,
किसी भी चुनौती से डरते नहीं,
हमेशा बढ़ते हैं, कभी नहीं थमता।

दुश्मन की नीतियाँ ढह गईं,
भारत की सेना ने दिखाया जलवा,
सर्जिकल स्ट्राइक से खोला रास्ता,
दुनिया ने देखा हमारा रौब।

यह विजय नहीं, एक संदेश था,
हमारी ताकत को समझो,
हम हर मोर्चे पर विजयी होंगे,
भारत की शक्ति को न कभी हल्के में लो।

उरी में जो आग जली थी,
उसका धुआँ आज भी महकता है,
हमारे वीर जवानों का बलिदान,
भारत का विजय फतह आज भी सच्चा है।

अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’
प्रयागराज

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