कुछ रात ठहरी सी | Shero shayari
कुछ रात ठहरी सी ( Kuch raat gehri si ) कुछ रात ठहरी सी है , स्याह सी, गहरी सी है धुंध को ओढ़े सी है , कई राज समेटे सी है सर्द सी , जर्द सी , सीने में अलाव लिए हुए कांपती, कंपाती सी , दिल को हाथ में थामे सी…
कुछ रात ठहरी सी ( Kuch raat gehri si ) कुछ रात ठहरी सी है , स्याह सी, गहरी सी है धुंध को ओढ़े सी है , कई राज समेटे सी है सर्द सी , जर्द सी , सीने में अलाव लिए हुए कांपती, कंपाती सी , दिल को हाथ में थामे सी…
बुलंद हुंकार ( Buland hunkar ) मझधार में डूबी नैया अब पार होनी चाहिए कवियों की भी संगठित सरकार होनी चाहिए सत्ता को संभाले कविता लेखनी की धार बन मंचों से गूंज उठे वो बुलंद हूंकार होनी चाहिए मातृभूमि को शीश चढ़ाते अमर सपूत सरहद पे महासमर में योद्धाओं की ललकार होनी…
शकुन्तला ( Shakuntala kavita ) घटा घनघोर घन घन बरसे,दामिनी तडके है तड तड। धरा की प्यास मिटती, तन मे जगती प्यास है हर पल। मिले दो नयन नयनो से, मचल कर कामना भडके। लगे आरण्य उपवन सा,अनंग ने छल लिया जैसे। भींगते वस्त्र यौवन से लिपट कर, रागवृंत दमके। रति सी…
अंतिम यात्रा ( Antim yatra ) जीवन की प्रचंड धूप में मनुज तपता रहा दिन रात नयन कितने स्वप्न देखे कितनी शामें कितने प्रभात भाग दौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता रहा वो निष्काम चलता रहा मुसाफिर सा अटल पथिक अविराम जीवन सफर में उतार-चढ़ाव सुख-दुख के मेले हंसते-हंसते जीवन बिता आज…
शान्तिपर्व ( Shanti Parva ) करबद्ध निवेदन है तुमसे, अधिकार हमारा वापस दो। या तो प्रस्ताव सन्धि कर लो,या युद्ध का अब आवाहृन हो। हे नेत्रहीन कौरव कुल भूषण, ज्ञान चक्षु पर केन्द्रित हो। या पुत्र मोह का त्याग करो, या भरत वंश का मर्दन हो। मैं देवकीनंदन श्रीकृष्ण, पाण्डव कुल …
मीठी-मीठी ठण्डक ( Meethi meethi thandhak ) कांप रहे सब हाथ पांव, मौसम मस्त रजाई का। देसी घी के खाओ लड्डू, मत सोचो भरपाई का। ठिठुर रहे हैं लोग यहां, बर्फीली ठंडी हवाओं से। धुंध कोहरा ओस आई, अब ठंड बढ़ गई गांवों में गजक तिल घेवर बिकती, फीणी की भीनी महक।…
गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है ( Gulshan mein hi shabnam e daur nahin hai ) गुलशन में ही शबनम ए दौर नहीं है शाखों पर ही फूल खिला और नहीं है महंगाई में दाल ख़रीदे क्या आटा आया अच्छा ही यारों दौर नहीं है छोड़ फ़कीर है मांगे …
लक्ष्मण रेखा ( Laxman rekha ) परिधि कों पार नही करना हे माता,वचन हमें दे दो। कोई भी कारण हो जाए,निरादर इसका मत करना। परिधि को पार नही करना….. ये माया का अरण्य है, जिसमें दानव रचे बसे है। कही भी कुछ भी कर सकते है,ये दानव दुष्ट बडे है। ये छल से रूप मोहिनी…
वो कहता रकीब हूँ बहुत मैं! ( Wo kahta raqeeb hoon bahut main ) वो कहता रकीब हूँ बहुत मैं! जिसका ही हबीब हूँ बहुत मैं सामान खरीदूँ कैसे महंगा पैसों से ग़रीब हूँ बहुत मैं सच बोल रहा हूँ मैं सभी से कहते सब अजीब हूँ बहुत मैं कर…
निबंध : इंटरनेट क्या है इसका उपयोग एवं लाभ ( Essay: What is Internet, its use and benefits in Hindi ) प्रस्तावना – आज के समय में इंटरनेट एक ऐसा शब्द है जिससे हर कोई परिचित है। आज के दौर में इंटरनेट के बिना कोई भी कार्य आसानी से नहीं किया जा सकता है।…