प्यार की कब बहार देखी है | Ghazal
प्यार की कब बहार देखी है ( Pyar ki kab bahar dekhi hai ) प्यार की कब बहार देखी है ! नफ़रतों की दयार देखी है आ रही है यहां ग़म की बारिश कब ख़ुशी की फुवार देखी है जो आँखें थी भरी नज़ाकत से प्यार में बेक़रार देखी है थी…
प्यार की कब बहार देखी है ( Pyar ki kab bahar dekhi hai ) प्यार की कब बहार देखी है ! नफ़रतों की दयार देखी है आ रही है यहां ग़म की बारिश कब ख़ुशी की फुवार देखी है जो आँखें थी भरी नज़ाकत से प्यार में बेक़रार देखी है थी…
हम कठपुतली है ईश्वर की ( Hum kathputli hai Ishwar ki ) सारी दुनिया रंगमंच है खेल वही दिखलाएगा हम कठपुतली है ईश्वर की चाहे जिसे नचायेगा नीली छतरी वाला बैठा डोर वही हिलाएगा न्यारे न्यारे दे किरदार अभिनय खूब कराएगा हमको रोल निभाना प्यारे बाजीगर खेल दिखाएगा हम कठपुतली है ईश्वर की मर्जी…
जामुन ( Jaamun ) देखो काली-काली जामुन भाए डाली डाली जामुन l कुछ पक्की कुछ कच्ची जामुन कुछ मीठी कुछ खट्टी जामुन l गुच्छे में खूब लटक रही है बच्चों को खूब खटक रही है l कुछ काली कुछ लाल हरी लेकिन जामुन खूब फरी l बच्चे चढ़कर तोड़ रहे हैं कुछ बीन रहे…
ईश वन्दना ( Ish Vandana ) कमल पुष्प अर्पित करना, शिव शम्भू तेरे साथ रहे। इस त्रिभुवन के अरिहंता का,सम्मान हृदय में बना रहे। आँखों के मध्य पुतलियों में, भगवान हमेशा बने रहे, हो दशों दिशा मे नाम सदा, जयकार हमेशा बना रहे। विघ्नहरण गणपति की स्तुति, जो है तारणहार। सदा भवानी दाहिने…
जब भी चाहेगा तू रूलायेगा ( Jab bhi chahega tu rulayega ) इससे ज्यादा भी क्या सतायेगा, जब भी चाहेगा तू रुलायेगा।। शुकून हवा का इक झोंका है, अभी आया है चला जायेगा।। नज़र मिलाके जरा बात करो, मामला तब समझ में आयेगा।। एक मुद्दत से मैं सोया ही नहीं अपनी बाहों में कब…
आदत ( Aadat ) मीठा मीठा बोल कर घट तुला तोलकर वाणी मधुरता घोल फिर मुख खोलिए प्रतिभा छिपाना मत पर घर जाना मत सत्कार मेहमानों का हो आदत डालिए प्रातः काल वंदन हो शुभ अभिनंदन हो सेवा कर्म जीवन में आदत बनाइए रूठे को मना लो आज करना है शुभ…
जन्म लेती है ग़ज़ल तो शायरी की कोख से ( Janm leti hai ghazal to shayari ki kokh se ) जन्म लेती है ग़ज़ल तो शाइरी की कोख से जिंदगी मिलती है जैसे जिंदगी की कोख से देखिए वरना अमीरी कब पड़फती है भूखी भूख की आहें उठती है मुफ़लिसी की कोख…
जंगल ( Jungle ) कुदरत का उपहार वन जन जीवन आधार वन जंगल धरा का श्रृंगार हरियाली बहार वन बेजुबानों का ठौर ठिकाना संपदा का खूब खजाना प्रकृति मुस्कुराती मिलती नदी पर्वत अंबर को जाना फल फूल मेंवे मिल जाते नाना औषधि हम पाते वन लकड़ी चंदन देते हैं जीव आश्रय पा…
सौंदर्य ( Saundarya ) सौन्दर्य समाहित ना होता, तेरा मेरे अब छंदों में। छलके गागर के जल जैसा, ये रूप तेरा छंदों से। कितना भी बांध लूं गजलों मे,कुछ अंश छूट जाता है, मैं लिखू कहानी यौवन पे, तू पूर्ण नही छंदों में। रस रंग मालती पुष्प लता,जिसका सुगंध मनमोहिनी सा। कचनार कली…
काव्य कलश ( Kavya Kalash ) अनकहे अल्फाज मेरे कुछ बात कुछ जज्बात काव्य धारा बहे अविरल काव्य सरिता दिन रात काव्यांकुर नित नूतन सृजन कलमकार सब करते साहित्य रचना रचकर कवि काव्य कलश भरते कविता दर्पण में काव्य मधुरम साहित्य झलकता साहित्य सौरभ से कविता का शब्द शब्द महकता आखर आखर मोती बनकर…