• एकता का प्रतीक

    एकता का प्रतीक एकता का प्रतीक मकर संक्रान्तिजिन्हें जानकर दूर होगी भ्रांतिसभी जाति ,संप्रदाय, पंथ वालोंमिलकर रहो बनी रहेगी शांति । तिल है कालाचावल है उजलाशक्कर है गेरूआमूंग है हरासभी है एक रस में घुला । चावल , दाल मसाले मिलकरसबने एक खिचड़ी बनाईयह पर्व मानव को सौंपकरऋषि, मनि एक बात सिखाई । भले हमारा…

  • मेरे दिल की बस्ती

    मेरे दिल की बस्ती मेरे दिल की बस्ती क्यों इतनी है सस्तीन कोई हलचल न कोई मस्तीलोग आकर चले जाते हैंनहीं रुकती कोई हस्ती।। मैं भी सोचता हूं कोई आकर गुलज़ार करेंथोड़ा रुक कर यहां इंतजार करेंकुछ बहार लाए जिन्दगी मेंहमसे भी कोई प्यार करें।। जिंदगी का मेरे कोई थोड़ा किनारा बनेसाथ साथ चलने का…

  • स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरक वाक्यों से होगा पथ निर्माण: ऋतु गर्ग

    रविवार 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर भारत माता अभिनंदन संगठन सिलीगुड़ी शाखा पश्चिम बंगाल इकाई द्वारा कार्यालय में पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें संगठन के पदाधिकारी सदस्य सहित सभी युवाओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। संगठन की राष्ट्रीय प्रभारी श्रीमती ऋतु गर्ग द्वारा दीप प्रज्वलित कर स्वामी जी को पुष्प…

  • मकर संक्रांति (खिचड़ी)

    मकर संक्रांति (खिचड़ी) भगवान विष्णु ने असुरों पर विजय प्राप्त किया था,भगवान सूर्य इस दिन धनु से मकर में प्रवेश किया था।इस दिन पवित्र नदियों में लोग स्नान कर दान करते हैं,भागीरथी संग गंगा ने कपिल आश्रम में प्रवेश किया था।। प्रयाग में स्नान करने से पापों से छुटकारा मिलता हैं,गंगासागर में स्नान को महास्नान…

  • घी दही संग खिचड़ी खाए

    घी दही संग खिचड़ी खाए विष्णु ने काटा असुर सिर,सिर गाड़ दिया मंदराचल परजीत सभी संक्रान्ति पर्व मनाये,रवि उत्तरार्द्ध होकर मकर जाए । चीनी की पट्टी, गुड़ का डुन्डा,तिल का लड्डू मन को भाये।कुरई में रखकर लाई चूरा,घी दही संग खिचड़ी खाये। राज्यों में अनेक नाम प्रसिद्ध,कहीं खिंचड़ी कहीं लोहड़ी तो,कही पोंगल माघी, उत्तरायण,देशवासी मकर…

  • पानी पानी हर तरफ़

    पानी पानी हर तरफ़ दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़ बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिएबज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़ तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गयाकर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने…

  • ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम

    ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम ( पूर्णिका ) ग़ुज़र रहा फूलों का मौसम चर्चा फिर भी फूल की।इसी बात पर और कंटीली काया हुई बबूल की। जुड़ने वाले हाथ कटे हैं झुकने वाला सिर गिरवीऐसा लगता है मैंने मंदिर में आकर भूल की। रोज़ खुली रामायण पढ़ते पढ़ते जाते छोड़ पिताबड़े प्रेम से हवा बिछा…

  • लोहड़ी आई रे

    लोहड़ी आई रे लोहड़ी आईसभी जनों बधाईहर्ष उल्लास गाना बजानाखान पान संग होपंजाबी गीत। खूब जलेगीफुले रेवड़ी अग्नि मेंअर्पित होंगे। नाचेंगे सारेमहफिल सजेगीआग के बीच। मुबारक होनव जोड़ो लोहड़ीकी सौगात हो। खुशियों डेराजात पात का भेदमिटाना आज। लोहड़ी आईसुंदरी मुंदरी केगीत गायेगे। लता सेन इंदौर ( मध्य प्रदेश ) यह भी पढ़ें :-

  • प्यार में मुझको हद से गुज़र जाने दो

    प्यार में मुझको हद से गुज़र जाने दो प्यार में मुझको हद से गुज़र जाने दो ।आज मन की मुझे अपने कर जाने दो मुझको खुशियाँ दो या अश्क भरपूर दो,ये कटोरा किसी से तो भर जाने दो॥ मुझसे वादा ख़िलाफ़ी न हो पाएगी ,वो मुकरता अगर है  मुकर जाने दो॥ मैं तरफ़दारी ज़ालिम की…

  • आधी शताब्दी की मदहोशी.. मैं ना भूलूंगा.. मैं ना भूलूंगी

    मैं ना भूलूंगा.. मैं ना भूलूंगी.. इन रस्मो को.. इन कसमो को.. इन रिश्ते नातो को.. मैं ना भूलूंगा.. मैं ना भूलूंगी.. ह्दय की अथाह गहराइयों से निकला यह गीत शायद ही कोई ऐसा होंगा जिस ने की ना सुना होंगा.. ना गाया होंगा। मुझे तो यह गीत तब से पसंद है तब जबकि इस…