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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से
    कविताएँ

    तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से | Kavita

    ByAdmin July 22, 2021

    तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से ( Tumhe chaha adhik sare jahan se )   तुम्हे चाहा अधिक सारे जहां से। मुकद्दर मैं मगर लाऊ कहां से।। ऐ  मेरी  जाने  गजल  तू  ही  बता, कौन हंसकर हुआ रूखसत यहां से।। किसी भी चीज पे गुरुर न कर, हाथ खाली ही आया है वहां से।। मैं …

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  • Jal Bin
    कविताएँ

    जल बिन | Kavita

    ByAdmin July 21, 2021

    जल बिन ( Jal Bin )   इकदिन समंदर भी सूख जाएगा व्यर्थ पानी बहाया जा रहा  घर-घर लगाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा    जहां थी जरूरत सभी को इक गिलास पानी की वहां चलाकर समरसेबुल व्यर्थ पानी बहाया जा रहा   पानी का कीमत इक दिन जाकर मैं मछलियों से पूछा, वो…

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  • शटर उठा दो
    कविताएँ

    शटर उठा दो | Kavita

    ByAdmin July 21, 2021

    शटर उठा दो ( Shatar utha do )   मेरे ख्याल रूपी ब्रेड पे बटर लगा दो। दिल का बन्द है दुकान तुम शटर उठा दो।   मिला के नयन नयनों से यू आँखे चार कर लो। पनीर तल के रखा है कि तुम मटर मिला दो।   पुलाव बन रही ख्यालों में थाली लगा…

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  • जिंदगी में हिज्र की ऐसी रवानी हो गयी
    शेरो-शायरी

    जिंदगी में हिज्र की ऐसी रवानी हो गयी | Ghazal

    ByAdmin July 21, 2021

    जिंदगी में हिज्र की ऐसी रवानी हो गयी ( Zindagi mein hijr ki aisi rawani ho gayi )     जिंदगी  में  हिज्र  की  ऐसी  रवानी  हो   गयी अब लबों की ही मुहब्बत इक कहानी हो गयी   अब ख़िलाफ़ उसके सभी को होना होगा हाँ मगर यार उसकी अब बहुत देखो मनमानी  हो गयी…

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  • पुत्री की वेदना शराबी पिता से
    कविताएँ

    पुत्री की वेदना शराबी पिता से | Kavita

    ByAdmin July 21, 2021

    पुत्री की वेदना शराबी पिता से ( Putri ki vedna sharabi pita se )   पापा मेरी किताब , मेरे अरमान है,  मेरी खुशी है, मेरा भविष्य है,          सब बेच मेरी खुशियों का          शराब पी गए, पापा मां का मंगलसूत्र सुहाग है मांग का सिंदूर है,      सब बेच उनके अरमानों का       …

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  • संसय
    कविताएँ

    संसय | Kavita

    ByAdmin July 21, 2021

    संसय ( Sansay )   मन को बाँध दो दाता मेरे,मेरा मन चंचल हो जाता है। ज्ञान ध्यान से भटक रहा मन,मोह जाल मे फंस जाता है।   साध्य असाध्य हो रहा ऐसे, मुझे प्रेम विवश कर देता है। बचना चाहूं मैं माया से पर, वो मुझे खींच के ले जाता है।   वश में…

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  • बंधु अपने दिल की सुन
    कविताएँ

    बंधु अपने दिल की सुन | Geet

    ByAdmin July 21, 2021July 21, 2021

    बंधु अपने दिल की सुन ( Bandhu apne dil ki soon )   चल राही तू रस्ता चुन, बंधु अपने दिल की सुन। बंधु अपने दिल की सुन,बंधु अपने दिल की सुन। अपनी धुन में बढ़ता जा, उन्नति शिखर चढ़ता जा। आंधी से तूफानों से, हर मुश्किल से लड़ता जा। हौसला करके बुलंद, गा मस्ती…

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  • प्रतिशोध
    कविताएँ

    प्रतिशोध | Pratishodh

    ByAdmin July 19, 2021July 18, 2023

    प्रतिशोध ( Pratishodh )   मै हार नही सकता फिर ये, जंग जीत दिखलाऊंगा। फिर से विजयी बनकर के भगवा,ध्वंजा गगन लहराऊगा।   मस्तक पर चमकेगा फिर सें, चन्दन सुवर्णा दमकांऊगा। मै सागर जल तट छोड़ चुका पर,पुनः लौट कर आऊँगा।   जी जिष्णु सा सामर्थवान बन, कुरूक्षेत्र में लौटूंगा। मैं मरा नही हूँ अन्तर्मन…

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  • बरस बरस मेघ राजा
    कविताएँ

    Kavita | बरस बरस मेघ राजा

    ByAdmin July 19, 2021

    बरस बरस मेघ राजा ( Baras baras megh raja )   मेघ राजा बेगो आजा, बरस झड़ी लगा जा। सावन सुहानो आयो, हरियाली छाई रे।   अंबर बदरा छाये, उमड़ घुमड़ आये। झूल रही गोरी झूला, बागा मस्ती छाई रे।   रिमझिम रिमझिम, टिप टिप रिमझिम। बिरखा फुहार प्यारी, तन मन भाई रे।   ठंडी…

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  • आयी देखो फुहार सावन की
    शेरो-शायरी

    आयी देखो फुहार सावन की | Aazam Poetry

    ByAdmin July 18, 2021February 6, 2023

    आयी देखो फुहार सावन की ( Aayi dekho phuhaar sawan ki )     आयी देखो फुहार सावन की ! खिल रही है बहार सावन की   बूंदों में सरगम उल्फ़त की ऐसी दिल करे  बेक़रार सावन की   प्यास तन की जाने बुझेगी कब कर रहा  इंतिजार सावन की   गीत गाये ग़ज़ल यादों…

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