• सुकून की जिंदगी | Chhand sukoon ki zindagi

    सुकून की जिंदगी ( Sukoon ki zindagi ) मनहरण घनाक्षरी   दो घड़ी पल सुहाने, सुकून से जीना जरा। गमों का भी दौरा आये, हंस हंस पीजिए।   सुख से जियो जिंदगी, चैन आए जीवन में। राहत भरी सांस ले, खूब मजा लीजिए।   भागदौड़ सब छोड़, होठों से मुस्कुराइये। सुकून की सांस मिले, जियो…

  • मानव धर्म | Ek laghu katha

    हर हर गंगे जय राधे कृष्ण आदि उच्चारणों के सत्तो मौसी हमेशा ही सब सुगह मन्दिर जाती उनकी पूजा टोकरी हमेशा ही सामग्री से भरी रहती वह अपनी पूजा की टोकरी का ध्यान से ज्यादा रखती कोई उनकी टोकरी के पास से भी जाये यह उन्हें मन्जूर नहीं था। खासकर वह छोटी वालो से हमेशा…

  • बेखबर जिंदगी | Kavita bekhabar zindagi

    बेखबर जिंदगी ( Bekhabar zindagi )   आंधी तूफां तम छाया है ईश्वर की कैसी माया है जाने क्या है होने वाला कैसा यह दौर आया है   धुआं धुआं हुई जिंदगी काले घने मेंघ छाए हैं रस्ता भूल रहा कोई बादल संकट के मंडराये हैं   मुश्किलों का दोर कठिन दिनोंदिन गहराता आया खुद…

  • चंद्रघंटा | Kavita chandraghanta

    चंद्रघंटा ( Chandraghanta )   नवशक्ति नव दुर्गा मां, चंद्रघंटा मस्तक सोहे। अभयदान देने वाली, चंद्र रूप अति सुंदर मोहे।   दस भुजधारी सिंह सवारी, दुष्टों का संहार करे। सबके संकट हरने वाली, काज सारे सिद्ध करें।   बुद्धि दात्री वैभव दाता, उर आनंद मोद भरे। शक्तिस्वरूपा मात भवानी, साधक रणविजय धरे।   चमका दे…

  • कठपुतली | Kavita kathputli

    कठपुतली ( Kathputli)   ताल तलैया भरे हुए है, भरे है नयन हमार। आए ना क्यों प्रेम पथिक, लगता है भूले द्वार।   उमड घुमड़ कर मेघ घिरे है, डर लागे मोहे हाय। बरखा जल की बूंदें तन मे, प्रीत का आग लगाय।   बार बार करवट लेती हूँ,मन हर पल घबराये। आ जाओ इस…

  • बीज नियत करता है | Ghazal

    बीज नियत करता है  ( Beej niyat karta hai )     बीज नियत करता है जैसे, वृक्ष स्वभावऔर विस्तार! विगत कर्म निश्चय करते हैं वर्तमान जीवन आधार !   जिसका गत में सत्कर्मों का,अपना लेखा उचित रहा वह पा लेता अनायास ही,सुख सुविधाओं के आगार !   उसे जन्म से ही मिल जाते,सुख यश…

  • चामुण्डा बरस पड़ी | Hasya kavita

    चामुण्डा बरस पड़ी ( Hasya kavita )   बहुत बड़ा कवि नहीं हूं मामूली कलमकार हूं अंगारों की सड़क पर बहती ठंडी बयार हूं   कविता करते-करते श्रीमती ने मुझे रोका अनजाने में बिफरकर बार बार मुझे टोका   कविता में बाधा देख कर मुझे गुस्सा आ गया मैं श्रीमती को एक जोरदार तमाचा लगा…

  • हद कर दी आपने | Geet had kar di aapne

    हद कर दी आपने ( Had kar di aapne )   वादे प्रलोभन भारी, नित्य नियम बदले सरकारी। नेताओं की लीला न्यारी, चमचे आला अधिकारी। हद कर दी आपने, हद कर दी आपने।   सड़क पुल नदियां निगले, निगल रहे हैं वोट। फन फैलाए विषधर बैठे, करते विषैली चोट। सत्ता के गलियारों में, मिल जाएंगे…

  • हिन्दू राष्ट्र | Kavita Hindu Rashtra

    हिन्दू राष्ट्र ( Hindu rashtra )   इसे राम मन्दिर का ना बस निर्माण समझो, यह स्वर सनातन सत्य का आधार है।   हम हिन्दू है आर्यो के वशंज भारतीय, भय हीन हिन्दू राष्ट्र का निर्माण है।   फिर से समागम होगा इस खण्डित धरा का, यह शेर के विश्वास की हुंकार है।   भगवा…

  • सनातन नववर्ष | Poem sanatan nav varsh

    सनातन नववर्ष ( Sanatan nav varsh )   हर हर महादेव गूंजे सब रामनाम जय कार करे। श्रद्धा  और विश्वास  भरकर  हर हिंदू हूंकार भरे।   वर्ष नया हो हर्ष नया हो घटा प्रेम की छाई हो। जय श्री राम के नारों से गूंज रही अमराई हो।   आस्था विश्वास हृदय में भावो की बहती…