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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Bhula rahe ho na kavita
    कविताएँ

    भुला रहे हो न | Bhula rahe ho na kavita

    ByAdmin December 18, 2021

    भुला रहे हो न ( Bhula rahe ho na )     कुछ बोलो कुछ तो सच बोलो, आज लिखकर मिटा रहे हो न। चुड़ा दही कुर्ता पायजामा आदि, बोलो ना तुम क्यों शर्मा रहे हो न।   जहां आज खड़े हो ऐ उनकी है, पेड़ पौधे कुआं कल सब के सब। क्यों छुप कर…

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  • Ang pradarshan kavita
    कविताएँ

    अंग प्रदर्शन का कोहराम | Kavita

    ByAdmin December 17, 2021

    अंग प्रदर्शन का कोहराम ( Ang pradarshan ka kohram )   फिल्मी दुनिया वालों ने फैशन चलन चलाया है फैशन के इस दौर में युवाओं को बहकाया है   संस्कार सारे सब भूले हो रही संस्कृति नीलाम है चारों ओर शोर मचा अंग प्रदर्शन का कोहराम है   नदी किनारे बीच सड़क पर अर्धनग्न बालायें…

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  • Sad shayari
    शेरो-शायरी

    रोज़ भीगी है आंखें | Sad shayari

    ByAdmin December 17, 2021

    रोज़ भीगी है आंखें नमी में बहुत ( Roz bheegi hai aankhen nami mein bahut )   रोज़ भीगी है आँखें नमी में बहुत खा गया हूँ दग़ा दोस्ती में बहुत कब न जाने मिलेगा मुझे वो आकर मैं डूबा हूँ जिसकी बेकली में बहुत दुश्मनी  छोड़  कर दोस्ती तू मगर ख़त्म हो जाता सब…

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  • Chadhate suraj
    कविताएँ

    चढ़ते सूरज | Chadhate suraj

    ByAdmin December 16, 2021December 16, 2021

    चढ़ते सूरज ( Chadhate suraj )   चढ़ते सूरज की सवारी मेरे सिर पे आ गई । हम सफर थी मेरी परछाई उसे भी खा गई ।।   आपको जुल्मों का कर के तजुर्बा तारीफ में । कर रहा था बयां कड़वाहट जुबां पे आ गई ।।   सहन करने के अलावा और कुछ वश…

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  • Essay in Hindi on casteism in Indian Politics
    निबंध

    निबंध : भारतीय राजनीति में जातिवाद | Essay in Hindi on casteism in Indian Politics

    ByAdmin December 16, 2021

    निबंध : भारतीय राजनीति में जातिवाद ( Essay in Hindi on casteism in Indian Politics )   प्रस्तावना :- भारत में जातिवाद की व्यवस्था विद्यमान है, जो यहां की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक प्रवृत्तियों को प्रभावित करती है। इतना ही नहीं राजनीति भी जाति प्रथा से प्रभावित है। जाति के आधार पर भेदभाव भारत में…

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  • Kavita pratisodh
    कविताएँ

    प्रतिशोध | Kavita pratisodh

    ByAdmin December 16, 2021

    प्रतिशोध ( Pratisodh )   प्रतिशोध की उठती ज्वाला जब अंगारे जलते हैं सर पर कफ़न बांधे वीर लड़ने समर निकलते हैं   जब बदले की भावना अंतर्मन में लग जाती है तन बदन में आग लगे भृकुटियां तन जाती है   तीखे बाण चले वाणी के नैनों से ज्वाला दहके प्रतिशोध की अग्नि में…

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  • Nafratein shayari
    शेरो-शायरी

    नफ़रतें दिल से सभी अपने भुलाकर देखिए | Nafratein shayari

    ByAdmin December 15, 2021December 15, 2021

    नफ़रतें दिल से सभी अपने भुलाकर देखिए ( Nafratein dil se sabhi apne bhula kar dekhiye )     नफ़रतें दिल से सभी अपने भुलाकर देखिए जिंदगी उल्फ़त लगेगी मुस्कुराकर देखिए   प्यार की ख़ुशबू महकेगी जिस्म के हर हिस्से में ए सनम मुझको गले अपने लगाकर देखिए   जिंदगी तेरी लगेगी ख़ूबसूरत प्यार भरी…

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  • विश्वासघात | Vishwasghaat kavita
    कविताएँ

    विश्वासघात | Vishwasghaat kavita

    ByAdmin December 15, 2021November 1, 2022

    विश्वासघात ( Vishwasghaat )   छल कपट विश्वासघात का दुनिया में है बोलबाला हंसों का दाना काग चुग रहे छीने मुंह का निवाला   स्वार्थ सिद्ध करने वाले बोल मधुर से बोल रहे अपनापन अनमोल जता जहर हवा में घोल रहे   दगाबाजी धोखाधड़ी वंचना देशद्रोह और गद्दारी विश्वासघात के रूप कई अपघात और भ्रष्टाचारी…

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  • Kshanik duhkh sukh
    कविताएँ

    क्षणिक दुःख सुख | Kavita

    ByAdmin December 14, 2021December 14, 2021

    क्षणिक दुःख सुख ( Kshanik duhkh sukh )   दुःख कहें या सुख जिन्दगी का एक सिलसिला है, कहीं टपकता बूंद है,तो कहीं कहीं सुखा गिला है।   अगर दुख न होता तो सुख को कहां से लाते हम, सब सुखी ही रहते तो भला देवालय क्यों जाते हम।   कुछ उधार नहीं मिलता यहां…

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  • Zameen kavita
    कविताएँ

    जमीन | Zameen kavita

    ByAdmin December 14, 2021

    जमीन ( Zameen )     जो जमीन से जुड़े रहे संस्कार उन्हीं में जिंदा है देशद्रोही गद्दारों से हमारी भारत माता शर्मिंदा है   हरी भरी हरियाली धरती बहती मधुर बयार यहां देशभक्ति दीप जले मन में जोशीले उद्गार जहां   यह जमी यह आसमा पर्वत नदियां लगे भावन अविरल बहती गंगधारा बलखाती सरिता…

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