Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Kavita kaagaz ke putle mat funko
    कविताएँ

    कागज के पुतले मत फूंको | Kavita kaagaz ke putle mat funko

    ByAdmin October 6, 2022October 6, 2022

    कागज के पुतले मत फूंको ( Kaagaz ke putle mat funko )     कागज के पुतले मत फूंको मन का अंधियारा दूर करो। जो दंभ छिपाये बैठे हो वो अंतर्मन अभिमान चूर करो।   लूट खसोट बेईमानी काले कारनामों की भरमार। जालसाजी रिश्वतखोरी अब फैल रहा है भ्रष्टाचार।   अभिमान को नष्ट करो जो…

    Read More कागज के पुतले मत फूंको | Kavita kaagaz ke putle mat funkoContinue

  • Ghazal tere aansu
    शेरो-शायरी

    तेरे आंसू | Ghazal tere aansu

    ByAdmin October 5, 2022

    तेरे आंसू ( Tere Aansu )   दिलो दिमाग में दिन रात रहा करते है। तेरे आंसू मेरी ऑंखों से बहा करते हैं।। टूटने का सबब पत्ते से पूछना न कभी, हिज़्र के दर्द से मकां भी ढहा करते हैं।। बमुश्किल मिलता है पल भर का सुकूं, उम्र भर गम इसी के लिए सहा करते…

    Read More तेरे आंसू | Ghazal tere aansuContinue

  • Kavita aaj bhi hoon
    कविताएँ

    आज भी हूँ | Kavita aaj bhi hoon

    ByAdmin October 5, 2022October 5, 2022

    आज भी हूँ ( Aaj bhi hoon )   मैं मर चुका हूं ये कौन कह रहा है, मैं कल भी कालजयी था आज भी हूं l मेरा जीवन हर कल में स्थिर रहा है , मैं कल भी था असुराधिपति आज भी हूँll   रावण है जब तक इस जग में , राम तेरा…

    Read More आज भी हूँ | Kavita aaj bhi hoonContinue

  • Zakhm shayari
    शेरो-शायरी

    अपनों ने ज़ख्मों को रोज कुरेदे है | Zakhm shayari

    ByAdmin October 5, 2022October 5, 2022

    अपनों ने ज़ख्मों को रोज कुरेदे है ( Apno ne zakhmon ko roj kurede hai )     किसने दामन के  ग़म दर्द समेटे है ! अपनों ने ज़ख्मों को रोज कुरेदे है   कैसे ख़ुशबू फैले फ़िर ये उल्फ़त की रूठे फूलों से क्यों  यार  बगीचे है   सबने  ज़ख्मों पर रगड़ा रोज नमक…

    Read More अपनों ने ज़ख्मों को रोज कुरेदे है | Zakhm shayariContinue

  • Kavita lakshman moorchhit
    कविताएँ

    लक्ष्मण मूर्छित | Kavita lakshman moorchhit

    ByAdmin October 4, 2022

    लक्ष्मण मूर्छित ( lakshman moorchhit )   मेघ समान गर्जना करता हुआ मेघनाथ जब आया। अफरा-तफरी मची कटक में रचता मायावी माया। आया इंद्रजीत रणयोद्धा बाणों पर बाण चले भारी। नागपाश बंधे राम लखन भयभीत हुई सेना सारी। देवलोक से आए नारद जी गरूड़ राज को बुलवाओ। रघुनंदन नागपाश बंधन को प्यारे रामभक्त हटवाओ। महासमर…

    Read More लक्ष्मण मूर्छित | Kavita lakshman moorchhitContinue

  • Kar muhabbat ka yahan chaya khuda
    शेरो-शायरी

    कर मुहब्बत का यहाँ छाया ख़ुदा | Kar muhabbat ka yahan chaya khuda

    ByAdmin October 4, 2022October 4, 2022

    कर मुहब्बत का यहाँ छाया ख़ुदा ( Kar muhabbat ka yahan chaya khuda )     मैं पढ़ूं कलमा करुं सज़दा ख़ुदा! जीस्त  भर  हो ऐसा लम्हा ख़ुदा   नफ़रतों की धूप ढ़ल जाये यहाँ कर मुहब्बत का यहाँ छाया ख़ुदा   जिंदगी में दोस्त कोई भेज दें हूँ बड़ा ही जीस्त में तन्हा ख़ुदा…

    Read More कर मुहब्बत का यहाँ छाया ख़ुदा | Kar muhabbat ka yahan chaya khudaContinue

  • Lanka Dahan Par Kavita
    कविताएँ

    लंका दहन | Lanka Dahan Par Kavita

    ByAdmin October 3, 2022

    लंका दहन ( Lanka Dahan )   जामवंत ने याद दिलाया हनुमत सब बल बुद्धि समाया। सौ योजन सिंधु कर पारा रामभक्त है बजरंग अवतारा।   सीता माता की सुधि लेने जब हनुमान जी धाये। लंका में जा अशोक वाटिका मां सीता दर्शन पाए।   मुद्रिका डाली सन्मुख सिया राम नाम गुण गाए। विस्मित माता…

    Read More लंका दहन | Lanka Dahan Par KavitaContinue

  • lakshman murcha shakti baan
    नाटक

    लक्ष्मण मूर्छा शक्ति बाण | lakshman murcha shakti baan

    ByAdmin October 3, 2022

    लक्ष्मण मूर्छा शक्ति बाण ( lakshman murcha shakti baan ) आलेख   रावण का पुत्र मेघनाथ जिसमें इन्द्र तक को जीत लिया था। वह इंद्रजीत कहलाता था। उसकी पत्नी सुलोचना एक पतिव्रता नारी थी। सतीत्व के बल के कारण उसने तपस्या करके अनेक अमोध शक्तियां प्राप्त कर ली थी। रामादल में मेघनाथ युद्ध करने आया…

    Read More लक्ष्मण मूर्छा शक्ति बाण | lakshman murcha shakti baanContinue

  • Kavita maa ko shish navate hain
    कविताएँ

    मां को शीश नवाते हैं | Kavita maa ko shish navate hain

    ByAdmin October 3, 2022October 3, 2022

    मां को शीश नवाते हैं ( Maa ko shish navate hain )   जिस मिट्टी की मूरति को, गढ़ गढ़ हमी बनाते हैं   शाम सुबह भूखे प्यासे, उसको शीश झुकाते हैं   सजा धजा कर खुद सुंदर, मां का रूप बताते हैं   बिन देखे ही बिन जाने, नौ नौ रूप दिखाते है  …

    Read More मां को शीश नवाते हैं | Kavita maa ko shish navate hainContinue

  • Kavita Jyot Jale Maa
    कविताएँ

    जोत जले मां | Kavita Jyot Jale Maa

    ByAdmin October 3, 2022

    जोत जले मां ( Jyot Jale Maa )   सजा दरबार निराला जोत जले मां अंबे ज्वाला। सबके दुखड़े हरने वाली कर सोहे मां चक्र भाला। कालरात्रि तू महागौरी तू कुष्मांडा चामुंडा माता। ढाल खड्ग खप्पर वाली तू ही मां भाग्यविधाता। तू ही काली तू महाकाली रणचंडी दुर्गा मतवाली। दानव दलनी मां जगदंबे यश वैभव…

    Read More जोत जले मां | Kavita Jyot Jale MaaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 562 563 564 565 566 … 834 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search