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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • हे जग के करतार
    कविताएँ

    हे जग के करतार | Jag ke Kartar

    ByAdmin May 20, 2021October 9, 2023

    हे जग के करतार ( He jag ke kartar )   हे जग के करतार, जग का पालनहारा, लौटा दो मुस्कान लबों की, सुनो सांवरा प्यारा ।   घट घटवासी अंतर्यामी, हाल पता है सारा, मंझधार में डूबी नैया, प्रभु लगा दो किनारा।   कुदरत कई रंग बदलती, क्यों लीला करते हो, सबको जीवन देने…

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  • प्रेम में डूबी स्त्री
    कविताएँ

    प्रेम में डूबी स्त्री | Kavita

    ByAdmin May 20, 2021May 20, 2021

    प्रेम में डूबी स्त्री ( Prem me dubi stree )   प्रेम में डूबी किसी स्त्री को कभी कोई फर्क़ नहीं पड़ता कि तुम कितने पढ़े लिखे हो या फिर अनपढ़, तुम दिन के दो सौ रूपए कमाते हो या दो हज़ार, तुम सबसे सुंदर दिखते हो या बदसूरत !… बस, उसे तो फ़र्क सिर्फ़…

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  • कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला
    शेरो-शायरी

    कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला | Ghazal

    ByAdmin May 19, 2021May 22, 2021

    कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला! ( Kaise E Aazam Kahun Apna Bhala )     कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला! जब यकीं में वो दग़ा करता भला   कहता है जब दोस्त हूँ सच्चा तेरा क्यों दिखाता ग़ैर  वो चेहरा भला   एक क़ातिल है वफ़ाओ का मेरी शक्ल से  ही जो मगर…

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  • चक्र समय का चलता है
    कविताएँ

    चक्र समय का चलता है | Kavita

    ByAdmin May 19, 2021

    चक्र समय का चलता है ( Chakra ka samay chalta hai )   परिवर्तन नित निरंतर होता जग का आलम बदलता है नई सोच नई उमंगे भर चक्र समय का चलता हैं   सुख दुख जीवन के पहलू आंधी तूफान आते जाते जो लक्ष्य साध कर चलते व़ो मंजिलों को पा जाते   शनै शनै…

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  • कोप कुदरत का
    कविताएँ

    कोप कुदरत का | Kavita

    ByAdmin May 18, 2021

    कोप कुदरत का ( Kop kudrat ka )   कुदरत कोप कर रही सारी आंधी तूफान और महामारी फिर भी समझ न पाया इंसां भूल हुई है अब हमसे भारी   खनन कर खोखली कर दी पावन गंगा में गंदगी भर दी पहाड़ों के पत्थर खूब तोड़े खुद ही खुद के भाग्य फोड़े   सड़के …

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  • जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं
    शेरो-शायरी

    जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं | Ghazal Jab Muhabbat ka

    ByAdmin May 18, 2021February 8, 2023

    जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं ( Jab muhabbat ka khila gulshan nahi )   जब मुहब्बत का खिला गुलशन नहीं मेरा  खुशियों  से  भरा  दामन नहीं   दोस्ती  में  खाए  है  कितने  दग़ा अब किसी से मेरा मिलता मन नहीं   मैं जिससे आटा मगर कुछ ख़रीद लूँ पास  मेरे  तो  बचा  ही धन…

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  • तेरा होना मेरा होना
    शेरो-शायरी

    तेरा होना मेरा होना | Poem Tera Hona Mera Hona

    ByAdmin May 17, 2021February 8, 2023

    तेरा होना मेरा होना ( Tera hona mera hona )   भ्रम सा ही तो है तेरा होना मेरा होना अनसुलझे सवालों सा तू उलझे से जवाबों सी मैं उतार जामा यह फरेब का देख फिर क्या है तू क्या हूं मैं भरा भरा सा लगे फिर भी खाली सा तू खाली खाली सी मैं…

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  • बहु राज
    कविताएँ

    बहु राज || Kavita

    ByAdmin May 16, 2021

    बहु राज ( Bahu Raj )   छोटे-छोटे  जब  थे  लाल मात-पिता कितने खुशहाल !   जननी जनक दुलारे सुत को पुत्र प्रेम में हारे खुद को  !      पाल पोस कर बड़ा किया   पैर पर उनको खड़ा किया ! मन में जागे फिर नए सपने बहू  बिना घर सुने  अपने  !  घर…

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  • दोहा सप्तक
    कविताएँ

    दोहा सप्तक | Doha Saptak

    ByAdmin May 16, 2021May 16, 2021

    दोहा सप्तक ( Doha Saptak )   एक भयावह दौर से,गुजर रहा संसार। इक दूजे की मदद से,होगा बेड़ा पार। मानवता की सेवा में,तत्पर हैं जो लोग। दुआ कीजिए वे सदा,हरदम रहें निरोग। बेशक अवसर ढूंढिए,है यह विपदा काल। सौदा मगर ज़मीर का,करें नहीं हर हाल। सॉंसों के व्यापार में,जो हैं दोषी सिद्ध। पायें फॉंसी…

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  • रिश्तों के धागे
    शेरो-शायरी

    रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे | Shayari On Relations

    ByAdmin May 15, 2021

    रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे ( Rishton ke dhage sab torte wo rahe )   रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे और हम प्यार से जोड़ते वो रहे   रह गये है  हम आवाज देते यूं ही और मुंह हमसे तो मोड़ते वो रहे   प्यार के भेजते ही रहे फ़ूल हम…

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