• उठो पार्थ | Kavita utho parth

    उठो पार्थ (  Utho parth )     उठो पार्थ प्रत्यंचा कसो महासमर में कूद पड़ो। सारथी केशव तुम्हारे तुम तो केवल युद्ध लड़ो।   धर्म युद्ध है धर्मराज युधिष्ठिर से यहां महारथी महाभारत बिगुल बजाओ उद्धत होकर हे रथी।   कर्ण भीष्म पितामह से महायोद्धा है सारे भारी। धनंजय धनुष बाण लेकर करो युद्ध…

  • राम | Shri ram ji ki kavita

    राम ( Ram )   १. रघुपति राघव रघुनाथ राम,भव भंजक प्रभु लीला ललाम आदर्शों के अवतार तुम्हें ,भारत की संस्कृति के प्रणाम! २. हे सर्वश्रेष्ठ मानव स्वरूप , तुम हर युग के इतिहास नवल जग में कोने कोने फैले , तुमसे जीवन विश्वास धवल! ३. यह एक शब्द का “राम” नाम,है जीवन का आधार…

  • सिद्धिदात्री | Chhand siddhidatri

    सिद्धिदात्री ( Siddhidatri ) मनहरण घनाक्षरी   नवशक्ति सिद्धिदात्री, सिद्धियों की दाता अंबे। साधक शरण माता, झोली भर दीजिए।   ध्यान पूजा धूप दीप, जप तप माला पाठ। भगवती भवानी मांँ, शरण में लीजिए।   पंकज पुष्प विराजे, चतुर्भुज रूप सोहे। कमलनयनी माता, दुख दूर कीजिए।   शंख चक्र गदा सोहे, वरदायिनी भवानी। सुख समृद्धि…

  • हंसते हंसते लोटपोट | Kavita hansate hansate lotapot

    हंसते हंसते लोटपोट ( Hansate hansate lotapot )     खिलखिलाकर हंस पड़े लोटपोट हो गए सारे। कहकहे गूंज उठे गगन में भी मुस्कुराए तारे।   हंसो हंसाओ सबको आनंद की बरसात हो। हंसी खुशी में दिन बीते खुशियों भरी रात हो।   हंसी मजाक की बात करें हंसमुख कहलाते वो। हंस-हंसकर जीवन में स्वर्ण…

  • ओ निर्मोही | Kavita o nirmohi

    ओ निर्मोही ( O nirmohi )   ओ निर्मोही ओ निर्मोही चले गए क्यों, छोड मुझें परदेश। तपता मन ये तुम्हें बुलाए, लौट के आजा देश। तुम बिन जीना नही विदेशिया,पढ लेना संदेश। माटी मानुष तुम्हे बुलाए, छोड के आ परदेश।   2. चटोरी नयन  चटोरी नयन हो गयी, पिया मिलन की आस में। निहारत…

  • मेरे श्री राम | kavita mere shri Ram

    मेरे श्री राम ( Mere Shri Ram )   त्याग तपस्या मर्यादा के प्रति पालक मेरे श्रीराम जन जन आराध्य हमारे सृष्टि संचालक प्रभु राम   हर लेते है पीर जगत की दीनबंधु दयानिधि राम मंझधार में अटकी नैया पार लगाते मेरे प्रभु राम   दुष्टों का संहार करें प्रभु सकल चराचर के स्वामी घट…

  • ख़ुशी से आज़म बदनसीब है | Badnaseeb shayari

    ख़ुशी से आज़म बदनसीब है ( Khushi se azam badnaseeb hai )   ख़ुशी से आज़म बदनसीब है बड़ा  जिंदगी  में  ग़रीब  है   वफ़ा में दग़ाबाज सब मिले नहीं कोई सच्चा  हबीब  है   चला  दूर मैं इसलिए आया यहाँ कौन  मेरा  रकीब  है   वही  दिल दुखा अब रहा मेरा रहा  जिसके हर…

  • तपन | Kavita Tapan

    तपन ( Tapan )   कितनी प्यारी सी तपन भरी थी उनकी मुस्कान में फरिश्ता  सी  लगने  लगी हमें भीड़ भरे जहान में   मदद को बढ़ा दिए हाथ साथ दे दिया जीवन में उनके प्यार की तपन से खिल गए फूल चमन में   महकी फुलवारी सारी प्रीत भरी बयार बहने लगी सद्भावों की…

  • युग | Kavita yug

    युग ( Yug )   युगो युगो से परिवर्तन की आंधी चलती आई हम बदलेंगे युग बदलेगा सब समझो मेरे भाई   सत्य सादगी सदाचरण जीवन में अपनाओ युग निर्माण करने वालों प्रेम सुधा बरसाओ   त्रेतायुग में रामचंद्रजी मर्यादा पुरुष कहलाए द्वापरयुग में द्वारिकाधीश माखन मिश्री खाए   कलयुग में महापुरुषों ने शुभ कर्म…

  • कालरात्रि | Chhand kalratri

    कालरात्रि ( Kalratri ) मनहरण घनाक्षरी   काली महाकाली दुर्गा, भद्रकाली हे भैरवी। चामुंडा चंडी रुद्राणी, कृपा मात कीजिए।   प्रेत पिशाच भूतों का, करती विनाश माता। सिद्धिदात्री जगदंबे, ज्ञान शक्ति दीजिए।   अग्नि ज्वाला से निकले, भयानक रूप सोहे। खड्ग खप्पर हाथ ले, शत्रु नाश कीजिए।   रूद्र रूप कालरात्रि, पापियों का नाश करें।…